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नोटबंदी बाद वोटबंदी; बीजेपी की नीयत तब भी ख़राब, अब भी ख़राब : अखिलेश यादव

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एबीसी नेशनल न्यूज | लखनऊ | 24 फरवरी 2026

हेडलाइन को जस्टिफाई करता इंट्रो: ‘वोटबंदी’ आरोप के साथ प्रक्रिया पर सवाल

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेज़ सत्यापन अभियान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे नोटबंदी के बाद “वोटबंदी” जैसी स्थिति बताया। उनका कहना है कि जिस तरह नोटबंदी के दौरान आम लोगों को लंबी कतारों और दस्तावेज़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा था, उसी तरह अब मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया में भी लोगों को बार-बार नोटिस और कागज़ी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ रहा है। यादव के अनुसार यह स्थिति खासतौर पर ग्रामीण, बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में असमंजस और चिंता पैदा कर रही है, जबकि पहचान और मतदान अधिकार से जुड़े मामलों में नागरिकों को सहजता और भरोसे का अनुभव होना चाहिए।

वोटर दस्तावेज़ प्रक्रिया पर जताई चिंता

अखिलेश यादव ने कहा कि कई नागरिकों को दस्तावेज़ सत्यापन के लिए बार-बार बुलाया जा रहा है, जिससे दैनिक कामकाज और आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया सरल और नागरिक-हितैषी होने के बजाय जटिल दिखाई दे रही है। उनके अनुसार मतदाता सूची सुधार आवश्यक है, लेकिन इसे इस तरह लागू किया जाना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक दबाव या भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े।

नागरिक अधिकारों और संपत्ति संबंधी आशंकाओं का जिक्र

यादव ने यह भी कहा कि यदि दस्तावेज़ों में त्रुटि या कमी के आधार पर मतदाता सूची में नाम प्रभावित होते हैं तो लोगों में नागरिक अधिकारों, विरासत और संपत्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि पहचान से जुड़े दस्तावेज़ों पर सवाल उठने से आम आदमी में भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और संवेदनशील बनाने की मांग की।

चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि मतदाता सूची का सुधार पहले भी नियमित रूप से होता रहा है, इसलिए नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि दस्तावेज़ पहले जमा किए गए थे तो अब विसंगतियां क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत कर ऐसी प्रणाली विकसित की जाए जिससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व और जागरूकता पर जोर

अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे लोगों को मतदाता सूची से जुड़े अधिकारों के प्रति जागरूक करें और सुनिश्चित करें कि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती प्रत्येक नागरिक की भागीदारी पर निर्भर करती है और मतदाता सूची की सटीकता इस भागीदारी की बुनियाद है।

चुनाव आयोग और सरकार का पक्ष

चुनाव आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का सत्यापन एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। अधिकारियों के अनुसार दस्तावेज़ जांच से अपात्र प्रविष्टियों को रोकने और वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। नागरिकों की सुविधा के लिए विशेष अभियान, सहायता केंद्र और ऑनलाइन सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत

मतदाता सूची और दस्तावेज़ सत्यापन जैसे मुद्दे चुनावी माहौल में संवेदनशील बन जाते हैं क्योंकि यह सीधे नागरिक अधिकार और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े होते हैं। ऐसे में पारदर्शिता, संवाद और प्रशासनिक सरलता बनाए रखना सभी पक्षों के लिए जरूरी होगा, ताकि मतदाताओं का भरोसा कायम रहे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।

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