ओपिनियन | नोटबंदी से मनरेगा तक: मनमानी फैसले और उनका बोझ उठाता देश
एबीसी डेस्क | 27 नवंबर 2025 पिछले कुछ सालों में देश ने बार-बार एक ही सच्चाई महसूस की है—बड़े फैसले अचानक आते हैं, बिना तैयारी, बिना संवाद और बिना यह सोचे कि उनका असर आम आदमी की ज़िंदगी पर क्या पड़ेगा। फैसले सत्ता के ऊपरी कमरों में लिए जाते हैं, लेकिन उनकी कीमत चुकाता है…
