12 जून को हुए भीषण Air India Flight AI-171 हादसे के दो सप्ताह बाद, 26 जून 2025 को दुर्घटना की जाँच ने एक निर्णायक मोड़ लिया जब Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) द्वारा ब्लैक बॉक्स से प्राप्त आंकड़ों के प्रारंभिक विश्लेषण को सार्वजनिक किया गया। दो प्रमुख उपकरण — Cockpit Voice Recorder (CVR) और Flight Data Recorder (FDR) — जो किसी भी विमान दुर्घटना की “डिजिटल गवाही” होते हैं, उन्हें घटनास्थल से सावधानीपूर्वक निकालकर दिल्ली की सुरक्षित प्रयोगशालाओं में भेजा गया था।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, टेक-ऑफ के ठीक 18 से 22 सेकंड के भीतर दोनों इंजनों में एक साथ बंद हो जाना अत्यंत असामान्य और अस्वाभाविक घटना थी। इससे यह संकेत मिला कि कोई “Simultaneous Dual Engine Failure” हुआ, जिसे सामान्य तकनीकी खराबी के दायरे में नहीं माना जा सकता। इसके बाद Ram Air Turbine (RAT) — जो केवल आपातकालीन स्थितियों में कार्य करता है — अपने-आप सक्रिय हो गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरी विमान प्रणाली अचानक ऊर्जा शून्य की स्थिति में चली गई थी।
इस तकनीकी विश्लेषण ने जांच एजेंसियों को दो प्रमुख दिशाओं में सोचने पर मजबूर किया — पहला, संभावित निर्मात्री खामी (Manufacturing Defect) और दूसरा, साबोटाज या आतंकी हस्तक्षेप। चूंकि विमान अपेक्षाकृत नया था और उसकी Flight Maintenance Record में कोई बड़ी शिकायत नहीं थी, इसलिए एजेंसियों ने यह स्वीकार किया कि केवल सिस्टम फेल्योर से यह दुर्घटना संभव नहीं थी। रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय की विशेष टीमों को भी शामिल करते हुए, आतंकी साजिश की संभावना की उच्च स्तरीय जाँच शुरू की गई।
महत्वपूर्ण रूप से, भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया कि ब्लैक बॉक्स को किसी विदेशी एजेंसी या देश में नहीं भेजा जाएगा। यह निर्णय देश की तकनीकी स्वायत्तता और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत अब अपनी Aviation Forensics Capability में इतना सक्षम है कि इस स्तर की जाँच और विश्लेषण स्वयं कर सके।
इसी बीच, शवों की पहचान की प्रक्रिया भी बहुत चुनौतीपूर्ण रही। भयानक आग और विस्फोट के कारण अधिकांश शव बुरी तरह झुलस गए थे। AIIMS, दिल्ली और NFSU (National Forensic Sciences University) के विशेषज्ञों की मदद से DNA मैचिंग के जरिए 260 में से 254 शवों की पहचान की गई। बचे हुए 6 शवों को ‘Non-Identifiable Category’ में रखा गया, और उन्हें ‘सांकेतिक श्रद्धांजलि समारोह’ के बाद अंतिम संस्कार के लिए सौंपा गया।
टाटा समूह, एयर इंडिया के वर्तमान अधिग्रहणकर्ता के रूप में, हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सामने आया और एक ₹500 करोड़ का राहत ट्रस्ट गठित करने की घोषणा की। इस ट्रस्ट के माध्यम से मृतकों के परिवारों को चिकित्सा, मानसिक परामर्श, शिक्षा सहायता और पुनर्वास की समर्पित सेवाएं प्रदान की जाएंगी। समूह के चेयरमैन ने कहा, “यह केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि हमारी नैतिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।”




