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भोपाल AIIMS में अद्भुत सर्जरी, पैर की हड्डी से नया जबड़ा बनाकर लौटाई गई मुस्कान

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भोपाल 9 सितम्बर 2025

भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने चिकित्सा जगत में एक असाधारण उपलब्धि दर्ज की है। यहां डॉक्टरों की टीम ने एक युवती पर ऐसी दुर्लभ सर्जरी की, जिसने न केवल उसकी जिंदगी बदल दी बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारतीय चिकित्सा विज्ञान अब विश्व स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। युवती का जबड़ा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे वह न तो सही से खा पा रही थी और न ही बोल पा रही थी। चेहरा भी असमान हो गया था, जिसके कारण उसका आत्मविश्वास पूरी तरह से टूट चुका था। यही वह स्थिति थी, जहां डॉक्टरों ने उसे फिर से सामान्य जीवन देने की ठानी और असंभव दिखने वाले ऑपरेशन को संभव कर दिखाया।

डॉक्टरों ने युवती की हालत का गहराई से अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया कि उसके लिए सबसे बेहतर समाधान यही होगा कि पैर की हड्डी का इस्तेमाल करके नया जबड़ा बनाया जाए। यह प्रक्रिया बेहद जटिल और जोखिम भरी थी, क्योंकि इसमें मरीज के शरीर के एक हिस्से से हड्डी निकालकर उसे नए सांचे में ढालना और फिर जबड़े में फिट करना शामिल था। कई घंटे तक चली इस सर्जरी में डॉक्टरों ने युवती की पैर की हड्डी का इस्तेमाल कर नया जबड़ा तैयार किया और उसी पर 13 दांतों के इम्प्लांट लगाए। यह कार्य न केवल बारीकी से बल्कि अत्याधुनिक तकनीक की मदद से किया गया, ताकि जबड़ा पूरी तरह से कार्यात्मक हो और चेहरा सामान्य दिखे।

सर्जरी सफल रही और इसके बाद का परिणाम चौंकाने वाला था। युवती का चेहरा लगभग पहले जैसा दिखने लगा और सबसे बड़ी बात यह रही कि अब वह सामान्य रूप से भोजन कर सकती है और आसानी से बोल सकती है। उसकी मुस्कान, जो कभी बीमारी और दर्द के कारण खो गई थी, अब वापस लौट आई। यह देखकर न केवल परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे बल्कि डॉक्टरों की टीम भी संतोष और गर्व से भर उठी।

इस असाधारण ऑपरेशन ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत के डॉक्टर और मेडिकल संस्थान किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। भोपाल AIIMS ने जिस तरह से यह दुर्लभ सर्जरी पूरी की, उसने देश के चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह सिर्फ एक युवती के जीवन को नया रूप देने की कहानी नहीं है, बल्कि लाखों मरीजों और परिवारों के लिए यह उम्मीद की किरण भी है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मेहनत से असंभव को संभव बनाया जा सकता है।

क्या आप चाहेंगे कि मैं इस खबर का एक मानवीय दृष्टिकोण वाला संस्करण भी लिख दूं, जिसमें युवती और उसके परिवार की भावनाओं को और विस्तार से दर्शाया जाए?

 

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