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‘मुझसे ऐसे बात करने की हिम्मत कैसे हुई?’ महिला अधिकारी ने IAS बॉस को घेरा

श्रीनगर में बैठक के दौरान महिला अधिकारी से अभद्र व्यवहार, निलंबन का आदेश तैयार करने के निर्देश देने का आरोप

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | श्रीनगर | 16 अक्टूबर 2026

सरकारी पद पर बैठने का मतलब किसी अधीनस्थ अधिकारी का अपमान करने का अधिकार मिल जाना नहीं है। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में एक बैठक के दौरान वरिष्ठ IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन के व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि उन्होंने एक महिला अधिकारी के साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और जब महिला अधिकारी ने इस पर आपत्ति जताई, तो उन्होंने अपने अधीनस्थ को उसका निलंबन आदेश तैयार करने का निर्देश दे दिया। घटना से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यसंस्कृति और महिला अधिकारियों के सम्मान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आपत्ति जताई तो निलंबन की बात

बैठक के दौरान सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, वरिष्ठ IAS अधिकारी कुमार राजीव रंजन महिला अधिकारी से कथित तौर पर अपमानजनक ढंग से बात करते सुनाई दिए। महिला अधिकारी ने उनकी भाषा पर आपत्ति जताई और सवाल किया, “मुझसे ऐसे बात करने की हिम्मत कैसे हुई?”

आरोप है कि महिला अधिकारी की आपत्ति के बाद वरिष्ठ अधिकारी ने अपने अधीनस्थ को उनका निलंबन आदेश तैयार करने के लिए कहा। यदि यह घटनाक्रम आरोपों के अनुरूप साबित होता है, तो यह प्रशासनिक पद और अधिकार के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं और संबंधित अधिकारियों के पक्ष की पुष्टि निष्पक्ष जांच के जरिए होना जरूरी है।

राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल

इस घटना को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के नेताओं ने IAS अधिकारी के आचरण की आलोचना की है। मामले ने प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार, अधीनस्थ कर्मचारियों के सम्मान और सरकारी तंत्र में जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।

खबर के मुताबिक, कुमार राजीव रंजन इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। ऐसे में उनके आचरण को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष पड़ताल और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना महत्वपूर्ण है।

पद बड़ा हो सकता है, कानून से ऊपर कोई नहीं

सरकारी व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों के पास फैसले लेने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की शक्तियां होती हैं। लेकिन इन शक्तियों का इस्तेमाल नियमों और उचित प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। किसी अधिकारी द्वारा अनुचित भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताना अपने आप में अनुशासनहीनता नहीं माना जा सकता; यह तय करना तथ्यों और लागू सेवा नियमों पर निर्भर करेगा।

महिला अधिकारियों को भी कार्यस्थल पर सम्मान, निष्पक्ष व्यवहार और बिना अनुचित दबाव के काम करने का अधिकार है। यदि किसी अधिकारी ने केवल अपमानजनक व्यवहार पर सवाल उठाने के कारण अधीनस्थ के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।

अब जरूरी है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो, बैठक में मौजूद लोगों के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड की पड़ताल की जाए तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने रखा जाए। सरकारी पद की गरिमा केवल अधिकार जताने से नहीं, बल्कि जिम्मेदार आचरण और दूसरों के सम्मान से कायम रहती है।

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