महेंद्र सिंह। नई दिल्ली 26 नवंबर 2025
1 अप्रैल से लागू होने जा रहे नए इनकम टैक्स एक्ट के साथ देश के करोड़ों करदाताओं के लिए टैक्स फाइलिंग और वित्तीय अनुपालन की प्रक्रिया बड़े पैमाने पर बदलने वाली है। केंद्र सरकार ने नए नियमों, संशोधनों और प्रशासनिक सुधारों का पूरा खाका तैयार किया है, जिसका उद्देश्य टैक्स प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल, डिजिटल और करदाता–अनुकूल बनाना बताया जा रहा है। नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन से लागू होने वाले ये बदलाव न केवल ITR फॉर्म्स के ढांचे को प्रभावित करेंगे, बल्कि कर निर्धारण वर्ष, समयसीमा, सत्यापन प्रणाली और डेटा मिलान की प्रक्रिया को भी नए स्वरूप में पुनर्व्यवस्थित करेंगे। सरकार का दावा है कि ये बदलाव टैक्स फाइलिंग को आसान बनाएंगे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि करदाताओं को नई व्यवस्था को समझने के लिए शुरुआती महीनों में अधिक सजग रहना होगा।
सबसे बड़ा बदलाव नए ITR फॉर्म्स को लेकर है। वित्त मंत्रालय ने कई पुराने और जटिल फॉर्म्स को या तो हटाया है या उन्हें एकीकृत किया है। नए फॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि छोटे टैक्सपेयर्स, सैलरीड एम्प्लॉइज़, पेंशनर्स और फ्रीलांसरों के लिए फाइलिंग प्रक्रिया पहले से ज्यादा सीधी हो। नए फॉर्म्स में आय के स्रोत, टैक्स कटौती, निवेश विवरण और बैंकिंग डेटा का समन्वय अधिक डिजिटल ऑटो-फिल तरीके से होगा। अब फॉर्म की संरचना ऐसी रखी जा रही है कि सूचना दोहराने की आवश्यकता कम हो और त्रुटियों की गुंजाइश न्यूनतम रहे। आयकर विभाग के डेटा इंटीग्रेशन सिस्टम के चलते अधिकांश सूचनाएँ—जैसे वेतन विवरण, TDS, बैंक ब्याज, शेयर–म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन—स्वतः भर जाएंगी।
इसके साथ ही टैक्सपेयर्स के लिए एक और महत्वपूर्ण बदलाव है ‘टैक्स ईयर’ की नई परिभाषा, जिसे सरकार अधिक तार्किक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। हालांकि वित्त वर्ष (1 अप्रैल–31 मार्च) पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन टैक्स ईयर के भीतर रिपोर्टिंग, दस्तावेज़ीकरण और रिटर्न प्रोसेसिंग की नई समयसीमाएँ लागू होंगी। यह व्यवस्था करदाताओं को वित्तीय योजना बनाने में अधिक स्पष्टता देगी और रिटर्न की समय पर प्रोसेसिंग सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही, नए सुधारों के तहत रिफंड की प्रक्रिया और तेज़ तथा त्रुटिरहित होने वाली है, जिसके लिए आयकर विभाग ने डिजिटल वेरिफिकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा-मिलान प्रणाली को अपग्रेड किया है।
ई-वेरिफिकेशन और KYC व्यवस्था भी 1 अप्रैल से बदलने वाली प्रमुख प्रक्रियाओं में शामिल है। अब टैक्स रिटर्न दाखिल करने के बाद पहचान सत्यापन अधिक सख्त और सुरक्षित डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से होगा। आधार–PAN लिंकिंग, बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन और मोबाइल–ईमेल ओटीपी प्रमाणीकरण को मजबूत किया जा रहा है, ताकि गलत रिटर्न, फर्जी दावे और पहचान धोखाधड़ी को नियंत्रित किया जा सके। इसके साथ ही, कर विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि देर से रिटर्न फाइल करने वालों पर पेनल्टी प्रावधान और अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होंगे, ताकि कर अनुपालन के प्रति अनुशासन बढ़ सके।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत सरल कर प्रबंधन की दिशा में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं—जैसे छोटे करदाताओं के लिए प्री-फिल्ड रिटर्न, पुराने और जटिल सेक्शनों का सरलीकरण, और टैक्स विवाद समाधान तंत्र का डिजिटल विस्तार। कर विशेषज्ञों के अनुसार, इन बदलावों का सीधा असर प्रत्येक करदाता पर पड़ेगा, इसलिए नए नियमों को समझना और समय पर फाइलिंग की तैयारी करना अत्यंत जरूरी होगा।
1 अप्रैल से लागू होने वाली यह नई कर व्यवस्था भारत की टैक्स प्रणाली को एक नई दिशा देने जा रही है। चाहे यह प्रक्रिया करदाताओं के लिए आसान साबित हो या शुरुआती दिनों में भ्रम पैदा करे—इतना निश्चित है कि आने वाला वित्तीय वर्ष टैक्स अनुपालन और औपचारिकताओं के लिहाज से ऐतिहासिक होने वाला है।





