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बिहार MLC चुनाव में बीजेपी को दो सीटें, जेडीयू ने पटना में लगाई जीत की हैट्रिक; RJD ने BJP के दिग्गज को हराया

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में बंटा मुकाबला, जन सुराज ने भी खोला खाता; पटना टीचर्स सीट पर पांच बार के विजेता नवल किशोर यादव की हार से बीजेपी को बड़ा झटका

राजनीति/ बिहार | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 29 अक्टूबर 2026

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में बीजेपी ने दो सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई, जबकि जेडीयू ने पटना स्नातक सीट पर कब्जा बरकरार रखा। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के पांच बार के विजेता नवल किशोर यादव को हराकर बड़ा उलटफेर किया। जन सुराज पार्टी ने भी दरभंगा शिक्षक सीट जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में किसी एक दल का दबदबा नहीं रहा।

बीजेपी को दो सीटें, दरभंगा में भी बढ़त

बीजेपी ने तिरहुत शिक्षक और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। कोसी स्नातक सीट से नरेंद्र कुमार यादव ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की। उन्होंने 10 हजार से अधिक वोट हासिल किए और दो हजार से ज्यादा मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

दरभंगा स्नातक सीट पर मतगणना के दौरान बीजेपी के सर्वेश कुमार 16,115 वोटों के साथ आगे चल रहे थे, जबकि RJD के अनिल कुमार झा को 14,615 वोट मिले थे। जन सुराज के मोहम्मद इम्तियाज 10,227 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे। खबर दाखिल किए जाने तक इस सीट का अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुआ था।

मतगणना केंद्र पर हंगामा, पांच लोग हिरासत में

दरभंगा स्नातक सीट की मतगणना के दौरान NDA और RJD प्रत्याशियों के एजेंटों के बीच विवाद के बाद तनाव फैल गया। हंगामे के बाद प्रशासन ने पांच लोगों को हिरासत में लिया। इनमें बीजेपी प्रत्याशी के तीन और RJD प्रत्याशी के दो मतगणना एजेंट शामिल थे।

RJD प्रत्याशी के एजेंटों ने प्रशासन पर चुनाव में गड़बड़ी के जरिए उनके उम्मीदवार को हराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई थी।

पटना में जेडीयू की हैट्रिक, अंदरूनी कलह के बीच जीत

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने RJD के दिलीप कुमार को हराया, जबकि जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह तीसरे स्थान पर रहे।

इस सीट का मुकाबला जेडीयू के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करते हुए जन सुराज के अनुज सिंह का समर्थन किया था। इसके बाद जेडीयू ने कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के चलते अनंत सिंह को छह साल के लिए निलंबित कर दिया।

नीरज कुमार की जीत से पार्टी को राहत मिली, लेकिन चुनाव के दौरान सामने आई अंदरूनी खींचतान ने जेडीयू की संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल भी खड़े किए।

नवल किशोर यादव की हार, RJD को बड़ी कामयाबी

बीजेपी के लिए सबसे बड़ा झटका पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लगा। पार्टी के दिग्गज नेता और पांच बार से इस सीट पर जीतते आ रहे नवल किशोर यादव को RJD के डॉ. संजीव कुमार ने हरा दिया। यह उस सीट पर विपक्ष की अहम जीत है, जहां लंबे समय से बीजेपी का प्रभाव रहा था।

तिरहुत शिक्षक सीट पर बीजेपी के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार भूषण झा को हराया। नरेंद्र प्रसाद सिंह को 2,945, जबकि भूषण झा को 2,351 वोट मिले। इस बार CPI उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे।

जन सुराज की जीत से प्रशांत किशोर को बढ़त

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत की। पार्टी के सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मौजूदा विधान पार्षद मदन मोहन झा को हराया।

जन सुराज के लिए यह जीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, सारण शिक्षक सीट पर पार्टी समर्थित उम्मीदवार अफाक अहमद तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर बीजेपी के बागी राहुल राज ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। उन्हें 3,300 वोट मिले, जबकि जेडीयू के आनंद पुष्कर को 2,727 वोट हासिल हुए।

कांग्रेस खाली हाथ, NDA का मिला-जुला प्रदर्शन

आठ सीटों के इस चुनाव में कांग्रेस पांच सीटों पर मैदान में उतरी थी, लेकिन पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल सकी। जेडीयू ने पटना स्नातक सीट जीती, लेकिन तिरहुत स्नातक और सारण व दरभंगा शिक्षक सीटें गंवा दीं।

कुल मिलाकर बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए दो सीटें जीतीं और दरभंगा स्नातक सीट पर भी बढ़त बनाई। वहीं, जेडीयू की पटना में जीत, RJD की बीजेपी के पुराने गढ़ में सेंध और जन सुराज की सफलता ने बिहार की राजनीतिक तस्वीर को दिलचस्प बना दिया।

बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं। इनमें 63 सदस्य निर्वाचित होते हैं, जबकि 12 सदस्यों को मनोनीत किया जाता है।

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