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ऐतिहासिक स्वर्णिम छलांग: एशियन गेम्स में प्रणवी उर्स ने रचा इतिहास, महिला गोल्फ में भारत को पहला व्यक्तिगत गोल्ड

स्पोर्ट्स | ABC NATIONAL NEWS | नागोया | 3 अक्टूबर 2026

भारत के खेल इतिहास में शनिवार का दिन एक नए अध्याय के साथ दर्ज हो गया। मैसूर की 23 वर्षीय प्रणवी उर्स ने एशियन गेम्स 2026 में महिला व्यक्तिगत गोल्फ स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। प्रणवी एशियन गेम्स में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बन गईं। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय महिला गोल्फ के लिए एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता है। प्रणवी ने अंतिम राउंड में तमाम दबावों और उतार-चढ़ाव के बावजूद अपनी बढ़त को बनाए रखा और महज एक स्ट्रोक के अंतर से गोल्ड अपने नाम किया। उनके स्वर्ण पदक के साथ भारतीय महिला टीम ने भी रजत पदक हासिल किया, यानी एक ही प्रतियोगिता में प्रणवी ने व्यक्तिगत इतिहास रचने के साथ टीम की पदक जीत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तीन स्ट्रोक की बढ़त, फिर तीसरे होल पर बड़ा झटका

प्रणवी के लिए अंतिम राउंड किसी आसान सफर की तरह नहीं था। वह तीन स्ट्रोक की बढ़त के साथ अंतिम दिन मैदान में उतरी थीं और उम्मीद थी कि वह इस बढ़त को संभालकर आराम से खिताब की ओर बढ़ेंगी। लेकिन तीसरे होल पर आया ट्रिपल बोगी उनके लिए बड़ा झटका था। एक ही होल पर तीन अतिरिक्त स्ट्रोक गंवाने के कारण उनकी रातोंरात बनाई गई तीन स्ट्रोक की बढ़त लगभग खत्म हो गई और मुकाबला अचानक बेहद रोमांचक हो गया। ऐसे समय में खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि मानसिक मजबूती होती है। प्रणवी ने दबाव में अपना धैर्य नहीं खोया और इसके बाद तीन शानदार बर्डी लगाकर मुकाबले में वापसी की। यही वह मोड़ था जहां से भारतीय गोल्फर ने फिर से अपनी स्थिति मजबूत करनी शुरू की और अंततः एक स्ट्रोक की बढ़त बचाकर ऐतिहासिक गोल्ड पर कब्जा कर लिया।

2002 के बाद भारत को व्यक्तिगत गोल्ड

प्रणवी का स्वर्ण पदक भारतीय गोल्फ के लिए भी बेहद खास है। एशियन गेम्स में भारत को पुरुष व्यक्तिगत गोल्फ का पिछला स्वर्ण पदक 2002 में शिव कपूर ने दिलाया था। इसके बाद व्यक्तिगत गोल्ड के लिए भारत को लंबा इंतजार करना पड़ा। अब 2026 में प्रणवी उर्स ने उस इंतजार को खत्म करते हुए महिला गोल्फ में देश का नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय खेल जगत में क्रिकेट, बैडमिंटन, कुश्ती, शूटिंग, बॉक्सिंग और एथलेटिक्स जैसे खेलों की तुलना में गोल्फ की चर्चा अक्सर कम होती है। प्रणवी की जीत ने यह दिखाया है कि भारतीय महिला खिलाड़ी उन खेलों में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर इतिहास बना सकती हैं, जहां भारत की पदक संभावनाओं को लेकर उतनी चर्चा नहीं होती।

टीम स्पर्धा में भी भारत की चमक

प्रणवी का व्यक्तिगत गोल्ड भारतीय महिला टीम के लिए भी बड़ी उपलब्धि लेकर आया। भारत ने महिला टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। यानी भारतीय महिला गोल्फ टीम ने सामूहिक प्रदर्शन के दम पर पोडियम पर जगह बनाई और प्रणवी ने व्यक्तिगत स्पर्धा में सबसे ऊंचा स्थान हासिल किया। यह प्रदर्शन भारतीय गोल्फ के लिए एक साथ दो संदेश लेकर आया है—एक तरफ व्यक्तिगत स्तर पर विश्वसनीयता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर टीम स्तर पर भी भारतीय महिला गोल्फर एशियाई प्रतिस्पर्धा में मजबूत चुनौती पेश कर रही हैं।

एक ट्रिपल बोगी ने बदला मैच, तीन बर्डी ने वापस दिलाई उम्मीद

प्रणवी की जीत की कहानी को अगर कुछ शब्दों में समझना हो तो यह गिरकर संभलने और दबाव में जीतने की कहानी है। अंतिम राउंड की शुरुआत में तीन स्ट्रोक की बढ़त के साथ उतरने वाली प्रणवी तीसरे होल पर ट्रिपल बोगी के बाद अचानक दबाव में आ गईं। ऐसी स्थिति में बढ़त खोने के बाद खिलाड़ी का आत्मविश्वास प्रभावित होना स्वाभाविक है। लेकिन प्रणवी ने अगले चरण में तीन बर्डी लगाकर मुकाबले का रुख फिर अपनी ओर मोड़ दिया। अंतिम चरण में उनके सामने चुनौती सिर्फ अच्छा स्कोर करना नहीं थी, बल्कि अपने आसपास मौजूद प्रतिस्पर्धियों को देखते हुए हर शॉट को बेहद सावधानी से खेलना था। अंततः उन्होंने अपनी न्यूनतम बढ़त को कायम रखा और एक स्ट्रोक से स्वर्ण पदक जीत लिया।

महिला गोल्फ के लिए बड़ी जीत

प्रणवी की उपलब्धि का महत्व सिर्फ एशियन गेम्स के पदक तक सीमित नहीं है। भारत में महिला गोल्फ को लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाने की कोशिश करनी पड़ी है। ऐसे में एशियन गेम्स जैसा बड़ा मंच और वहां व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतना युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम करेगा। प्रणवी ने जिस तरह दबाव के बीच वापसी की, वह उनके खेल कौशल के साथ-साथ उनकी मानसिक मजबूती का भी प्रमाण है।

भारत के लिए एशियन गेम्स 2026 में प्रणवी उर्स का गोल्ड एक ऐसा पदक बन गया है जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। 23 साल की इस भारतीय गोल्फर ने सिर्फ एक स्ट्रोक की बढ़त बचाकर स्वर्ण नहीं जीता, बल्कि भारतीय महिला गोल्फ के इतिहास में अपना नाम सबसे ऊपर लिख दिया।

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