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नीरू धांडा ने रचा इतिहास, एशियाई खेलों में महिला ट्रैप शूटिंग का पहला भारतीय गोल्ड

खेल | ABC NATIONAL NEWS | नागोया, जापान | 29 सितंबर 2026

भारत की नीरू धांडा ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया है। हरियाणा की 26 वर्षीय निशानेबाज ने मंगलवार को महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया एशियाई रिकॉर्ड कायम किया। नीरू ने फाइनल में 28 अंक हासिल किए, जबकि इससे पहले इस स्पर्धा का एशियाई रिकॉर्ड 24 अंक था। इस शानदार प्रदर्शन के साथ नीरू एशियाई खेलों में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बन गईं। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले किसी भारतीय महिला ट्रैप या स्कीट निशानेबाज ने एशियाई खेलों में व्यक्तिगत पदक तक नहीं जीता था। नीरू की जीत ने भारतीय शूटिंग के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है और नागोया में तिरंगे की शान बढ़ा दी है।

नीरू धांडा का स्वर्ण पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय महिला निशानेबाजी के लिए भी एक बड़ी सफलता है। फाइनल में नीरू ने दबाव के बीच बेहद सटीक निशाने लगाए और 28 के स्कोर के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। उनका प्रदर्शन इतना प्रभावशाली रहा कि उन्होंने मौजूदा महाद्वीपीय रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। इससे पहले जुलाई में इटली में हुए शॉटगन विश्व कप में नीरू ने ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर पहली भारतीय महिला बनने की उपलब्धि हासिल की थी। अब एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी शानदार फॉर्म को फिर साबित किया है। नीरू की लगातार बड़ी प्रतियोगिताओं में सफलता भारतीय निशानेबाजी के बढ़ते स्तर को भी रेखांकित करती है।

इससे पहले नीरू धांडा ने महिलाओं की ट्रैप टीम स्पर्धा में भी भारत को रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। नीरू के साथ आशिमा अहलावत और मनीषा कीर की भारतीय टीम ने कुल 328 अंक हासिल किए और दूसरे स्थान पर रही। चीन की टीम 346 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही। यानी नीरू ने एक ही एशियाई खेलों में पहले टीम स्पर्धा में रजत और उसके बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण जीतकर भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया। व्यक्तिगत स्वर्ण के साथ उन्होंने यह भी साबित किया कि टीम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन के बाद व्यक्तिगत मुकाबले के दबाव को संभालने की क्षमता भी उनके खेल में मौजूद है।

नीरू की सफलता के बीच भारतीय दल के लिए एशियाई खेलों का यह दिन कई और महत्वपूर्ण उपलब्धियां लेकर आया। भारतीय महिला स्क्वैश टीम ने ईरान को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। तान्वी खन्ना को पहला मुकाबला विपक्षी खिलाड़ी के रिटायर होने के बाद मिला, जबकि अनाहत सिंह ने फेरिश्तेह एघतेदारी को 3-0 से हराया। अनुभवी जोशना चिनप्पा ने भी अपने मुकाबले में 3-0 की जीत दर्ज कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। बॉक्सिंग में अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जगह बना ली, जबकि परवीन हुड्डा ने 65 किलोग्राम वर्ग के स्वर्ण पदक मुकाबले में प्रवेश किया। नरेंद्र बरवाल ने सेमीफाइनल में हार के बाद पदक पक्का किया।

भारतीय निशानेबाजी के लिए नीरू की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एशियाई खेलों में ट्रैप शूटिंग का स्तर बेहद प्रतिस्पर्धी माना जाता है। एक छोटे से अंतर से भी पदक का फैसला हो सकता है और फाइनल में हर शॉट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में 28 अंक का स्कोर बनाकर एशियाई रिकॉर्ड कायम करना नीरू के प्रदर्शन की मजबूती को दिखाता है। खास बात यह भी है कि नीरू की सफलता एक ऐसे दौर में आई है जब भारतीय शूटिंग दल लगातार विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीत रहा है। ट्रैप टीम स्पर्धा का रजत और व्यक्तिगत ट्रैप का स्वर्ण इस बात को और मजबूत करता है कि भारतीय निशानेबाज अलग-अलग प्रारूपों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

एशियाई खेलों में भारत के लिए यह दिन केवल शूटिंग तक सीमित नहीं रहा। तीरंदाजी में धीरज बोम्मदेवरा और नीरज चौहान पुरुष रिकर्व के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे, जबकि कैनो स्लालम में भारतीय खिलाड़ी सेमीफाइनल तक पहुंचे। बॉक्सिंग में अंकुश और परवीन ने फाइनल में जगह बनाकर भारत की पदक उम्मीदों को मजबूत किया। वहीं महिला स्क्वैश टीम की क्वार्टर फाइनल में एंट्री ने भी भारतीय अभियान को मजबूती दी। दूसरी ओर ट्रैक साइक्लिंग में भारतीय टीमें पदक मुकाबलों से बाहर हो गईं और सर्फिंग में किशोर कुमार अनबरासु का अभियान क्वार्टर फाइनल में समाप्त हुआ।

लेकिन इन तमाम मुकाबलों के बीच नीरू धांडा का ऐतिहासिक स्वर्ण सबसे बड़ी खबर बनकर उभरा। 26 वर्षीय इस निशानेबाज ने 28 अंकों के साथ न सिर्फ भारत को महिला व्यक्तिगत ट्रैप में पहला एशियाई खेल स्वर्ण दिलाया, बल्कि पुराना एशियाई रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। टीम स्पर्धा के रजत के बाद व्यक्तिगत स्वर्ण ने उनके एशियाई खेल अभियान को यादगार बना दिया। नागोया में भारतीय तिरंगे के साथ खड़ी नीरू धांडा की यह तस्वीर अब भारतीय निशानेबाजी के उन ऐतिहासिक क्षणों में शामिल हो गई है, जिन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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