बिहार चुनाव अभियान के महत्वपूर्ण चरण में कांग्रेस का तेवर अब और तीखा होता दिखाई दे रहा है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अररिया में विशाल रैली को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य की NDA सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार की कमान अब पटना में नहीं, बल्कि दिल्ली में बैठे नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हाथों में है। उनका आरोप था कि इस सरकार में गरीब, दलित, पिछड़े, अतिपिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लिए कोई नीतियां नहीं बनतीं। बल्कि जिन योजनाओं का ढोल पीटा जाता है, उनका पूरा लाभ केवल प्रधानमंत्री के ‘प्रिय मित्रों’ को दिया जाता है। राहुल ने कहा कि बिहार में किसानों से लेकर युवाओं तक सभी ठगे गए हैं, और यहां सरकार सिर्फ और सिर्फ अडानी को फायदा पहुंचाने में लगी है — जमीन 1 रुपए में दी जा रही है और जनता के हक का विकास वहीं दबा दिया गया है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नफरत की राजनीति करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि मोदी की राजनीति की जड़ें धर्म और जातीय विभाजन में हैं, और जनता को लड़ाकर सत्ता पर काबिज रहने का खेल खेला जा रहा है। उन्होंने मोदी-शाह की सरकार को ‘जंगलराज’ करार देते हुए कहा कि आज देश में धमकी का राज, बेरोजगारी का राज, गलत GST का राज और एजेंसियों के दुरुपयोग का राज चल रहा है। किसानों-मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं और युवा भविष्य की चिंता में अपनी जमीन छोड़ने को मजबूर हैं।
इसी अभियान के तहत पूर्णिया की सभा में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर भी तंज कसा जिसमें उन्होंने युवाओं को सस्ता डेटा मिलने को बड़ी उपलब्धि बताया था। राहुल बोले — “सच्चाई यह है कि 21वीं सदी का नया नशा ‘रील’ है। जब युवा रील देखता है, तो पैसा अडानी-अंबानी की जेब में जाता है। युवाओं को रोजगार चाहिए, रील नहीं।” उनका दावा था कि बिहार की महागठबंधन सरकार बनते ही युवाओं को परीक्षा फीस माफी, यात्रा किराया, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, हर परिवार से एक सरकारी नौकरी और जॉब कैलेंडर जैसी सुविधाएं तुरंत दी जाएंगी।
दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने रीगा में जनता की भावनाओं को सीधे छूने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब एक ऐसी सरकार बनने जा रही है जो वास्तव में लोगों के लिए काम करेगी — “बदलेगी सरकार, बदलेगा बिहार।” प्रियंका ने PM मोदी और CM नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने 20 साल सत्ता में रहते हुए भी पलायन और गरीबी की समस्या खत्म नहीं की। “लोग पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं, लेकिन मोदी-नीतीश को ये नहीं दिखता। वे जनता के बीच नहीं, सिर्फ टीवी और पोस्टर में दिखाई देते हैं।”
प्रियंका गांधी ने चुनाव आयोग और BJP पर भी बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि दोनों मिलकर लोकतंत्र कमजोर कर रहे हैं, और वोट चुराने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने चेतावनी के अंदाज में चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों — ज्ञानेश कुमार, एस.एस. संधू और विवेक जोशी — का नाम लेकर कहा कि जनता इनके चेहरे याद रखे क्योंकि ये संविधान और वोटर अधिकारों के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा — “जो लोग इस देश के साथ विश्वासघात कर रहे हैं, उन्हें देश भूलेगा नहीं।”
अररिया और रीगा की इन चुनावी सभाओं ने गांधी परिवार की रणनीति को स्पष्ट कर दिया है — चुनाव अब सिर्फ बेरोजगारी, गरीबी और पलायन के मुद्दों पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र और वोट के अधिकार की रक्षा के सवाल पर लड़ने की तैयारी है। बिहार का चुनावी माहौल पहले ही गरम था, लेकिन इन भाषणों ने राजनीतिक तापमान को और ज्यादा उबाल दे दिया है।




