राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 अक्टूबर 2026
हटाए गए मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने में परेशानी
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए नामों को दोबारा शामिल कराने की प्रक्रिया का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने और मामले को देखने का भरोसा दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण और नेहा राठी ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद उन्हें दोबारा शामिल कराने के लिए संबंधित लोगों को फॉर्म-6 भरने के लिए कहा जा रहा है। यह फॉर्म सामान्य तौर पर नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है। याचिकाकर्ताओं का सवाल है कि जो नागरिक पहले से मतदाता थे, उन्हें नाम बहाल कराने के लिए नए आवेदक के रूप में आवेदन क्यों करना चाहिए।
फॉर्म-8 या अलग व्यवस्था बनाने की मांग
प्रशांत भूषण ने अदालत के सामने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग या तो स्थान परिवर्तन करने वाले मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-8 के जरिए नाम बहाल करने की अनुमति दे या SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के लिए अलग फॉर्म और स्पष्ट प्रक्रिया तैयार करे।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया जाए, जिसके तहत हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल हो सकें और उन्हें पहली बार मतदाता बनने जैसा आवेदन न करना पड़े।
घोषणा और सजा को लेकर भी उठाया सवाल
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने यह भी दावा किया कि नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया में लोगों को ऐसी घोषणा देनी पड़ सकती है, जिससे यह जाहिर हो कि उन्होंने पहले कभी मतदान नहीं किया है। उनके अनुसार, गलत घोषणा करने पर कानूनी कार्रवाई या जेल का जोखिम भी बताया जा रहा है।
यह आरोप याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में रखा गया है। मामले में चुनाव आयोग का विस्तृत पक्ष और संबंधित निर्देशों की पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बहस
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का पुनरीक्षण करना है, लेकिन इस प्रक्रिया में नाम हटाए जाने और उन्हें बहाल कराने के तरीकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विवाद का प्रमुख मुद्दा यह है कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची से हट जाता है, तो उसे दोबारा शामिल कराने की प्रक्रिया सरल, स्पष्ट और निष्पक्ष होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में उठे इस मामले का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि मतदाता सूची में नाम होना मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करने की बुनियादी शर्त है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अदालत के हस्तक्षेप के बाद चुनाव आयोग हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने के लिए क्या व्यवस्था अपनाता है।



