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रांची में धमाकेदार जीत: विराट का तूफानी शतक, रोहित का क्लास, हर्षित–कुलदीप की घातक गेंदबाज़ी—17 रन से साउथ अफ्रीका ध्वस्त

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संजीव कुमार । रांची 30 नवंबर 2025

रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए पहले वनडे में भारत ने साउथ अफ्रीका को 17 रनों से मात देकर सीरीज़ की धमाकेदार शुरुआत की। यह मुकाबला शुरुआत से लेकर आखिरी ओवर तक उतार-चढ़ाव से भरा रहा—एक तरफ विराट कोहली ने 135 रन की विराट पारी खेलकर भारतीय पारी की कमान संभाली, वहीं अंत में कुलदीप यादव की जादुई गेंदबाज़ी ने मैच को भारत की झोली में डाल दिया। 350 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ अफ्रीका एक समय पूरी तरह टूट चुका था, लेकिन मार्को यान्सन और कोर्बिन बॉश ने मैच को रोमांचक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। फिर आया भारतीय स्पिन जादू, जिसने आख़िरी मिनटों में पूरे खेल की दिशा बदल दी।

भारत की पारी में शुरुआत यशस्वी जायसवाल के 18 पर आउट होने से डगमगा सकती थी, लेकिन रोहित शर्मा और विराट कोहली ने मिलकर खेल को नए रंग में रंग दिया। दोनों के बीच 136 रन की शानदार साझेदारी ने साउथ अफ्रीकी गेंदबाज़ों की एक-एक गेंद पर दबाव बना दिया। रोहित ने 57 रन की तेज़तर्रार पारी खेली, लेकिन असली तूफान तब आया जब विराट कोहली ने रन बरसाने का सिलसिला शुरू किया। 120 गेंदों में 135 रन, 11 चौके और 7 छक्के—यह सिर्फ शतक नहीं था, यह एक बयान था। कोहली ने पारी को शुरुआत से लेकर अंत तक संभाला और हर बार आक्रामकता से जवाब देते रहे। KL राहुल ने भी कप्तानी पारी खेलते हुए 60 रन जोड़कर स्कोर को सुरक्षित और बड़ा बनाया। भारत ने 349/8 का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसने SA पर मानसिक दबाव पहले ही डाल दिया था।

साउथ अफ्रीका की शुरुआत बेहद खराब रही। हरषित राणा, जिन्होंने अपना हुनर पहली ही स्पेल में दिखाया, उन्होंने SA के टॉप ऑर्डर को चीरकर रख दिया। मार्कराम सिर्फ 7 पर, रिकटलटन 0 पर और डीकॉक भी 0 पर ढेर हो गए। तीन विकेट गिरने के बाद लगा कि मैच 30 ओवर में खत्म हो जाएगा। लेकिन क्रिकेट की खूबसूरती इसी में है कि यह कभी भी किसी एक मोड़ पर नहीं रुकता। मैथ्यू ब्रीट्जके (72) ने दक्षिण अफ्रीका को वापस पटरी पर लाने की कोशिश की, लेकिन फिर कुलदीप यादव मैदान में आए और मैच का पूरा संतुलन बदल दिया।

कुलदीप यादव ने अपने दूसरे स्पेल में KL राहुल के साथ बात कर रणनीति को बदला। गेंद गीली थी, पकड़ में नहीं आ रही थी, लेकिन कुलदीप ने धीरे-धीरे स्पीड, लाइन और एंगल बदलकर बल्लेबाज़ों को उलझाना शुरू किया। उन्होंने ब्रीट्जके, टोनी डे ज़ोरज़ी, प्रेनेलन सुब्रायन और बाद में दूसरा बड़ा झटका देकर साउथ अफ्रीका की उम्मीदों को कमजोर किया। उनका 10–0–68–4 का स्पेल मैच का टर्निंग पॉइंट था। कुलदीप ने बाद में बताया कि पिच मुश्किल थी, गेंद गीली थी, लेकिन उन्होंने स्क्रैम्बल्ड सीम और सीधी सीम का मिश्रण करके बल्लेबाज़ों को कन्फ्यूज़ किया। यह सिर्फ स्पिन नहीं था—यह माइंड गेम था, जिसने SA को घुटनों पर ला दिया।

यहाँ मैच खत्म नहीं हुआ था। मार्को यान्सन ने 39 गेंदों पर 70 रन जड़ डाले—यह पारी T20 शैली की थी। उन्होंने हर भारतीय गेंदबाज़ को निशाने पर लिया और मैच वहाँ ले आए जहाँ भारत की जीत पर संदेह होने लगा। बॉश ने भी 51 गेंदों पर 67 रन जोड़कर भारतीय खेमे को तनाव में डाल दिया। उनके बीच 97 रन की साझेदारी ने मैच को आख़िरी 6 ओवर तक ज़िंदा रखा। लेकिन जैसे ही यान्सन ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, कुलदीप यादव ने धोखे से भरी गेंद डालकर उनकी गिल्लियां बिखेर दीं। वही विकेट था—जिस पर कुलदीप ने कहा, “आपको कभी-कभी किस्मत भी चाहिए होती है, वो विकेट मैच बदल गया।”

भारत के लिए हर्षित राणा (10–0–65–3) शानदार रहे। अर्शदीप ने भी 2 विकेट निकालकर SA की कमर तोड़ी। रविंद्र जडेजा और प्रसिद्ध कृष्णा ने रन रोकने में अहम भूमिका निभाई। आख़िरी ओवरों में SA के निचले क्रम ने लड़ाई ज़रूर की, लेकिन कुलदीप और अर्शदीप की सटीक गेंदबाज़ी ने मुकाबले को भारत के पक्ष में मोड़ दिया।

49.2 ओवर में पूरी टीम 332 पर सिमट गई, और भारत ने 17 रन से यह रोमांचक जंग जीत ली। यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं थी—यह टीम इंडिया के संयम, रणनीति, प्रतिभा और दबाव में जीने की ताकत का शानदार प्रदर्शन थी। विराट कोहली का आक्रामक शतक, रोहित का शाही खेल, KL राहुल की कप्तानी और कुलदीप–राणा–अर्शदीप की गेंदबाज़ी ने यह साफ कर दिया कि भारत आज भी दुनिया में किसी भी टीम को किसी भी हालात में पछाड़ने की क्षमता रखता है।

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