नई दिल्ली, 23 सितंबर 2025
राजधानी दिल्ली में त्योहारों की रौनक अपने चरम पर है। इसी बीच दिल्ली सरकार ने धार्मिक आयोजनों से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है। अब दशहरे तक चलने वाले रामलीला और दुर्गा पूजा पंडालों में लाउडस्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग रात 10 बजे की बजाय मध्यरात्रि 12 बजे तक किया जा सकेगा। यह राहत 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक लागू रहेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम जनता की भावनाओं और आयोजकों की वर्षों से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
यह आदेश उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी किया गया है। हालांकि अनुमति देते हुए सरकार ने साफ कर दिया है कि शोर नियंत्रण के नियमों का पालन अनिवार्य होगा। आदेश में कहा गया है कि आवासीय इलाकों में ध्वनि का स्तर 45 डेसिबल (A) से अधिक नहीं होना चाहिए। यानी आयोजकों को त्योहार की उमंग बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि आसपास के नागरिकों, खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बीमार लोगों को असुविधा न हो। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आयोजकों को पुलिस, स्थानीय निकाय और प्रशासनिक इकाइयों से आवश्यक मंजूरी लेनी होगी और सुरक्षा इंतज़ाम पुख्ता करने होंगे।
इस फैसले से एक ओर जहां आयोजकों और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी ओर ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंता भी जताई जा रही है। आयोजकों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का महत्व तभी पूरा होता है जब उन्हें समय पर और विधिवत सम्पन्न किया जाए। अक्सर देर से शुरू होने वाले मंचीय कार्यक्रमों और भीड़ की वजह से आयोजनों को 10 बजे तक समेटना मुश्किल होता था। अब छूट मिलने से उन्हें बेहतर ढंग से कार्यक्रम संचालित करने का अवसर मिलेगा। दूसरी ओर नागरिक समाज और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि अगर ध्वनि सीमा का पालन न हुआ तो यह आम लोगों के स्वास्थ्य और शांति के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
त्योहारों के इस मौसम में दिल्ली सरकार का यह फैसला परंपरा और प्रशासनिक सख्ती के बीच संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ धार्मिक आस्थाओं का सम्मान और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण है, तो दूसरी तरफ नागरिकों का हक है कि उन्हें शांति और आराम मिले। अब यह जिम्मेदारी आयोजकों और प्रशासन की है कि वे मिलकर यह साबित करें कि उत्सव और अनुशासन साथ-साथ चल सकते हैं।




