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टीम इंडिया के पास ओपनर्स की फौज, किसे मिलेगा मौका और किसकी बजेगी बेंच?

अभिषेक का तूफान, संजू का अंदाज, ईशान की विस्फोटक बल्लेबाजी और 15 साल के वैभव का धमाका—ओपनिंग की कुर्सी के लिए दिलचस्प मुकाबला!

खेल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 अक्टूबर 2026

भारतीय क्रिकेट में अब सवाल यह नहीं है कि पारी की शुरुआत कौन करेगा, बल्कि सवाल यह है कि इतने सारे विस्फोटक बल्लेबाजों में से किन दो को मौका दिया जाए! टीम इंडिया के पास ऐसे ओपनर्स की भरमार है, जो पावरप्ले में ही मैच का नक्शा बदल सकते हैं। अभिषेक शर्मा गेंदबाजों के छक्के छुड़ाते हैं, संजू सैमसन अपने अंदाज में हमला बोलते हैं, ईशान किशन पल भर में मैच पलटने का दम रखते हैं और 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही बड़े-बड़े गेंदबाजों को चुनौती देने का माद्दा दिखा दिया है।

अब ओपनिंग की कुर्सी पर म्यूजिकल चेयर जैसा मुकाबला है—कुर्सियां कम, दावेदार ज्यादा! लेकिन भारतीय टीम के लिए यही परेशानी उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है।

चार बल्लेबाज, चार अंदाज, एक ही मिशन—तबाही!

इन चारों बल्लेबाजों के आंकड़े उनकी आक्रामकता की कहानी खुद बयान करते हैं। 2024 टी20 विश्व कप के बाद के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक—

* अभिषेक शर्मा ने 67 पारियों में 2,216 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 198.21 है।

* संजू सैमसन ने 39 पारियों में 1,229 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 181 है।

* ईशान किशन ने पांच पारियों में 176 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 193.40 है।

* वैभव सूर्यवंशी ने नौ पारियों में 291 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 192.71 है।

जरा सोचिए! लगभग हर गेंद पर गेंदबाज के सामने खतरा। किसी को मौका मिल जाए तो वह पहली गेंद से ही हमला बोलने को तैयार। यही वजह है कि भारतीय टीम के लिए ओपनिंग की जोड़ी चुनना आसान नहीं रहने वाला।

अभिषेक शर्मा: पावरप्ले के सबसे बड़े तूफान!

अभिषेक शर्मा इस नई आक्रामक बल्लेबाजी के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे हैं। उनका अंदाज साफ है—गेंद मिली तो उसे बाउंड्री के पार पहुंचाने की कोशिश। वह सिर्फ अपना स्कोर बढ़ाने के लिए नहीं खेलते, बल्कि शुरुआत से ही विरोधी टीम पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।

पिछले दो वर्षों में चार टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक इस बात का संकेत हैं कि उनका आक्रामक अंदाज सिर्फ एक-दो पारियों तक सीमित नहीं है। टीम का भरोसा भी उन्हें खुलकर खेलने की आजादी देता है। यहां नाकामी के डर से बल्ला रोकने के बजाय अगली गेंद पर फिर हमला करने की मानसिकता दिखाई देती है।

वैभव सूर्यवंशी: 15 साल की उम्र, लेकिन इरादे किसी तूफान जैसे!

वैभव सूर्यवंशी की एंट्री ने ओपनिंग की कहानी में नया रोमांच जोड़ दिया है। जिस उम्र में ज्यादातर खिलाड़ी बड़े मंच पर जगह बनाने का सपना देखते हैं, उसी उम्र में वैभव गेंदबाजों के सामने बेखौफ उतर रहे हैं।

इस दौरे पर ईशान किशन के चोटिल होने से वैभव को मौका मिला और उन्होंने इसे अपने खेल को दिखाने के अवसर में बदला। अभिषेक जैसे आक्रामक बल्लेबाज के साथ उनकी जोड़ी ने यह भी दिखाया कि युवा खिलाड़ी को खुलकर खेलने के लिए अनुभव का लंबा प्रमाणपत्र जरूरी नहीं।

अभिषेक ने भी वैभव को सहज महसूस कराने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की बात कही है। यानी संदेश साफ है—युवा हो तो अपने शॉट खेलो, मौका मिले तो उसका पूरा फायदा उठाओ!

संजू सैमसन: अलग अंदाज, वही आक्रामक मिजाज

संजू सैमसन की खासियत यह है कि वह अभिषेक की नकल किए बिना भी विरोधी गेंदबाजों पर दबाव बना सकते हैं। उनका स्ट्राइक रेट 181 रहा है, जो बताता है कि वह भी तेज गति से रन बनाने की क्षमता रखते हैं।

वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के बाद अभिषेक के साथ अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए संजू ने बेहद सरल अंदाज में कहा था कि दोनों ज्यादा कुछ नहीं सोचते—गेंद देखते हैं और जोर से मारते हैं।

सुनने में यह बात आसान लगती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा करने के लिए तैयारी, अभ्यास और टीम के भरोसे की जरूरत होती है। यही भरोसा भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने की ताकत दे रहा है।

ईशान किशन: जरूरत पड़े तो खुद संभालेंगे मोर्चा!

ईशान किशन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी ही नहीं करते, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपनी भूमिका भी बदल सकते हैं।

सितंबर में अफगानिस्तान के खिलाफ अभिषेक शर्मा के साथ 121 रन की साझेदारी के बाद ईशान ने बताया था कि दूसरे छोर पर अभिषेक अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे, इसलिए उन्होंने उनकी लय बनाए रखने पर ध्यान दिया। अगर अभिषेक संघर्ष कर रहे होते, तो ईशान खुद आक्रामक भूमिका संभाल सकते थे।

यही भारतीय टीम की असली ताकत है। दोनों बल्लेबाजों को हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की जरूरत नहीं। एक हमला करे तो दूसरा उसका साथ दे सकता है, और जरूरत पड़ने पर भूमिकाएं बदल सकती हैं।

यहां निजी रिकॉर्ड नहीं, मैच जीतना प्राथमिकता है।

ओपनिंग की कुर्सी पर किसका कब्जा?

फिलहाल अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की जोड़ी को प्राथमिकता देने का विकल्प मौजूद है। वैभव सूर्यवंशी को खास परिस्थितियों में मौका दिया जा सकता है, जबकि ईशान किशन भी अपनी दावेदारी मजबूत करने की क्षमता रखते हैं।

पिच कैसी है, सामने किस तरह के गेंदबाज हैं और टीम को किस तरह की शुरुआत चाहिए—इन बातों के आधार पर चयन का फैसला बदल सकता है। बाएं हाथ के बल्लेबाजों का संयोजन चाहिए या अनुभव के साथ आक्रामकता, भारतीय टीम के पास कई विकल्प हैं।

हालांकि, तेज स्ट्राइक रेट हर मैच में बड़ी पारी की गारंटी नहीं देता। आक्रामक बल्लेबाजों के खराब दौर भी आते हैं और वैभव को अभी अपने प्रदर्शन को लंबे समय तक दोहराना होगा। लेकिन टीम के पास इतने विकल्प होने से किसी एक खिलाड़ी की नाकामी पूरी रणनीति पर भारी नहीं पड़ती।

विरोधी कप्तानों की बढ़ी सिरदर्दी!

पहले विरोधी टीमों की योजना किसी एक खतरनाक ओपनर को जल्दी आउट करने पर केंद्रित हो सकती थी। अब चुनौती इससे बड़ी है। एक बल्लेबाज को रोक भी लिया, तो दूसरे छोर पर अगला खिलाड़ी उसी रफ्तार से हमला बोल सकता है।

भारत की ओपनिंग परंपरा पहले भी मजबूत रही है। रोहित शर्मा और शिखर धवन की जोड़ी से लेकर रोहित और केएल राहुल तक, भारतीय टीम ने कई शानदार सलामी जोड़ियां देखी हैं। लेकिन मौजूदा दौर की खासियत यह है कि तेज शुरुआत देने वाले विकल्पों की संख्या काफी बढ़ गई है।

अब मुकाबला सिर्फ गेंद और बल्ले का नहीं, बल्कि रणनीति का भी है। कौन खेलेगा, कौन बाहर बैठेगा और किस दिन किस बल्लेबाज का बल्ला आग उगलेगा—यही चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के सामने सबसे दिलचस्प सवाल हैं।

आखिरी बात: भारत की परेशानी यह नहीं कि ओपनिंग कौन करेगा। असली चुनौती यह है कि इतने सारे धुरंधरों में से किन दो को चुना जाए! विरोधी गेंदबाजों के लिए तो हर नया ओपनर एक नई मुसीबत बन सकता है।

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