राष्ट्रीय / दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक टकराव अब सीधे चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल तक पहुंच गया है। Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को दावा किया कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद पर हैं, तब तक चुनाव में हिस्सा लेने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि उनके मुताबिक चुनावी नतीजे पहले से तय दिखाई दे रहे हैं। दिपके ने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में BJP कथित तौर पर ‘मोदी लहर’ के चरम दौर में भी जीत हासिल नहीं कर पाई, वहां अब जीत रही है और इसके पीछे उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया।
दिपके ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक के बाद ही यह पता चल पाएगा कि BJP वास्तव में कितनी सीटें जीतती है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक CEC पद पर बने रहेंगे, तब तक चुनाव में भागीदारी का भरोसा कायम नहीं हो सकता। हालांकि ये दिपके के राजनीतिक आरोप और दावे हैं, जिन्हें चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है।
SIR बना चुनावी भरोसे की लड़ाई का केंद्र
CJP नेता का यह हमला ऐसे समय हुआ है जब SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर पहले से राजनीतिक तूफान खड़ा है। चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की ओर से कथित तौर पर कई मौकों पर चुनावी सूची, मतदाता पंजीकरण और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
चुनाव आयोग ने हालांकि इन रिपोर्टों की उस व्याख्या को खारिज किया है जिसमें इसे आयोग के भीतर किसी बड़े संस्थागत मतभेद के रूप में पेश किया गया है। यानी एक तरफ विपक्ष और CJP जैसे संगठन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं कर रहा।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा विवाद
इसी बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाने या उनके कामकाज पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया। हालांकि अदालत ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत पहले रिकॉर्ड और सभी पक्षों का जवाब देखेगी। लेकिन साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी फैसले में कानून के मुताबिक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ पाया गया, तो उस फैसले के अमल पर बाद में रोक लगाई जा सकती है।
‘फॉर्म-6 किसने बदला?’—अदालत का सवाल
इस विवाद को और धार तब मिली जब सुप्रीम कोर्ट में Form-6 को लेकर भी सवाल उठा। मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले इस फॉर्म के ऑनलाइन संस्करण में SIR के दौरान अतिरिक्त जानकारी मांगे जाने को लेकर याचिका दाखिल हुई है।
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि किसी संशोधित Form-6 को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है और रिकॉर्ड सामने आने पर अदालत यह देखना चाहती है कि आखिर इसमें बदलाव किसने किया।
यानी एक तरफ सड़क पर यह सवाल उठ रहा है कि “CEC ज्ञानेश कुमार कब जाएंगे?”, दूसरी तरफ अदालत के सामने सवाल है—“Form-6 में बदलाव आखिर किसने किया?”
मुंबई से दिल्ली तक बढ़ता टकराव
दिपके का बयान ऐसे समय आया है जब CJP लगातार ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए विरोध के बाद संगठन के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की खबर भी सामने आई है। दिपके ने इसके बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही है और कहा है कि कितने भी मामले दर्ज हों, लोकतंत्र बचाने की लड़ाई जारी रहेगी।
अब तस्वीर साफ है—CEC पर राजनीतिक हमला, SIR पर सवाल, Form-6 पर सुप्रीम कोर्ट की निगाह और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर न्यायिक जांच।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को हटाने का आदेश नहीं दिया है और CJP के आरोप भी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। लेकिन विवाद जिस स्तर तक पहुंच चुका है, उसमें असली लड़ाई अब कुर्सी से ज्यादा चुनावी भरोसे की बनती जा रही है।



