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₹500 देकर बनें को-ओनर: ‘भारत टैक्सी’ में 80% मुनाफा ड्राइवरों को, अमूल मॉडल पर अमित शाह का बड़ा दांव

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 24 फरवरी 2026

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म भारत टैक्सी को ड्राइवरों के लिए कमाई और हिस्सेदारी का नया मॉडल बताते हुए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर ड्राइवरों की आय का न्यूनतम बेस रेट तय किया जाएगा और कुल मुनाफे का 80% हिस्सा सीधे ड्राइवरों को मिलेगा, जबकि 20% राशि सहकारी पूंजी के रूप में रखी जाएगी।

ड्राइवरों के साथ टाउनहॉल संवाद में अमित शाह ने कहा कि मौजूदा एग्रीगेटर कंपनियों में न्यूनतम कमाई की कोई गारंटी नहीं होती, लेकिन भारत टैक्सी ड्राइवरों की आय की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि न्यूनतम आय से ऊपर होने वाली कमाई का लाभ भी ड्राइवरों को ही मिलना चाहिए और इसी सोच के साथ सहकारी मॉडल तैयार किया गया है।

अमूल जैसा को-ओनर मॉडल

अमित शाह ने भारत टैक्सी की तुलना डेयरी सहकारी संस्था अमूल से करते हुए कहा कि जिस तरह छोटे निवेश से लाखों उत्पादकों ने अमूल को बड़ी संस्था बनाया, उसी तरह ड्राइवर भी मात्र ₹500 का शेयर खरीदकर प्लेटफॉर्म के को-ओनर बन सकते हैं। सदस्यता बढ़ने के साथ ड्राइवरों को सहकारी बोर्ड में प्रतिनिधित्व भी मिलेगा, जिससे नीतिगत फैसलों में उनकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

ड्राइवर नहीं ‘साथी’ और नई सुविधाएं

इस पहल के तहत ड्राइवरों को ‘ड्राइवर’ के बजाय ‘साथी’ कहने की अवधारणा लागू की जा रही है। महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए “सारथी दीदी” फीचर, मल्टी-चैनल शिकायत निवारण व्यवस्था, और वाहन खरीद के लिए सहकारी बैंकों से आसान ऋण व कम प्रीमियम पर बीमा सुविधा देने की भी घोषणा की गई।

विस्तार योजना और प्रतिस्पर्धा

सरकार के अनुसार प्लेटफॉर्म अगले दो वर्षों में करोड़ों ड्राइवरों को जोड़ने और तीन वर्षों में देश के सभी प्रमुख नगर निगम वाले शहरों तक विस्तार का लक्ष्य रखता है। अभी यह सेवा दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के कुछ शहरों में संचालित हो रही है। भारत टैक्सी को ओला, उबर और रैपिडो जैसे निजी एग्रीगेटर्स के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है, जहां आमतौर पर 25–30% तक कमीशन लिया जाता है, जबकि भारत टैक्सी फिलहाल कोई कमीशन नहीं काट रहा।

सहकारी ढांचे पर आधारित यह मॉडल ड्राइवरों को हिस्सेदारी, आय सुरक्षा और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देकर परिवहन क्षेत्र में नया संतुलन ला सकता है, जिससे निजी एग्रीगेटर बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ने के संकेत हैं।

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