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वोट चोरी के आरोपों पर घिरी BJP की सफाई, फेससेविंग में उतरे शिवराज; INDIA गठबंधन ने कसी कमर

राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026

चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच बुधवार को INDIA गठबंधन की बैठक ने सियासी माहौल और गरमा दिया। विपक्षी दलों ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों, SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर आगे की रणनीति तय की और साफ संकेत दिया कि अब यह लड़ाई सिर्फ संसद या अदालत तक सीमित नहीं रहने वाली। दूसरी तरफ, विपक्षी बैठक के तुरंत बाद भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान मैदान में उतरे और INDIA गठबंधन की एकजुटता तथा राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। उनके बयान को विपक्ष के हमले के जवाब और भाजपा की राजनीतिक स्थिति संभालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

INDIA गठबंधन की बैठक में कांग्रेस और सहयोगी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर अपनी रणनीति पर चर्चा की। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में गंभीर सवाल उठ रहे हैं और इसे लेकर विपक्ष को एकजुट होकर जनता के बीच जाना होगा। पार्टी ने ‘वोट चोरी’ के अपने आरोप को दोहराते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतदाता के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जा सकता।

बैठक का सबसे बड़ा संदेश विपक्ष की आगे की राजनीतिक रणनीति से जुड़ा रहा। INDIA गठबंधन के नेताओं के अनुसार, 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च निकाले जाएंगे। इसके बाद 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। विपक्षी नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगेंगे। पांच बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना भी सामने आई है और 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली प्रस्तावित है।

यानी विपक्ष ने बुधवार की बैठक में सिर्फ आरोप दोहराने के बजाय आने वाले दिनों का कार्यक्रम भी सामने रख दिया। SIR और मतदाता सूची के मुद्दे को लेकर सड़क से चुनाव आयोग और राष्ट्रपति भवन तक राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति दिखाई दे रही है। यही वजह है कि बैठक के बाद भाजपा की प्रतिक्रिया भी तेजी से सामने आई।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग समेत कई मुद्दे उठाए। कांग्रेस ने मांग की कि भविष्य के चुनावों में SIR से पहले की मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाए, बूथ और विधानसभा स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाई जाए और किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस, कारण और अपील का अधिकार दिया जाए।

कांग्रेस ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान बनाने और प्रशासनिक या दस्तावेजी कारणों से किसी व्यक्ति को मताधिकार से वंचित नहीं किए जाने की मांग भी रखी। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में संस्थागत जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया।

इसी बीच भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने INDIA गठबंधन पर निशाना साधा। चौहान ने दावा किया कि INDIA गठबंधन टूट रहा है और उसके नेताओं ने राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने अखिलेश यादव समेत कुछ नेताओं के बैठक में शामिल नहीं होने का हवाला देते हुए विपक्षी एकता पर सवाल उठाया।

शिवराज ने कांग्रेस के भीतर भी राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता ही राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। चौहान ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठकों में नेताओं से उन्हें नेता स्वीकार करने और उन पर भरोसा करने की अपील करते हैं।

शिवराज का यह बयान ऐसे समय आया जब INDIA गठबंधन अपनी बैठक में आंदोलन की अगली रूपरेखा तय कर चुका था। इसलिए भाजपा की प्रतिक्रिया का केंद्र विपक्ष के लगाए चुनावी आरोपों का सीधा जवाब देने के बजाय विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाना रहा। यह बयान भाजपा की ओर से विपक्ष के राजनीतिक अभियान का मुकाबला करने की रणनीति के रूप में सामने आया है।

वहीं, विपक्षी गठबंधन अपने अभियान को अगले चरण में ले जाने की तैयारी कर रहा है। 2 अक्टूबर से जिला स्तर पर मार्च और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक प्रस्तावित मार्च के जरिए विपक्ष SIR और मतदाता सूची के मुद्दे को सड़क पर ले जाने वाला है। इसके बाद राष्ट्रपति से मुलाकात और नवंबर में दिल्ली की रैली के जरिए इस अभियान को राष्ट्रीय मंच देने की तैयारी है।

बुधवार की बैठक के बाद तस्वीर दो अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियों की बनती है। INDIA गठबंधन चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकार और SIR को केंद्र में रखकर आंदोलन की जमीन तैयार कर रहा है, जबकि भाजपा की ओर से शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी एकता और राहुल गांधी के नेतृत्व को निशाना बनाकर पलटवार किया है।

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर जारी इस सियासी टकराव में फिलहाल विपक्ष ने अपने अगले कार्यक्रमों की घोषणा कर राजनीतिक पहल का एक स्पष्ट खाका सामने रखा है। भाजपा की ओर से आया शिवराज सिंह चौहान का जवाब इस राजनीतिक दबाव का मुकाबला करने की कोशिश के रूप में सामने आया है। अब नजर 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले विपक्ष के कार्यक्रमों और उनके जवाब में भाजपा की अगली रणनीति पर रहेगी।

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