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किसान विरोधी हैं नीतीश-मोदी : कांग्रेस ने बिहार में 20 साल की बदहाली का हिसाब मांगा

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बिहार कांग्रेस ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर करारा हमला बोलते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने मिलकर बिहार को बर्बादी की ओर धकेल दिया है। पार्टी का कहना है कि पिछले 20 सालों की बदहाली, बेरोज़गारी, पलायन, किसान संकट और औद्योगिक पिछड़ेपन के लिए यही दोनों सरकारें जिम्मेदार हैं। कांग्रेस नेता और प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा कि अब बिहार की जनता ठगे जाने से तंग आ चुकी है और जवाब चाहती है कि आखिर किसने राज्य के सपनों को कुचल दिया।

दुबे ने कहा कि मोदी और नीतीश दोनों वर्षों से एक ही बहाना दोहराते रहे हैं — “बिहार लैंडलॉक स्टेट है, इसलिए यहां उद्योग नहीं लग पाए।” लेकिन, उन्होंने सवाल उठाया कि अगर गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्य, जिनके पास न तो समुद्री तट हैं और न ही बड़े संसाधन, वहां उद्योग स्थापित हो सकते हैं तो फिर बिहार में क्यों नहीं? दुबे के शब्दों में — “असल समस्या भौगोलिक नहीं, बल्कि राजनीतिक है। जब नीयत में खोट हो, तो नीति का क्या दोष? बिहार के नेताओं ने सत्ता की कुर्सी संभाल ली, लेकिन बिहार की आत्मा को भुला दिया।”

कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि बिहार का कृषि क्षेत्र प्रदेश की रीढ़ (Backbone) है, जिसने देश के अनाज भंडार को भरा और हर संकट में राष्ट्र का पेट भरा। लेकिन मोदी सरकार ने किसानों की कमर तोड़ दी, और नीतीश सरकार ने तो उन्हें “हत्यारा” कहकर उनका अपमान कर दिया। दुबे ने कहा कि “आज पूरा देश और बिहार एक स्वर में कह रहा है — किसान विरोधी हैं नीतीश-मोदी। किसानों को सम्मान और सुरक्षा देने की बजाय इन दोनों सरकारों ने उन्हें संकट, कर्ज़ और आत्महत्या की ओर धकेल दिया है।”

उन्होंने नीतीश सरकार पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस बार राज्य सरकार ने किसी भी फसल के लिए न तो लागत का मूल्यांकन किया, न ही यह सुझाव दिया कि किसानों को कितना समर्थन मूल्य (MSP) मिलना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि यह नीतीश सरकार की सबसे बड़ी असफलता है, क्योंकि उसके इस गैरजिम्मेदार रवैये की वजह से केंद्र की कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) ने मनमाने ढंग से गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों का समर्थन मूल्य तय किया। दुबे ने कहा, “नीतीश सरकार के सुझाव न देने से बिहार के किसानों को भारी नुकसान हुआ, जबकि दूसरी तरफ गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारों ने किसानों के हित में लागत के अनुसार MSP की सिफारिशें भेजीं।”

दुबे ने नीतीश कुमार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि “जो मुख्यमंत्री केंद्र के सामने अपने किसानों के लिए आवाज तक नहीं उठा सकता, वह विकास की बात करने का हक खो चुका है। नीतीश कुमार की सरकार अब एक कठपुतली बन चुकी है, जो दिल्ली के इशारों पर चलती है और बिहार के किसानों के हक की आवाज दबा देती है।” उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार में किसानों के लिए कोई संवेदना नहीं बची है — न राहत, न सुरक्षा, न समर्थन मूल्य। यह सरकार सिर्फ घोषणाओं और दिखावटी योजनाओं में लगी हुई है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि यह शर्मनाक है कि जिस बिहार ने हर दौर में देश को अनाज दिया, आज वही बिहार कृषि संकट, बेरोज़गारी और पलायन की त्रासदी झेल रहा है। मोदी सरकार ने जहां किसानों को बाज़ार की दया पर छोड़ दिया, वहीं नीतीश कुमार ने राज्य की कृषि नीतियों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। दुबे ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था का 70% हिस्सा कृषि पर निर्भर है, लेकिन राज्य सरकार की उदासीनता ने उसे रसातल में पहुंचा दिया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब चुप नहीं बैठेगी। “हम बिहार की जनता के बीच जाएंगे, गांव-गांव और खेत-खलिहानों तक पहुंचेंगे। हमारा नारा होगा — ‘बिहार की बदहाली का हिसाब दो।’ अब जनता जानना चाहती है कि 20 सालों में नीतीश-मोदी ने बिहार को दिया क्या? न उद्योग, न रोजगार, न सुरक्षा — बस झूठे वादे और टूटी उम्मीदें।”

दुबे ने अंत में कहा कि बिहार की जनता अब जाग चुकी है। यह राज्य अब सत्ता की सांठगांठ से नहीं, किसान और मजदूर के पसीने से चलेगा। कांग्रेस कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर सच्चाई बताएंगे और किसानों के सम्मान की लड़ाई को हर मंच पर लड़ेंगे।

 

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