नई दिल्ली 4 सितम्बर 2025
जीएसटी सुधारों पर कांग्रेस का हमला
भारतीय राजनीति में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) का मुद्दा लंबे समय से विवादों में रहा है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने “One Nation, One Tax” की अवधारणा को पूरी तरह से विकृत कर दिया और इसे “One Nation, 9 Taxes” में बदलकर आम जनता पर असहनीय बोझ डाल दिया। लगभग एक दशक से कांग्रेस लगातार जीएसटी के सरलीकरण की मांग करती रही, लेकिन केंद्र सरकार ने इस दिशा में बहुत देर से कदम उठाया। जटिल स्लैब प्रणाली—0%, 5%, 12%, 18% और 28%—के साथ 0.25%, 1.5%, 3% और 6% की विशेष दरों ने छोटे उद्योगों और एमएसएमई के लिए कर प्रणाली को बेहद कठिन बना दिया।
कांग्रेस की “GST 2.0” की मांग
कांग्रेस पार्टी ने अपने 2019 और 2024 के चुनावी घोषणापत्रों में साफ तौर पर यह वादा किया था कि यदि उनकी सरकार बनी तो वे “GST 2.0” लागू करेंगे, जिससे कर संरचना सरल और तर्कसंगत हो सके। पार्टी का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था ने छोटे कारोबारियों, किसानों और गरीबों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार ने बार-बार अपने फैसलों से यह साबित किया है कि वह बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है और गरीब वर्ग पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
खड़गे का सीधा वार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश के इतिहास में पहली बार किसानों को भी जीएसटी के दायरे में लाया गया। उन्होंने कहा कि दूध-दही, आटा-अनाज, बच्चों की किताबें, ऑक्सीजन, इंश्योरेंस और अस्पताल जैसे रोज़मर्रा की चीज़ों पर टैक्स लगाना जनता के साथ अन्याय है। खड़गे ने कहा, “यही कारण है कि कांग्रेस ने इस टैक्स को ‘गब्बर सिंह टैक्स’ नाम दिया। देश के कुल जीएसटी संग्रह का 64% गरीब और मध्यम वर्ग की जेब से आता है, जबकि अरबपतियों से सिर्फ 3% टैक्स वसूला जाता है। यह असमानता भाजपा सरकार की मानसिकता को दर्शाती है।”
2005 की याद और भाजपा का विरोध
खड़गे ने अपने बयान में यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस ने 2005 में ही जीएसटी की औपचारिक घोषणा कर दी थी। लेकिन उस समय भाजपा ने इस बिल का विरोध किया था। कांग्रेस का आरोप है कि अब वही भाजपा सरकार इस टैक्स को अपनी उपलब्धि बता रही है। खड़गे ने कहा कि सरकार रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह का जश्न मना रही है, लेकिन यह उपलब्धि नहीं बल्कि आम लोगों की जेब पर चोट है।
चिदंबरम की प्रतिक्रिया
पूर्व वित्तमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने जीएसटी दरों में हालिया कटौती का स्वागत तो किया, लेकिन इसे बहुत देर से उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीएसटी डिज़ाइन शुरुआत से ही त्रुटिपूर्ण था और कांग्रेस ने इसे लेकर आवाज भी उठाई थी, लेकिन भाजपा सरकार ने उनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया। चिदंबरम ने आरोप लगाया कि सरकार ने आर्थिक स्थिति की हकीकत को समझने में 8 साल लगा दिए। उनका मानना है कि निजी निवेश की सुस्ती, निजी कर्ज और बिहार चुनाव जैसे राजनीतिक कारण इस बदलाव के पीछे हैं।
जयराम रमेश और GST 2.0 की पैरवी
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक बार फिर GST 2.0 की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में टैक्स दरों की संख्या कम की जानी चाहिए, उपभोग की वस्तुओं पर टैक्स घटाया जाना चाहिए, टैक्स चोरी और गलत वर्गीकरण पर रोक लगाई जानी चाहिए, और MSMEs पर बोझ कम होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने सहकारी संघवाद की बात करते हुए राज्यों को अतिरिक्त मुआवजा अवधि देने की मांग की। उनके मुताबिक, मौजूदा जीएसटी व्यवस्था न तो पारदर्शी है और न ही राज्यों के अधिकारों के अनुरूप।
क्या छोटे उद्योगों को मिलेगी राहत?
हाल ही में जीएसटी परिषद ने 5% और 18% की दो-स्तरीय नई दर संरचना को मंजूरी दी है, जो 22 सितम्बर से लागू होगी। इसमें व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर टैक्स पूरी तरह से हटा दिया गया है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सुधार वास्तव में छोटे कारोबारियों और किसानों को राहत देगा या यह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा? क्या राज्यों को अगले 5 सालों तक अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा? इन सवालों का जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस बनाम भाजपा की कर नीति
कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार की जीएसटी नीति पूरी तरह से गरीब और मध्यम वर्ग के खिलाफ है। इसे “गब्बर सिंह टैक्स” कहकर कांग्रेस ने जनता के बीच इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने का संकेत दिया है। दूसरी ओर, भाजपा सरकार दावा कर रही है कि हालिया सुधार कर प्रणाली को सरल बनाएंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि यह विवाद अब सीधे राजनीतिक अखाड़े में पहुंच चुका है और आगामी चुनावों, खासकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025, पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।




