नालंदा (बिहार) 27 अगस्त 2025
बिहार की राजनीति में उस समय बड़ा बवाल खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद मंत्री और जेडीयू के कद्दावर नेता श्रवण कुमार पर उनके ही इलाके के ग्रामीण टूट पड़े। गुस्साए ग्रामीणों ने मंत्री पर न केवल हमला किया, बल्कि उन्हें एक किलोमीटर तक दौड़ाया। इस घटना ने न केवल स्थानीय राजनीति को हिलाकर रख दिया बल्कि नीतीश सरकार की जमीनी पकड़ पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनता का गुस्सा क्यों फूटा?
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार विकास और रोजगार के नाम पर सिर्फ झूठे वादे कर रही है। सड़कों की हालत खराब, रोजगार की किल्लत, भ्रष्टाचार और स्थानीय समस्याओं की अनदेखी ने लोगों को उग्र बना दिया। जब श्रवण कुमार अपने क्षेत्र में पहुंचे तो भीड़ का सब्र टूट गया और नारेबाजी के बीच उन्हें घेर लिया गया।
जनता के बीच मंत्री नहीं, गुस्से का प्रतीक बने श्रवण कुमार
गुस्साई भीड़ ने मंत्री को घेरते हुए उनका विरोध किया और उन पर पथराव की भी कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन हालात इस कदर बिगड़ गए कि मंत्री को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। ग्रामीणों ने करीब एक किलोमीटर तक उनका पीछा किया। यह नजारा बताता है कि जनता अब सिर्फ नाराज नहीं, बल्कि सीधे कार्रवाई करने को तैयार है।
नीतीश सरकार की साख पर गहरा धक्का
नीतीश कुमार की सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। अब अपने ही मंत्री पर जनता का हमला इस बात का साफ संकेत है कि सरकार और जनता के बीच भरोसे की दीवार टूट चुकी है। जनता अब सिर्फ वोट बैंक नहीं रही, बल्कि जवाब मांगने के लिए सड़कों पर उतर आई है।
विपक्ष का वार और सत्तापक्ष की सफाई
इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने नीतीश सरकार पर सीधा हमला बोल दिया है। उनका कहना है कि जनता अब बदलाव चाहती है और सत्ता पक्ष की नाकामी का नतीजा मंत्री पर हमला है। वहीं, जेडीयू नेताओं ने इसे ‘अलग-थलग घटना’ बताने की कोशिश की, लेकिन इस आक्रामक विरोध ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
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