राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | देहरादून | 16 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड में जब राज्य सरकार की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्य ही अपने पति पर मारपीट, धमकी और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगा रही हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। देहरादून के कैंट थाने में इस मामले में FIR दर्ज की गई है।
रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि उनके पति ने उनके साथ शारीरिक मारपीट की, उन्हें धमकाया और जातिसूचक गालियां दीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गिरधारी लाल साहू ने अपनी पिछली शादी की बात उनसे छिपाई थी। शिकायत में कंपनियों में उनके निदेशक पद से हटाने के लिए कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी शामिल है।
हत्या की साजिश का भी आरोप
मंत्री ने अपनी शिकायत में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का जिक्र किया है। उनका संदेह है कि इसमें उनके पति और एक अन्य महिला के बीच उन्हें जान से मारने की साजिश को लेकर बातचीत हुई है। यह आरोप बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। पुलिस को ऑडियो की प्रामाणिकता, बातचीत के संदर्भ और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की जांच साक्ष्यों के आधार पर करनी होगी।
आम महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
यह मामला कई असहज सवाल खड़े करता है। जब सरकार में महत्वपूर्ण पद पर बैठी महिला अपने ही पति के खिलाफ इस तरह के गंभीर आरोप लगा रही है, तो उन महिलाओं की स्थिति पर चिंता होना स्वाभाविक है जिनके पास न राजनीतिक प्रभाव है, न प्रशासन तक आसान पहुंच और न ही अपनी बात मजबूती से रखने के संसाधन।
महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकारी योजनाओं और मंचों से किए गए दावों से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए जरूरी है कि हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए, पीड़ित महिला को आवश्यक सुरक्षा मिले और जांच बिना किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव के पूरी हो।
निष्पक्ष जांच जरूरी
FIR दर्ज होना आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। अब पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह सभी तथ्यों और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच करे। संबंधित पक्ष का जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
सवाल सिर्फ एक मंत्री की सुरक्षा का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भरोसे का है जो हर महिला को सुरक्षित जीवन और न्याय का अधिकार देने का दावा करती है। रेखा आर्य के मामले में जांच कितनी निष्पक्ष और प्रभावी रहती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।



