राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर पार्टी का रुख बेहद स्पष्ट करते हुए कहा है कि कांग्रेस की तीन मांगें ‘नॉन-नेगोशिएबल’ हैं। खड़गे के मुताबिक पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, दूसरी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करना और तीसरी चुनावों में बैलेट पेपर की वापसी है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के साथी सड़कों पर उतर रहे हैं। खड़गे ने यह भी कहा कि जो सिविल सोसाइटी संगठन और युवा संगठन इन मुद्दों पर अलग-अलग जगहों पर संघर्ष कर रहे हैं, कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। इस बयान के साथ चुनाव आयोग, SIR और मतदान प्रणाली को लेकर चल रहा राजनीतिक संघर्ष अब और ज्यादा सीधा और टकरावपूर्ण होता दिखाई दे रहा है।
तीन मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं कांग्रेस
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस की मांगों को तीन स्पष्ट बिंदुओं में रखते हुए कहा कि पार्टी इन मुद्दों पर समझौता करने के मूड में नहीं है। उनके अनुसार ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR की वापसी और बैलेट पेपर से चुनाव कांग्रेस के लिए ऐसे मुद्दे हैं जिन पर पार्टी का रुख तय है। SIR को लेकर कांग्रेस और विपक्ष लगातार मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव और संभावित रूप से पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर नागरिक के सबसे बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार—मतदान—पर पड़ सकता है। इसी वजह से कांग्रेस इस मुद्दे को केवल चुनावी प्रक्रिया का तकनीकी मामला मानने के बजाय लोकतांत्रिक अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल से जोड़ रही है।
INDIA गठबंधन के साथ सड़क पर संघर्ष
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस के साथ INDIA गठबंधन के सहयोगी भी इन मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यानी यह विवाद अब सिर्फ कांग्रेस बनाम चुनाव आयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्ष इसे व्यापक राजनीतिक और लोकतांत्रिक लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने उन Civil Society Members और Youth Organisations के समर्थन की भी घोषणा की जो देश के अलग-अलग हिस्सों में इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसका राजनीतिक संदेश साफ है—कांग्रेस इस आंदोलन को केवल पार्टी का कार्यक्रम बनाकर नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे युवाओं, नागरिक संगठनों और विपक्षी दलों की साझा मुहिम के रूप में विस्तार देना चाहती है। आने वाले दिनों में अगर यह लामबंदी बढ़ती है तो चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।
बैलेट पेपर की मांग ने फिर गरम की चुनावी बहस
कांग्रेस की तीसरी मांग बैलेट पेपर से चुनाव कराने की है। यह मांग देश में चुनावों में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर विपक्ष की पुरानी आपत्तियों को फिर राजनीतिक केंद्र में ले आती है। कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिस पर आम मतदाता को पूरा भरोसा हो और जिसकी पारदर्शिता को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग व्यवस्था पर उठाए जाने वाले सवालों को लगातार खारिज करते रहे हैं। ऐसे में बैलेट पेपर की मांग आने वाले समय में चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती है।
महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी पर भी हमला
खड़गे ने दिल्ली में प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ हुई कथित पुलिस बदसलूकी को लेकर भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने इसे बेहद निंदनीय बताया। यह मामला उस समय सामने आया जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों और पुलिस के बीच तनाव की खबरें सामने आईं। कथित बदसलूकी के विरोध में पत्रकारों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया और संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। विपक्ष ने इस घटना को मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार से जोड़ते हुए सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाबदेही की मांग की है।
खड़गे का हमला—‘तानाशाह घबराया हुआ है’
अपने बयान में खड़गे ने केंद्र और भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि “तानाशाह बहुत घबराया हुआ है” और लोगों को “ध्यान भटकाने के एक और अध्याय” के लिए तैयार रहना चाहिए। यह बयान उस राजनीतिक माहौल के बीच आया है जब SIR, चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि इन मूल सवालों से ध्यान हटाने के लिए दूसरे मुद्दों को उछाला जा सकता है। हालांकि भाजपा की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
अब सड़क से अदालत तक बढ़ सकता है दबाव
SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सवाल उठ रहे हैं और इसी बीच विपक्ष का राजनीतिक आंदोलन सड़क पर तेज हो रहा है। कांग्रेस के तीनों मुद्दों को एक साथ रखने से साफ है कि पार्टी अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और मतदान की व्यवस्था को एक बड़े लोकतांत्रिक विमर्श के रूप में सामने रखना चाहती है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से लेकर SIR रद्द करने और बैलेट पेपर की वापसी तक, कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक मांगों की स्पष्ट सीमा तय कर दी है। अब असली सवाल यह है कि सरकार और चुनाव आयोग इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या आने वाले दिनों में विपक्ष का यह आंदोलन देशव्यापी राजनीतिक दबाव में बदलता है।



