[the_ad id="179"]
Home » Sports » विश्वगुरु की हकीकत! गोल्ड दिलाने वाली हॉकी कप्तान के गांव में मोबाइल नेटवर्क तक नहीं

विश्वगुरु की हकीकत! गोल्ड दिलाने वाली हॉकी कप्तान के गांव में मोबाइल नेटवर्क तक नहीं

44 साल का इंतजार खत्म कर देश को दिलाया एशियन गेम्स का स्वर्ण, लेकिन अपने ही गांव में बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे लोग

खेल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026

दुनिया में भारत की ताकत और उपलब्धियों का गुणगान किया जाता है। देश को विश्वगुरु बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन झारखंड के एक गांव की तस्वीर विकास के इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने एशियन गेम्स में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा किया, लेकिन उनके अपने गांव में मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव है। सवाल है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करने वाली बेटी के गांव तक विकास की रोशनी आखिर क्यों नहीं पहुंच पाई?

देश को गोल्ड, गांव को नेटवर्क का इंतजार

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 अक्टूबर को भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर 44 साल का इंतजार खत्म किया। टीम की कप्तान सलीमा टेटे इस ऐतिहासिक उपलब्धि का नेतृत्व कर रही थीं। देशभर में इस जीत की चर्चा हुई और खिलाड़ियों को बधाइयां मिलीं।

लेकिन आठ दिन बाद, जब सलीमा झारखंड के सिमडेगा जिले स्थित अपने गांव लौटने के लिए रवाना हुईं, तो उन्हें कई लोगों को पहले ही संदेश देना पड़ा कि गांव पहुंचने के बाद उनसे मोबाइल फोन पर संपर्क नहीं हो सकेगा। वजह थी—उनके गांव में मोबाइल नेटवर्क का अभाव।

यह स्थिति केवल एक खिलाड़ी की परेशानी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी की चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचती है।

बड़े दावे, लेकिन गांवों की बुनियादी जरूरतें अधूरी

आज मोबाइल नेटवर्क केवल फोन पर बात करने की सुविधा नहीं है। यह ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान, सरकारी योजनाओं की जानकारी, रोजगार के अवसरों और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में किसी गांव में नेटवर्क का न होना वहां के लोगों के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर सकता है।

एक ओर भारत अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाता है, दूसरी ओर दूरदराज के गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी विकास की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाती है। विकास का आकलन केवल बड़े शहरों, चमकती इमारतों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए जाने वाले भाषणों से नहीं होना चाहिए। असली कसौटी यह है कि आम नागरिक को उसके गांव में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

सलीमा टेटे की सफलता, पूरे देश के लिए प्रेरणा

झारखंड के सिमडेगा क्षेत्र ने भारतीय हॉकी को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं। सलीमा टेटे की उपलब्धि बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिभा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है। लेकिन प्रतिभाओं को जन्म देने वाले गांवों में बेहतर सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।

खिलाड़ियों को सम्मानित करना और उनकी सफलता का उत्सव मनाना अच्छी बात है, लेकिन उनके गांवों की समस्याओं का समाधान भी विकास का हिस्सा होना चाहिए। ऐसी सुविधाएं आने वाली पीढ़ियों को बेहतर अवसर दे सकती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं।

सरकार और प्रशासन से सवाल

सलीमा टेटे के गांव में नेटवर्क की समस्या की खबर सामने आने के बाद संबंधित प्रशासन और दूरसंचार कंपनियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जरूरत इस बात की है कि गांव में नेटवर्क की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए, समस्या के कारणों की पहचान हो और समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उपलब्ध रिपोर्ट में नेटवर्क की कमी के कारण और उसे दूर करने की समयसीमा का विवरण नहीं है।

विश्वगुरु बनने के दावे तभी सार्थक होंगे, जब विकास की पहुंच देश के आखिरी गांव तक होगी। जिस बेटी ने अंतरराष्ट्रीय मैदान पर भारत का तिरंगा ऊंचा किया, उसके गांव के लोगों को भी बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। सलीमा टेटे की जीत पूरे देश का गौरव है, लेकिन उनके गांव की स्थिति याद दिलाती है कि भारत की असली प्रगति का पैमाना केवल पदक और दावे नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन में आने वाला वास्तविक बदलाव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *