राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 अक्टूबर 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में छात्र नेता नेहा बोरा की सक्रियता ने दिल्ली की सड़कों पर विरोध को नया चेहरा दे दिया है। रविवार को AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा एक बार फिर पुलिस के सामने डटी नजर आईं। जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे छात्रों को अशोक रोड पर भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोका गया तो नेहा बोरा बैरिकेड पर चढ़ गईं। पुलिस ने उन्हें रोक लिया और बाद में हिरासत में लेकर नरेला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया। कुछ देर बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
बैरिकेड के सामने नहीं झुकीं नेहा
रविवार को AISA कार्यकर्ताओं और छात्रों का यह लगातार तीसरा दिन था, जब वे जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग साफ थी—CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग।
अशोक रोड पर पुलिस ने रास्ता रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव के बीच नेहा बोरा ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। सामने पुलिस थी, रास्ता बंद था, लेकिन नेहा पीछे हटने के बजाय बैरिकेड पर चढ़ गईं।
उनकी यह तस्वीर आंदोलन की प्रतीक तस्वीरों में शामिल हो गई।
हिरासत, थाने और फिर रिहाई
पुलिस ने नेहा बोरा को हिरासत में लेकर नरेला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन पहुंचाया। इस दौरान उनके X अकाउंट से किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि उनका बैग और मोबाइल फोन उनके पास नहीं था और वकीलों को थाने भेजा जा रहा था।
बाद में पुलिस ने नेहा बोरा को रिहा कर दिया।
एक दिन पहले भी हिरासत
नेहा बोरा के लिए यह पहली पुलिस हिरासत नहीं थी। 3 अक्टूबर को भी उन्हें करीब 150 प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शनकारी पटेल चौक से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे।
उस दिन हिरासत में लिए गए लोगों में सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण भी शामिल थे।
आंदोलन में नेहा का बढ़ता कद
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध में नेहा बोरा लगातार सक्रिय हैं। छात्र आंदोलन के बीच उनका चेहरा अब प्रमुखता से सामने आ रहा है। रविवार को बैरिकेड पर चढ़कर आगे बढ़ने की कोशिश ने यह संदेश जरूर दिया कि पुलिस की बैरिकेडिंग आंदोलनकारियों के रास्ते को रोक सकती है, लेकिन विरोध की आवाज को रोकना आसान नहीं है।
AISA का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक जाने से रोका जा रहा है और पुलिस द्वारा छात्रों तथा महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार किया गया है।
हिरासत से निकलीं, लेकिन आंदोलन जारी
नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया, थाने ले जाया गया और फिर छोड़ दिया गया। लेकिन कुछ घंटों की यह पुलिस कार्रवाई आंदोलन को खत्म नहीं कर सकी।
बल्कि नेहा बोरा की हिरासत और बैरिकेड पर चढ़ने की तस्वीर ने उन्हें इस आंदोलन के सबसे दिखाई देने वाले छात्र चेहरों में ला खड़ा किया है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध के बीच अब सवाल सिर्फ जंतर-मंतर तक पहुंचने का नहीं है—सवाल यह भी है कि नेहा बोरा जैसे छात्र नेताओं को रोकने के लिए लगाई जा रही पुलिस की बैरिकेडिंग क्या आंदोलन की आवाज को और ज्यादा मुखर कर रही है?


