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नेपाल में कुदरत का कहर: भूस्खलन से नदी में आई भीषण बाढ़, घर- पुल बह गए; हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 11 अक्टूबर 2026

नेपाल के मध्यवर्ती पहाड़ी इलाके में रविवार को भूस्खलन के बाद आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। गोरखा जिले में भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी नदी का प्रवाह अवरुद्ध हो गया। इसके बाद नदी में पानी जमा होता गया और फिर मिट्टी, मलबे तथा तेज बहाव के साथ नीचे की ओर फैल गया। बाढ़ अपने साथ मकान, झूला पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को बहा ले गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने नदी के किनारे रहने वाले हजारों लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, तत्काल किसी की मौत की खबर नहीं थी, लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बचाव दलों को सतर्क रखा गया।

भूस्खलन ने रोकी नदी, फिर मलबे के साथ आया सैलाब

यह घटना काठमांडू से लगभग 100 किलोमीटर पश्चिम में स्थित गोरखा जिले के चुमनुब्री गांव के पास हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, भूस्खलन से बूढ़ी गंडकी नदी का रास्ता बाधित हो गया, जिससे पानी जमा होने लगा। इसके बाद पानी का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा और रास्ते में आने वाले घरों तथा अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बाढ़ का असर दूर-दराज की छोटी बस्तियों तक पहुंचने की आशंका जताई गई।

प्रशासन ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा। गोरखा जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि नदी के किनारे और नीचे की ओर बसे गांवों के लोगों को सुरक्षित रहने के लिए वहां से हटने को कहा गया है।

करीब एक दर्जन मकान और दो झूला पुल बहने की खबर

अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ में लगभग 12 मकान और दो झूला पुल बह गए। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) की जानकारी के मुताबिक, उफनती नदी ने गोरखा जिले को पड़ोसी धादिंग जिले से जोड़ने वाले एक राजमार्ग पुल को भी नष्ट कर दिया। यह पुल मध्य नेपाल में आवागमन के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग था।

बाढ़ से एक जलविद्युत परियोजना का शिविर भी प्रभावित हुआ। हालांकि, वहां काम कर रहे 18 कर्मचारी पानी के तेज बहाव से पहले सुरक्षित निकलने में सफल रहे। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पहाड़ी क्षेत्र से गुजरती उफनती नदी के साथ मकानों और अन्य संरचनाओं को बहते हुए देखा गया। दूरदराज की बस्तियों में हुए कुल नुकसान का आकलन तत्काल नहीं हो सका था।

सेना ने छह लोगों को बचाया, कई जिलों में अलर्ट

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के अनुसार, नेपाली सेना ने जगत गांव में भूस्खलन के तत्काल खतरे का सामना कर रहे छह लोगों को सुरक्षित निकाला। प्रशासन ने गोरखा के अलावा तनहुँ, चितवन, पूर्वी नवलपरासी और पश्चिमी नवलपरासी जिलों के लिए भी आपात चेतावनी जारी की।

नदी का जलस्तर बढ़ने और मलबे के बहाव को देखते हुए अधिकारियों ने निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी। पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा इसलिए भी गंभीर होता है क्योंकि नदी का रास्ता भूस्खलन से रुकने के बाद पानी अचानक टूटकर नीचे की बस्तियों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे हालात में समय रहते निकासी लोगों की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है।

अगस्त की विनाशकारी आपदा की यादें ताजा

नेपाल अभी हाल की एक बड़ी प्राकृतिक आपदा के प्रभाव से उबर भी नहीं पाया है। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में इसी नदी बेसिन की एक अन्य सहायक नदी में हिमनदी के ढहने से विनाशकारी बाढ़ आई थी। सरकारी आंकड़ों के हवाले से उस आपदा में कम से कम 1,457 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया है, जबकि हजारों लोग लापता बताए गए थे।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने सोमवार को उस आपदा के लिए खोज और बचाव अभियान आधिकारिक रूप से समाप्त होने की घोषणा की थी। अब सरकार का ध्यान पुनर्वास, पुनर्निर्माण और बाढ़ में क्षतिग्रस्त सड़कों तथा पुलों की मरम्मत पर केंद्रित है। रिपोर्ट के मुताबिक, उस आपदा से लगभग 33,000 लोग प्रभावित हुए थे और करीब 7,500 मकान क्षतिग्रस्त हुए या पूरी तरह नष्ट हो गए थे। पुनर्निर्माण के लिए सरकार ने लगभग 4.77 अरब डॉलर की जरूरत का अनुमान लगाया है।

राहत और बचाव के सामने बड़ी चुनौती

लगातार प्राकृतिक आपदाओं ने नेपाल के पहाड़ी इलाकों में राहत और संपर्क व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है। सड़कें और पुल टूटने से दूरस्थ गांवों तक पहुंचना कठिन हो सकता है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने और नुकसान का आकलन करने में देरी की आशंका रहती है। बूढ़ी गंडकी नदी में आई ताजा बाढ़ के बाद प्रशासन के सामने सबसे पहली प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालना, लापता लोगों की जानकारी जुटाना और प्रभावित बस्तियों तक सहायता पहुंचाना है।

फिलहाल, ताजा बाढ़ में किसी मौत की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नुकसान का पूरा आकलन बाकी है और बचाव दल सतर्क हैं। प्रशासन की अपील है कि नदी के किनारे रहने वाले लोग चेतावनियों को गंभीरता से लें और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।

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