ढाका, 6 अक्टूबर 2025
बांग्लादेश की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और रोमांचक अध्याय जुड़ गया। बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने घोषणा की है कि वह आगामी राष्ट्रीय चुनाव में भाग लेने के लिए देश लौटेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ विपक्षी लामबंदी तेज़ हो रही है और जनता बदलाव की उम्मीद कर रही है।
निर्वासन के बाद पहली बार वतन वापसी
तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे हैं, पिछले कई वर्षों से लंदन में स्व-निर्वासन में रह रहे थे। उन पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के कई मामले चल रहे हैं। उनके वतन लौटने की घोषणा को बीएनपी के कार्यकर्ताओं ने “लोकतंत्र की बहाली की दिशा में पहला कदम” बताया है। ढाका और चिटगांव में बीएनपी समर्थकों ने जश्न मनाया और “জয় বাংলা নয়, জয় গণতন্ত্র (जय लोकतंत्र)” के नारे लगाए।
चुनाव में नई ऊर्जा, सरकार में बेचैनी
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तारिक रहमान की वापसी से बीएनपी में नई जान आ गई है। पार्टी लंबे समय से नेतृत्व के संकट और सरकारी दमन का सामना कर रही थी। वहीं, सत्ताधारी अवामी लीग (Awami League) ने इसे “राजनीतिक नाटक” बताया और चेतावनी दी कि कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय नजरें बांग्लादेश पर
अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत सहित कई देशों ने बांग्लादेश में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव की आवश्यकता पर जोर दिया है। वॉशिंगटन ने कहा कि “तारिक रहमान की वापसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बल दे सकती है, बशर्ते कि चुनाव पारदर्शी हों।”
भ्रष्टाचार मामलों की तलवार अब भी लटकी
हालांकि तारिक रहमान पर 2004 के ग्रेनेड हमले और धनशोधन जैसे गंभीर आरोप हैं, जिनमें उन्हें दोषी ठहराया जा चुका है। लेकिन उनकी कानूनी टीम का कहना है कि वे इन आरोपों को अदालत में चुनौती देंगे और जनादेश की ताकत से न्याय हासिल करेंगे।
जनता में उत्साह और उम्मीद
ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, तारिक रहमान की वापसी ने राजनीतिक बहस और उम्मीदों की नई लहर पैदा कर दी है। बीएनपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि “यह चुनाव बांग्लादेश की आत्मा की लड़ाई है — लोकतंत्र बनाम डर का संघर्ष।” यदि तारिक रहमान वास्तव में चुनाव में उतरते हैं, तो यह बांग्लादेश की राजनीति के इतिहास का सबसे रोमांचक और निर्णायक चुनाव साबित हो सकता है। अब पूरी दुनिया की निगाहें ढाका पर टिकी हैं — जहां लोकतंत्र की एक नई कहानी लिखी जा सकती है।




