मनोरंजन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026
जिस कलाकार ने अपनी कॉमेडी से करोड़ों लोगों को हंसाया, जिसकी आवाज और अंदाज सुनते ही चेहरों पर मुस्कान आ जाती थी, वही राजू श्रीवास्तव एक समय इस बात को लेकर परेशान थे कि अगर वह किसी कॉमेडी प्रतियोगिता में जीत नहीं पाए तो लोग क्या सोचेंगे। यह दिलचस्प किस्सा अभिनेता और कॉमेडियन शेखर सुमन ने साझा किया है। उनका मानना है कि लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ के पहले सीजन में राजू श्रीवास्तव जीतने के हकदार थे, लेकिन उन्हें विजेता का खिताब नहीं मिल पाया।
जब राजू ने शेखर सुमन से मांगी सलाह
शेखर सुमन ने एक हालिया इंटरव्यू में उस दौर को याद किया, जब ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ शुरू होने वाला था। शो की घोषणा के बाद राजू श्रीवास्तव ने उनसे संपर्क किया और पूछा कि उन्हें इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहिए या नहीं। राजू के मन में एक खास चिंता थी। वह मनोरंजन की दुनिया में अपनी पहचान बना चुके थे, जबकि प्रतियोगिता में शामिल कई दूसरे कलाकार अभी दर्शकों के बीच उतने मशहूर नहीं थे।
शेखर के मुताबिक, राजू ने उनसे कहा था कि दूसरे कलाकारों को लोग शायद ज्यादा नहीं जानते, लेकिन उनकी अपनी एक पहचान बन चुकी है। ऐसे में अगर वह शो में हिस्सा लेने के बाद जीत नहीं पाए और दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे, तो उनके लिए यह काफी शर्मिंदगी की बात होगी। राजू का यह सवाल बताता है कि दूसरों को हंसाने वाला कलाकार भी अपने करियर और प्रतिष्ठा को लेकर भीतर से कितना गंभीर हो सकता है।
शेखर सुमन की नजर में जीत के असली हकदार
राजू श्रीवास्तव ने आखिरकार शो में हिस्सा लिया। हालांकि, पहले सीजन में वह विजेता नहीं बन सके और उन्हें दूसरा रनर-अप यानी तीसरा स्थान मिला। लेकिन शेखर सुमन आज भी मानते हैं कि राजू में जीतने की पूरी क्षमता थी। उनका यह बयान राजू की हास्य प्रतिभा के प्रति सम्मान को दिखाता है।
‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ ने भारतीय टेलीविजन पर स्टैंड-अप कॉमेडी को घर-घर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। शेखर सुमन ने 2005 से 2017 के बीच इसके कई सीजन में जज की भूमिका निभाई। उनके साथ कई सीजन में पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भी नजर आए। इस मंच ने कई कॉमेडियनों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और दर्शकों को मनोरंजन का एक नया अंदाज दिया।
फिल्मों में भी आजमाया था हाथ
टेलीविजन पर बड़ी लोकप्रियता हासिल करने से पहले राजू श्रीवास्तव फिल्मों में भी काम कर चुके थे। उन्होंने ‘तेजाब’ (1988), ‘मैंने प्यार किया’ (1989), ‘बाजीगर’ (1993) और ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’ (2003) जैसी फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाईं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान उनके अपने हास्य अंदाज से बनी।
राजू की खासियत यह थी कि वह आम जिंदगी के किरदारों, रोजमर्रा की घटनाओं और आसपास दिखाई देने वाले लोगों से हास्य निकाल लेते थे। उनके चुटकुलों में आम आदमी की जिंदगी की झलक मिलती थी। यही वजह थी कि दर्शक उनके किरदारों में खुद को पहचानते थे और उनकी कॉमेडी से तुरंत जुड़ जाते थे।
ट्रॉफी नहीं, दर्शकों का प्यार बना सबसे बड़ी जीत
राजू श्रीवास्तव का सफर यह बताता है कि किसी प्रतियोगिता का नतीजा कलाकार की पूरी पहचान तय नहीं करता। शो में तीसरा स्थान मिलने के बावजूद राजू ने देशभर में अपनी अलग जगह बनाई। उनकी कॉमेडी ने लंबे समय तक लोगों का मनोरंजन किया और उन्हें भारतीय हास्य जगत के यादगार कलाकारों में शामिल कर दिया।
शेखर सुमन का यह खुलासा उस पुराने दौर की यादें ताजा करता है, जब टेलीविजन पर स्टैंड-अप कॉमेडी अपनी नई पहचान बना रही थी। राजू की कहानी में एक तरफ अपनी प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित कलाकार दिखाई देता है, तो दूसरी तरफ ऐसा हुनर भी नजर आता है, जिसे आज उनके साथी कलाकार खुलकर याद करते हैं।
राजू श्रीवास्तव भले ही उस शो की ट्रॉफी नहीं जीत पाए, लेकिन लोगों के दिलों में उन्होंने जो जगह बनाई, वह किसी खिताब से कम नहीं थी।



