जयपुर 4 नवंबर 2025
राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक ऐसा भयावह हादसा हुआ जिसने पूरी देश को झकझोर दिया। एक मामूली झगड़े के बाद डंपर ड्राइवर ने अचानक अपना आपा खो दिया और सड़क पर मौजूद दर्जनों वाहनों को बेरहमी से कुचलना शुरू कर दिया। यह घटना कुछ ही मिनटों में 14 निर्दाेष लोगों की मौत और कई घायल होने वाली भयानक त्रासदी में बदल गई। जो परिवार मिनटों पहले रोज़मर्रा के कामों में लगे थे, उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उनकी ज़िंदगी एक उन्मादी ड्राइवर की हैवानियत की भेंट चढ़ने वाली है।
हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक छोटी सी टक्कर के बाद डंपर ड्राइवर का किसी व्यक्ति से विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि ड्राइवर ने गुस्से में अपना वाहन तेजी से सड़क पर दौड़ा दिया और जानबूझकर सामने आने वाले वाहनों व लोगों को कुचलना शुरू कर दिया। उसकी हरकतों को देखकर लोग भय से भागने लगे — कोई फुटपाथ पर चढ़ गया, कोई गाड़ियों के पीछे छिपने की कोशिश करता रहा, लेकिन डंपर की रफ्तार और उसका हिंसक रवैया किसी को मौका नहीं दे रहा था। देखते ही देखते सड़क मौत के मैदान में बदल गई और चीख-पुकार मच गई।
गुस्से में बेकाबू ड्राइवर ने मोटरसाइकिल, कारों और पैदल चल रहे लोगों को रौंदते हुए आगे बढ़ता चला गया। कई वाहन पलट गए, कुछ बुरी तरह मसल गए और सड़कों पर लहूलुहान पड़ी लाशें इस हादसे की विभीषिका बयान करने लगीं। चश्मदीदों के अनुसार ड्राइवर के माथे पर जैसे खून सवार था — वह किसी भी हालत में रुकने को तैयार नहीं था। हादसे के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। जिनके प्रियजन घायल हुए, वे घुटनों के बल सड़क पर चिल्ला रहे थे, जबकि कई वाहन चालक सदमे में खड़े सब कुछ टूटता बिखरता देख रहे थे।
सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल ले जाया गया। कुछ लोग वहीं सड़क पर दम तोड़ चुके थे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद ड्राइवर को पकड़ा और हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि उसकी मानसिक स्थिति और नशे की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने इतनी खतरनाक हरकत क्यों की। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजा और घायलों के इलाज की व्यवस्था का ऐलान किया है। वहीं, पीड़ित परिवारों का कहना है कि ऐसे अपराध की सजा इतनी कठोर होनी चाहिए कि कोई भी इंसान दोबारा सड़क को मौत का रास्ता बनाने की हिम्मत न कर सके।
यह हादसा एक गहरा सवाल भी खड़ा करता है — क्या हमारी सड़कों पर गुस्सा, जल्दबाज़ी और लापरवाही, मासूम लोगों की ज़िंदगियाँ छीनने का नया चेहरा बन चुकी है? ट्रैफिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारी वाहनों के ड्राइवरों की मनोवैज्ञानिक जांच, सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है। जयपुर की यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसा सबक है जिसे भुलाया नहीं जाना चाहिए। सड़कें यात्रा की जगह हैं, लेकिन एक पागलपन ने उन्हें कब्रगाह बना दिया — यह त्रासदी हमें बार-बार चेतावनी देती है कि समय रहते ट्रैफिक अनुशासन और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता न दी गई, तो ऐसे हादसे बार-बार मौत का नंगा नाच दिखाते रहेंगे।





