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श्रेयस अय्यर पर बीसीसीआई की तानाशाही जारी—वेस्टइंडीज टीम चयन पर उठे सवाल

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मुंबई 22 सितंबर 2025

वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली आगामी टेस्ट सीरीज़ से पहले भारतीय टीम का चयन क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। चयनकर्ताओं ने कई बड़े और चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। सबसे अहम मुद्दा है — एक बार फिर श्रेयस अय्यर को टीम से बाहर रखना। अय्यर लंबे समय से भारतीय क्रिकेट में मिडिल ऑर्डर की रीढ़ माने जाते रहे हैं, लेकिन चोट से वापसी के बाद भी उन्हें बार-बार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। उनके फॉर्म और क्षमता को देखते हुए यह सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर चयन समिति उनके साथ नाइंसाफी क्यों कर रही है।

श्रेयस अय्यर की बल्लेबाज़ी तकनीक और विदेशी पिचों पर टिकने की क्षमता हमेशा भारतीय टीम के लिए वरदान रही है। हालांकि, बीते कुछ महीनों में चोट और ऑपरेशन के कारण वह लगातार टीम से बाहर रहे। फिटनेस हासिल करने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट और प्रैक्टिस मैचों में बेहतर प्रदर्शन दिखाया, लेकिन फिर भी उन्हें जगह नहीं दी गई। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह से लगातार नज़रअंदाज़ किया गया तो भारत एक भरोसेमंद बल्लेबाज़ को खो सकता है, जो मुश्किल हालात में टीम को संभालने का दम रखता है।

दूसरी ओर, करुण नायर का नाम भी स्क्वॉड से बाहर कर दिया गया है। करुण ने 2016 में तिहरा शतक लगाकर इतिहास रचा था, लेकिन उसके बाद से लगातार टीम से अंदर-बाहर होते रहे। अब ऐसा लगता है कि चयनकर्ता उन्हें पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर चुके हैं। यह स्थिति बताती है कि भारतीय क्रिकेट में कभी-कभी टैलेंट और प्रदर्शन से ज़्यादा राजनीति और चयनकर्ताओं की सोच का असर देखने को मिलता है।

इस बार चयनकर्ताओं ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए कुछ नए चेहरों पर भरोसा जताया है। बी. साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल के बीच कड़ी टक्कर देखी जा रही है। साई ने हाल ही में इंडिया ए के लिए लगातार रन बनाकर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया है। उनकी तकनीक और धैर्य ने उन्हें मिडिल ऑर्डर के लिए मजबूत दावेदार बना दिया है। वहीं, पडिक्कल भी घरेलू क्रिकेट में धमाकेदार प्रदर्शन करते रहे हैं और टेस्ट टीम में जगह पाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इन दोनों के बीच की प्रतिस्पर्धा टीम इंडिया के लिए भविष्य में मिडिल ऑर्डर को नई ताक़त दे सकती है।

टीम चयन में एक और महत्वपूर्ण पहलू है ऋषभ पंत की फिटनेस। पंत का नाम इस बार भी चर्चा में है। अगर वह पूरी तरह फिट होकर वापसी करते हैं, तो टीम को न केवल एक भरोसेमंद विकेटकीपर मिलेगा, बल्कि बैटिंग लाइनअप में अतिरिक्त धार भी जुड़ जाएगी। पंत की आक्रामक बल्लेबाज़ी विपक्षी टीम के लिए हमेशा सिरदर्द रही है।

क्रिकेट विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय टीम का यह चयन कई सवालों को जन्म दे रहा है। क्या यह सही समय है युवा खिलाड़ियों को आज़माने का, जबकि अनुभवी और सिद्ध खिलाड़ियों को किनारे कर दिया जा रहा है? क्या श्रेयस अय्यर जैसे बल्लेबाज़ को लगातार नज़रअंदाज़ करना टीम के संतुलन को नुकसान नहीं पहुंचाएगा?

स्पष्ट है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली यह टेस्ट सीरीज़ सिर्फ एक मुकाबला नहीं होगी, बल्कि यह आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के लिए टीम की तैयारी का भी हिस्सा होगी। अगर चयन में पारदर्शिता नहीं दिखी तो न सिर्फ खिलाड़ियों का मनोबल टूटेगा, बल्कि टीम इंडिया को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

सवाल अब यह है कि क्या भारतीय क्रिकेट में फिटनेस और युवा खिलाड़ियों को मौका देने की आड़ में अनुभवी और भरोसेमंद खिलाड़ियों के साथ नाइंसाफी की जा रही है? और क्या श्रेयस अय्यर जैसे बल्लेबाज़ को बार-बार बाहर रखना टीम की रणनीति में गंभीर खामी की ओर इशारा नहीं करता?

 

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