उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने हाल ही में चीन का दौरा किया, जहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इस दौरे के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था सख्त और अनोखी रही, जिसने हर किसी का ध्यान आकर्षित किया। खास बात यह रही कि मुलाकात के बाद किम जोंग उन की टीम ने जिस कुर्सी पर वे बैठे थे, उसके हर कोने-कोने को इस तरह साफ किया जैसे उनमें से उनके डीएनए के हर निशान को मिटा दिया जाए।
किम जोंग उन के बॉडीगार्ड्स ने कुर्सी, टेबल और गिलास तक को फोरेंसिक लैवल पर साफ किया, ताकि उनसे जुड़ी कोई भी जैविक सामग्री न रहे। यह कदम सुरक्षा के लिए उठाया गया एक अत्यंत कड़ा प्रोटोकॉल है, जिसके पीछे मकसद किम के डीएनए के नमूने चोरी होने या उनकी स्वास्थ्य जानकारी लीक होने से बचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सावधानी उनकी जिंदगी, सुरक्षा और राजनीतिक छवि की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
किम जोंग उन की यह चीन यात्रा न सिर्फ उनकी कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि उनकी सुरक्षा के प्रति गहरी चिंता और सतर्कता का भी परिचय देती है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने रूस के लिए सैनिक भेजने की बात की और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए। उनकी टीम द्वारा की गई उक्त सफाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी जानकारी के संरक्षण के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
इस घटना ने न सिर्फ किम की सुरक्षा व्यवस्था की गहराई को उजागर किया बल्कि दुनिया को यह भी बताया कि आधुनिक कूटनीतिक मिशनों में जैविक सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। यही कारण है कि किम जोंग उन की टीम ने अपनी हर छोटी-बड़ी छाप को पूरी तरह मिटाने का प्रयास किया, ताकि कोई भी जैविक जानकारी अनजान हाथों में न जाए।
अतः किम जोंग उन की चीन यात्रा से जुड़ी यह घटना उनकी राजनीतिक रणनीति के साथ-साथ सुरक्षा के उच्चतम स्तर की एक नई मिसाल है, जो विश्व के लिए एक नई सोच लेकर आई है।




