राष्ट्रीय/राजनीति | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 9 जून 2026
ममता की कमजोरी, सहयोगियों की नसीहत और राहुल गांधी के नेतृत्व पर बढ़ती निर्भरता ने बदले विपक्षी राजनीति के समीकरण
नई दिल्ली में सोमवार को हुई INDIA गठबंधन की बैठक केवल एक राजनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि विपक्षी राजनीति के बदलते शक्ति संतुलन का भी संकेत थी। पिछले कुछ वर्षों से जिस गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका और नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठते रहे थे, वहीं अब हालात ऐसे बनते दिखाई दे रहे हैं कि अधिकांश सहयोगी दल कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ सबसे बड़ी और केंद्रीय ताकत के रूप में स्वीकार करने लगे हैं। हालांकि यह स्वीकार्यता बिना शर्त नहीं है। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दलों ने साफ संकेत दिया है कि कांग्रेस को गठबंधन के भीतर अधिक उदार, सहयोगी और साझेदार दलों की भावनाओं का सम्मान करने वाला रवैया अपनाना होगा।
ममता बनर्जी की राजनीतिक कमजोरी ने बदला पूरा खेल
INDIA गठबंधन के भीतर कांग्रेस को चुनौती देने वाली सबसे बड़ी नेता लंबे समय तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रही हैं। कई मौकों पर उन्होंने विपक्षी राजनीति में अपनी स्वतंत्र भूमिका दर्ज कराई और कांग्रेस नेतृत्व को खुली चुनौती भी दी। लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार और उसके बाद पार्टी में लगातार बढ़ते असंतोष ने राजनीतिक तस्वीर बदल दी है। सांसदों और विधायकों के कथित पलायन ने ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत को कमजोर किया है। यही कारण है कि अब वही तृणमूल कांग्रेस, जो कभी कांग्रेस को दो सीटों से अधिक देने को तैयार नहीं थी, 2029 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन की बात करती दिखाई दे रही है।
राहुल गांधी के इर्द-गिर्द सिमटती विपक्षी राजनीति
लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी विपक्षी राजनीति के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। संसद के भीतर और बाहर भाजपा सरकार के खिलाफ उनकी आक्रामक रणनीति ने उन्हें INDIA गठबंधन का स्वाभाविक केंद्र बना दिया है। सोमवार की बैठक में भी अधिकांश दलों ने यह स्वीकार किया कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस की मौजूदगी और राहुल गांधी की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि सहयोगी दल यह भी चाहते हैं कि कांग्रेस गठबंधन की बड़ी पार्टी होने का अहंकार न दिखाए और सीट बंटवारे तथा रणनीतिक फैसलों में साझेदार दलों को बराबरी का सम्मान दे।
एकता का प्रदर्शन, लेकिन मतभेद अब भी बरकरार
बैठक में भले ही एकजुटता का संदेश दिया गया हो, लेकिन यह भी साफ दिखाई दिया कि गठबंधन के भीतर मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। समाजवादी पार्टी, राजद और वामपंथी दलों ने कांग्रेस को अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया कि केवल बड़े भाई की भूमिका निभाने से काम नहीं चलेगा। विपक्षी दल चाहते हैं कि राज्यों की राजनीतिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएं और सहयोगी दलों की ताकत तथा प्रभाव का सम्मान किया जाए। यही कारण है कि कांग्रेस को स्वीकार करने के साथ-साथ उसके लिए कई राजनीतिक शर्तें भी सामने रखी जा रही हैं।
2029 की लड़ाई की तैयारी अभी से शुरू
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सोमवार की बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश 2029 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। विपक्षी दलों को यह एहसास हो चुका है कि भाजपा जैसी विशाल और संगठित चुनावी मशीनरी का मुकाबला अकेले कोई एक दल नहीं कर सकता। यही वजह है कि मतभेदों के बावजूद INDIA गठबंधन को बनाए रखने और मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं। तृणमूल कांग्रेस द्वारा कांग्रेस के साथ भविष्य में गठबंधन की संभावना जताना भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस के सामने अवसर भी, चुनौती भी
वर्तमान परिस्थितियों में कांग्रेस के पास विपक्षी राजनीति का निर्विवाद केंद्र बनने का अवसर है। लेकिन इसके साथ ही उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती सहयोगी दलों का विश्वास बनाए रखने की है। यदि कांग्रेस अपने सहयोगियों की चिंताओं को नजरअंदाज करती है, तो गठबंधन के भीतर असंतोष फिर बढ़ सकता है। वहीं यदि वह संतुलित और समावेशी नेतृत्व प्रस्तुत करती है, तो INDIA गठबंधन 2029 में भाजपा के सामने अधिक संगठित चुनौती पेश कर सकता है।
विपक्ष की नई राजनीति का संकेत
नई दिल्ली की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्षी राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। ममता बनर्जी की चुनौती कमजोर पड़ने, क्षेत्रीय दलों के नए राजनीतिक आकलन और राहुल गांधी की बढ़ती स्वीकार्यता ने INDIA गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन बदल दिया है। फिलहाल कांग्रेस विपक्षी राजनीति की धुरी बनती दिखाई दे रही है, लेकिन यह धुरी तभी मजबूत रह पाएगी जब उसके साथ जुड़े दल खुद को सम्मानजनक और प्रभावी साझेदार महसूस करेंगे। यही INDIA गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी परीक्षा भी।




