राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/चेन्नई | 10 जून 2026
तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के दौरान कथित तौर पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) हुई। याचिका में इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है।
याचिका अधिवक्ता एम. श्रीनिवासन द्वारा दायर की गई है। इसमें तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के महासचिव एवं ग्रामीण विकास तथा जल संसाधन मंत्री एन. आनंद सहित चार पूर्व AIADMK विधायकों के खिलाफ जांच की मांग की गई है। आरोप है कि इन विधायकों ने पहले विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया और बाद में TVK में शामिल होकर राज्य में सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार के गठन का रास्ता तैयार किया।
याचिका में जिन पूर्व विधायकों का नाम लिया गया है, उनमें के. मरागथम कुमारावेल (मदुरंथकम), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई), पी. सत्यभामा (धारापुरम) और एसाक्की सुबैया (अंबासमुद्रम) शामिल हैं। ये सभी पिछले महीने AIADMK छोड़कर TVK में शामिल हुए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन इस्तीफों और दल-बदल के पीछे राजनीतिक लाभ और कथित सौदेबाजी की भूमिका हो सकती है, जिसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में केवल CBI जांच की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि चुनाव के बाद होने वाली कथित राजनीतिक खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएं। याचिकाकर्ता का कहना है कि बिना किसी ठोस और न्यायसंगत कारण के इस्तीफा देकर दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों के मामलों में सख्त नियम होने चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के जनादेश की रक्षा की जा सके।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि जिन चार पूर्व विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उन्हें आगामी उपचुनाव लड़ने से रोका जाए, जब तक कि पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में भी निर्वाचित प्रतिनिधि जनादेश को दरकिनार कर राजनीतिक लाभ के लिए दल बदल सकते हैं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब तमिलनाडु की राजनीति पहले से ही सत्ता परिवर्तन और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा में है। TVK और उसके नेता विजय राज्य की राजनीति में तेजी से उभरते हुए चेहरे माने जा रहे हैं। ऐसे में यह याचिका राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। आने वाले दिनों में अदालत यह तय करेगी कि याचिका पर सुनवाई की जाएगी या नहीं और क्या मामले की जांच के लिए किसी एजेंसी को निर्देश देने की आवश्यकता है। राजनीतिक गलियारों में इस याचिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और सभी की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी है।




