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₹200 का कूपन बना ₹50 लाख की SUV का टिकट! 6 साल के मेदांश की चमकी किस्मत

दादी ने गरबा समारोह में खरीदा था लकी ड्रॉ कूपन, पोते के नाम निकली टोयोटा फॉर्च्यूनर; दो साल से कार खरीदने का सपना देख रहा था परिवार

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बुरहानपुर/नई दिल्ली | 29 अक्टूबर 2026

कहते हैं कि किस्मत कब पलट जाए, कोई नहीं जानता! मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में महज 6 साल के एक बच्चे की किस्मत ऐसी चमकी कि परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दादी ने पिछले साल गरबा समारोह में सिर्फ ₹200 का लकी ड्रॉ कूपन खरीदा था। इस कूपन पर उनके पोते मेदांश रायकवार के नाम निकली लाखों रुपये की चमचमाती टोयोटा फॉर्च्यूनर SUV!

₹200 लगाए, लाखों की गाड़ी मिली!

मेदांश की दादी किरण रायकवार ने पिछले साल अभापुर स्थित श्री सरकार धाम में आयोजित गरबा कार्यक्रम के दौरान ₹200 का कूपन खरीदा था। उन्होंने कूपन में अपने पोते का नाम दर्ज कराया। उस वक्त शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इतनी छोटी रकम एक दिन पूरे परिवार के लिए इतनी बड़ी खुशखबरी लेकर आएगी।

साल 2026 में जब लकी ड्रॉ के विजेता के रूप में मेदांश का नाम घोषित हुआ, तो परिवार की खुशी सातवें आसमान पर पहुंच गई।

दो साल से कार खरीदने का सपना, अब घर आई फॉर्च्यूनर!

इस कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि परिवार पिछले दो वर्षों से अपनी कार खरीदने का सपना देख रहा था। लेकिन अब उन्हें कार खरीदने के लिए लाखों रुपये जुटाने की जरूरत नहीं पड़ी। महज ₹200 के कूपन ने उनका सपना हकीकत में बदल दिया।

टोयोटा फॉर्च्यूनर की इंदौर में ऑन-रोड कीमत लगभग ₹41.39 लाख से शुरू होकर टॉप वेरिएंट के लिए ₹60.74 लाख तक जाती है। यानी ₹200 के कूपन से परिवार को ऐसी SUV मिली, जिसकी कीमत लाखों रुपये में है।

ढोल-नगाड़े बजे, घर में पूजा और जश्न!

मेदांश की जीत की खबर फैलते ही रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने परिवार को बधाई दी। बच्चे का भव्य स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों के बीच खुशियां मनाई गईं और नई गाड़ी मिलने पर परिवार ने पूजा-पाठ कर आशीर्वाद मांगा।

सोशल मीडिया पर भी यह कहानी तेजी से चर्चा में आई। लोगों को यकीन नहीं हो रहा कि सिर्फ ₹200 के कूपन से इतनी महंगी गाड़ी जीती जा सकती है। एक यूजर ने लिखा कि ₹200 खर्च करके करीब ₹50 लाख की कार जीतना अविश्वसनीय है। दूसरे यूजर ने कहा कि दादी के लिए यह बेहद गर्व और खुशी का पल होगा।

किस्मत का खेल, लेकिन कहानी यादगार!

मेदांश की कहानी ने पूरे परिवार के लिए एक साधारण कूपन को जिंदगी भर याद रहने वाली खुशी में बदल दिया। दादी ने तो सिर्फ एक लकी ड्रॉ में हिस्सा लिया था, लेकिन नतीजा ऐसा निकला कि छह साल का बच्चा देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया।

कभी-कभी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशियां उन छोटी-छोटी उम्मीदों से निकलती हैं, जिन्हें हम बस यूं ही आजमा लेते हैं। हालांकि, लकी ड्रॉ में जीत पूरी तरह संयोग पर निर्भर करती है—इसलिए ऐसी कहानियों को किस्मत का अनोखा खेल समझना चाहिए, कमाई का भरोसेमंद तरीका नहीं।

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