राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 अक्टूबर 2026
‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर दिल्ली में चल रहे विपक्ष के आंदोलन के बीच बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है। बीजेपी ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर बुधवार के प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वीडियो क्लिप दिखाईं और दावा किया कि इनमें राहुल गांधी एक महिला पुलिसकर्मी को अनुचित तरीके से छूते और प्रियंका गांधी दूसरी महिला पुलिसकर्मी को कोहनी मारते दिखाई देते हैं।
लेकिन कांग्रेस और विपक्ष की ओर से पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने जिस तरह बल और हिरासत का इस्तेमाल किया, उस पर सवाल उठाने के बजाय बीजेपी अब प्रदर्शनकारियों को ही कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के मुताबिक असली सवाल यह है कि जब जनप्रतिनिधि चुनाव आयोग से मिलने और अपनी बात रखने जा रहे थे, तो उन्हें रोकने और हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी।
यही वह बिंदु है जहां बीजेपी के आरोपों पर भी राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। अगर किसी प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ वास्तव में अनुचित व्यवहार हुआ है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन केवल राजनीतिक प्रेस कॉन्फ्रेंस और वीडियो क्लिप के आधार पर पूरे आंदोलन को ‘अराजकता’ बताना भी सवालों से परे नहीं हो सकता।
बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है और प्रदर्शन में आम नागरिकों या व्यापक जनता का प्रतिनिधित्व नहीं है। बीजेपी प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने राहुल गांधी पर एक महिला पुलिसकर्मी को अनुचित तरीके से छूने और प्रियंका गांधी पर दूसरी महिला पुलिसकर्मी को कोहनी मारने का आरोप लगाया। ये बीजेपी के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
वहीं विपक्ष का कहना है कि बीजेपी मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का मूल सवाल SIR, मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर है। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक लगातार मांग कर रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों का पारदर्शी जवाब दिया जाए।
ऐसे में सवाल यह भी है कि राजनीतिक बहस को व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदलने से क्या मूल मुद्दा पीछे नहीं चला जाएगा? अगर चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष के आरोप गलत हैं तो सरकार और चुनाव आयोग को आंकड़ों और दस्तावेजों के साथ जवाब देना चाहिए। और अगर प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ किसी तरह का अनुचित व्यवहार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जवाबदेही होती है। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है और पुलिसकर्मियों की गरिमा व सुरक्षा की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। लेकिन किसी भी पक्ष को राजनीतिक आरोपों के आधार पर दूसरे पक्ष को दोषी घोषित करने के बजाय तथ्यों और स्वतंत्र जांच का रास्ता अपनाना चाहिए।
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार और विपक्ष चुनावी पारदर्शिता जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस करेंगे, या फिर राजनीति आरोप-प्रत्यारोप और वीडियो क्लिप की लड़ाई में उलझकर रह जाएगी? दिल्ली की सड़कों पर चल रहे विरोध के बीच जनता इसी सवाल का जवाब चाहती है।



