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मिल्की वे के केंद्र में ठंडी गैस का विशाल जाल मिला, सितारों के जन्म को लेकर बढ़ी वैज्ञानिकों की जिज्ञासा

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एबीसी नेशनल न्यूज | 27 फरवरी 2026

वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा मिल्की वे के बिल्कुल केंद्र में ठंडी गैस के एक बहुत बड़े और जटिल जाल का नक्शा तैयार किया है। इस इलाके को सेंट्रल मॉलिक्यूलर ज़ोन (CMZ) कहा जाता है, जो लगभग 650 प्रकाश-वर्ष चौड़ा है और पृथ्वी से करीब 26 हजार प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। यही वह क्षेत्र है जहां आकाशगंगा का विशाल ब्लैक होल सैगिटेरियस A* मौजूद है। यह जगह बेहद उथल-पुथल भरी मानी जाती है, क्योंकि यहां गैस, धूल, तेज विकिरण और मजबूत गुरुत्वाकर्षण लगातार हलचल पैदा करते रहते हैं।

वैज्ञानिकों के लिए सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस क्षेत्र में गैस की मात्रा बहुत ज्यादा होने के बावजूद नए सितारे अपेक्षा से कम बन रहे हैं। आम तौर पर इतनी गैस होने पर बड़ी संख्या में सितारे बनते हैं, लेकिन यहां का वातावरण बहुत ज्यादा अशांत है। तेज विकिरण, शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और गैस के लगातार टकराव सितारों के बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं। यही वजह है कि यह इलाका खगोल विज्ञान की एक बड़ी पहेली बना हुआ है।

इस खोज के लिए चिली में मौजूद ALMA टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने बेहद ठंडी गैस को विस्तार से देखा और पाया कि यह गैस धागों या नदियों की तरह अंतरिक्ष में बह रही है। कई जगह ये गैस आपस में मिलकर घने बादल बना रही है, जहां भविष्य में नए सितारे जन्म ले सकते हैं। इसके अलावा क्षेत्र में बड़े-बड़े खाली बुलबुले और गड्ढे जैसी संरचनाएं भी मिलीं, जिन्हें पुराने सुपरनोवा विस्फोटों और बड़े सितारों की तेज हवाओं का परिणाम माना जा रहा है।

शोध में कुछ जटिल कार्बनिक अणु भी मिले हैं, जैसे मेथनॉल और इथेनॉल, जिन्हें जीवन से जुड़ी रसायन प्रक्रिया के शुरुआती घटकों के रूप में देखा जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि अंतरिक्ष के इतने कठिन और हिंसक माहौल में भी जटिल रसायन बन सकते हैं। वैज्ञानिकों को ऐसे अणु भी मिले हैं जो गैस बादलों के तेज टकराव से बनते हैं, जिससे यह साबित होता है कि यह क्षेत्र लगातार गतिविधियों से भरा हुआ है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नया नक्शा मिल्की वे के केंद्र को समझने में बड़ी मदद करेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि गैस कैसे बहती है, सितारे कैसे बनते हैं और ब्लैक होल आसपास के माहौल को किस तरह प्रभावित करता है। साथ ही यह जानकारी शुरुआती ब्रह्मांड की दूरस्थ गैलेक्सियों को समझने में भी काम आ सकती है।

कल्पना कीजिए कि मिल्की वे का केंद्र एक भीड़भाड़ वाले शहर की तरह है, जहां हर तरफ गैस के बादल ऐसे घूम रहे हैं जैसे सड़कों पर धुआं और धुंध फैली हो। ये गैस बादल पानी की नदियों की तरह अंतरिक्ष में बहते हैं, आपस में टकराते हैं और कई जगह इकट्ठा होकर बड़े बादल बना लेते हैं। यही घने बादल आगे चलकर नए सितारों के जन्म की जगह बन सकते हैं। लेकिन इस “कॉस्मिक शहर” में शांति नहीं है — यहां तेज विकिरण, मजबूत चुंबकीय ताकत, गैस के लगातार टकराव और बीच में मौजूद विशाल ब्लैक होल सब कुछ अस्त-व्यस्त बनाए रखते हैं। इसी उथल-पुथल के कारण गैस स्थिर नहीं हो पाती और अपेक्षा से कम सितारे बनते हैं, जो वैज्ञानिकों के लिए आज भी एक रहस्य है।

बच्चों की नजर से देखें तो अंतरिक्ष का यह इलाका किसी जादुई कहानी जैसा लगता है। यहां गैस के चमकीले धागे आसमान में बहती रंगीन नदियों जैसे दिखाई देते हैं। इन नदियों के बीच एक विशाल ब्लैक होल बैठा है, जो अपने गुरुत्वाकर्षण से आसपास की चीजों को खींचता रहता है। गैस बादल कभी मिलकर नए सितारे बनाने की कोशिश करते हैं, तो कभी टकराकर विस्फोट जैसे दृश्य पैदा कर देते हैं। वैज्ञानिक दूर बैठे शक्तिशाली टेलीस्कोप से इस रहस्यमय इलाके को देख रहे हैं, ताकि वे समझ सकें कि सितारे कैसे जन्म लेते हैं और ब्रह्मांड के भीतर छिपे रहस्य क्या हैं।

इस क्षेत्र से जुड़े कुछ रोचक तथ्य भी सामने आए हैं। मिल्की वे के केंद्र में मौजूद ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से लगभग 40 लाख गुना ज्यादा है। वहां की गैस बेहद ठंडी है और उसका तापमान लगभग पूर्ण शून्य के करीब पहुंच जाता है। गैस धागों और नदियों जैसी संरचनाओं में बहती है, जिन्हें वैज्ञानिक फिलामेंट कहते हैं। कुछ गैस बादलों में ऐसे जटिल रसायन भी मिले हैं जो जीवन के निर्माण की शुरुआती कड़ी माने जाते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में गैस होने के बावजूद वहां बहुत कम सितारे बनते हैं, और यही पहेली खगोलविदों को लगातार इस क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए प्रेरित कर रही है।

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