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लद्दाख की आवाज़ कुचल रही है मोदी सरकार: राहुल गांधी

नई दिल्ली 29 सितंबर 2025

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर बीजेपी और आरएसएस पर सीधा हमला बोला है और इस बार निशाने पर है लद्दाख। राहुल गांधी ने कहा कि लद्दाख की जनता, उनकी संस्कृति और परंपराएं अभूतपूर्व हमले का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाखियों ने लोकतांत्रिक अधिकारों और अपनी आवाज़ की मांग की थी, लेकिन बीजेपी और केंद्र सरकार ने इसका जवाब हिंसा, दमन और डराने-धमकाने से दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चार युवाओं की हत्या कर दी और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जेल में डाल दिया।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, “लद्दाख के अद्भुत लोग, उनकी संस्कृति और परंपराएं बीजेपी और आरएसएस के हमले की चपेट में हैं। लद्दाखियों ने अपनी आवाज़ की मांग की थी। बीजेपी ने जवाब में 4 युवाओं को मार डाला और सोनम वांगचुक को जेल में डाल दिया।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीधी चुनौती देते हुए कहा, “हत्या बंद करो। हिंसा बंद करो। डराना-धमकाना बंद करो। लद्दाख को उसकी आवाज़ दो। उन्हें 6ठी अनुसूची का हक़ दो।”

कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने लद्दाखियों से जो वादे किए थे, वो आज तक पूरे नहीं हुए। न नौकरियों पर कोई गारंटी मिली, न स्थानीय लोगों को उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार मिला, न ही लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ। जो लोग इन मुद्दों पर आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें जेल में डालकर डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह सब लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है।

राहुल गांधी ने लद्दाख की देशभक्ति और बलिदान को याद दिलाते हुए कहा कि लद्दाखियों ने हमेशा देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान की है। उन्होंने कहा कि जो लोग सीमा पर अपनी जान देते हैं, आज उन्हें अपने ही हक़ के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है और सरकार उनकी आवाज़ को दबाने में लगी है। राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि लद्दाख को 6ठी अनुसूची में शामिल करना ही वहां की संस्कृति, संसाधनों और पहचान की रक्षा का एकमात्र तरीका है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब लद्दाख में प्रदर्शन और धरने तेज़ हो गए हैं। केंद्र सरकार पर लोगों की आवाज़ दबाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं और स्थानीय समुदाय अपने अधिकारों को लेकर आक्रोशित हैं। कांग्रेस का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन और बड़ा हो सकता है और देश के सामने एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा कर सकता है।

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