राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 अक्टूबर 2026
रेल यात्रियों की सुरक्षा और दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने भारतीय रेलवे को आदेश दिया है कि 27 अक्टूबर 2026 से रेलवे स्टेशनों के काउंटर पर बेचे जाने वाले सभी टिकटों को भी बीमा कवर के दायरे में लाया जाए। अब तक ऑनलाइन टिकटों के साथ उपलब्ध बीमा सुविधा की तरह ऑफलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी यह सुरक्षा देने का निर्देश दिया गया है। आदेश का पालन नहीं होने पर रेलवे बोर्ड को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने 6 अक्टूबर को यह निर्देश दिया था। मामला जून 2023 में हुए ओडिशा रेल हादसे के बाद दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में दुर्घटना की जांच और रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को जल्द लागू करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों—रेलवे ट्रैक की फेंसिंग, फुट ओवरब्रिज और टिकट बीमा—पर भी रेलवे की प्रगति की समीक्षा की।
रेलवे की तैयारियों पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे अधिकारियों के कामकाज पर गहरी निराशा जताई। अदालत ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर रेलवे की ओर से जरूरी कदम उठाने के आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन जमीन पर पर्याप्त बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।
पीठ ने टिप्पणी की कि रेलवे की ओर से सुरक्षा उपायों को लेकर दिए गए आश्वासन बड़े पैमाने पर कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि सुरक्षा से जुड़े निर्धारित क्षेत्रों के लिए बजट का प्रावधान होने के बावजूद पूरी राशि का उपयोग नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामले में केवल योजनाएं घोषित करना पर्याप्त नहीं है। रेलवे को यह दिखाना होगा कि सुरक्षा उपायों पर वास्तव में कितना काम हुआ है और तय लक्ष्यों को पूरा करने में देरी क्यों हो रही है।
‘कवच’ और ट्रैक फेंसिंग पर भी मांगा हिसाब
रेलवे सुरक्षा की समीक्षा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा—कवच प्रणाली का विस्तार, रेलवे ट्रैक की फेंसिंग और फुट ओवरब्रिज का निर्माण। अदालत ने रेलवे से इन परियोजनाओं पर किए गए वास्तविक काम, विशेष अभियान और बजट संबंधी प्रतिबद्धताओं का विवरण मांगा।
पीठ ने पहले रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया था, ताकि वे सुरक्षा उपायों की धीमी प्रगति पर जवाब दे सकें। बाद में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने एक और अवसर देने का अनुरोध किया। उन्होंने पिछले एक वर्ष में जमीन पर हुए काम और निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं होने के कारणों का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का समय मांगा।
अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों को तलब करने के अपने आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया। रेलवे को दो सप्ताह के भीतर वास्तविक प्रगति और देरी के कारणों का विवरण प्रस्तुत करना होगा।
काउंटर टिकट पर बीमा: 27 अक्टूबर से लागू होगा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे को काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बीमा सुविधा देने की व्यवस्था तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है। इसके बावजूद इस दिशा में प्रगति नहीं हुई।
इसी को देखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि 27 अक्टूबर 2026 से सभी रेलवे स्टेशनों के काउंटर पर बेचे जाने वाले टिकटों को भी ऑनलाइन टिकटों की तरह बीमा कवर दिया जाए। आदेश का पालन अनिवार्य होगा और इसमें विफल रहने पर जिम्मेदारी सीधे रेलवे बोर्ड की होगी।
यह कदम उन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है जो इंटरनेट या डिजिटल भुगतान की सुविधा का इस्तेमाल नहीं करते और रेलवे आरक्षण काउंटर से टिकट खरीदते हैं। हालांकि, बीमा की सटीक राशि, कवरेज की शर्तों और दावे की प्रक्रिया के बारे में यात्रियों को रेलवे की ओर से जारी विस्तृत जानकारी देखनी चाहिए।
अगली सुनवाई 16 नवंबर को
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित की है। इस दौरान रेलवे की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे और सुरक्षा उपायों पर जमीन पर हुई प्रगति महत्वपूर्ण होगी।
अदालत की सख्ती का संदेश स्पष्ट है: रेल यात्रियों की सुरक्षा केवल बजट, योजनाओं और आश्वासनों का विषय नहीं हो सकती। रेलवे को यह साबित करना होगा कि सुरक्षा उपायों पर वास्तविक काम हुआ है, संसाधनों का उपयोग हुआ है और यात्रियों को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।
काउंटर टिकटों पर बीमा लागू करने का निर्देश यात्रियों को आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन बीमा दुर्घटना के बाद आर्थिक राहत देता है; वह दुर्घटना रोकने का विकल्प नहीं है। कवच का विस्तार, ट्रैक की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में सुधार उतने ही जरूरी हैं। अब रेलवे की असली परीक्षा अदालत में दिए गए आश्वासनों से नहीं, बल्कि 27 अक्टूबर से आदेश के पालन और जमीन पर दिखाई देने वाले सुरक्षा सुधारों से होगी।



