बिजनेस/ टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 23 सितंबर 2026
चीन की सौर ऊर्जा और बैटरी इंडस्ट्री में एक साथ कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियां नई तकनीक और बड़े उत्पादन संयंत्रों पर पैसा लगा रही हैं, वहीं बैटरी कंपनियां लिथियम-आयन के साथ सोडियम-आयन तकनीक को भी बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इसी कड़ी में GCL Perovskite ने गीगावॉट स्तर की पेरोव्स्काइट मॉड्यूल उत्पादन लाइन पर पूरी उत्पादन प्रक्रिया का परीक्षण पूरा कर लिया है।
GCL Perovskite के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में कच्चे माल के आने से लेकर बड़े आकार के सोलर मॉड्यूल तैयार होने तक हर चरण को शामिल किया गया। कंपनी अब उत्पादन को स्थिर करने, मशीनों की लगातार काम करने की क्षमता सुधारने और उत्पादन में होने वाली सामग्री की बर्बादी कम करने पर ध्यान दे रही है। कंपनी का कहना है कि व्यावसायिक मॉड्यूल की आपूर्ति भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।
पेरोव्स्काइट सोलर तकनीक को भविष्य की सौर ऊर्जा तकनीकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। GCL Perovskite के 2 वर्ग मीटर के सिंगल-जंक्शन पेरोव्स्काइट मॉड्यूल को IEC 61215 प्रमाणन मिल चुका है। वहीं कंपनी के पेरोव्स्काइट-क्रिस्टलाइन सिलिकॉन टैंडम मॉड्यूल को IEC 61215 और IEC 61730 दोनों प्रमाणन मिले हैं। टैंडम तकनीक में अलग-अलग सौर सेल तकनीकों को मिलाकर ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जाती है।
इसी बीच JinkoSolar ने चीन के झेजियांग प्रांत के हाइनिंग स्थित अपने युआनहुआ बेस को अपग्रेड करने के लिए RMB 1.792 बिलियन के निवेश की योजना बनाई है। इस परियोजना में पुराने उपकरणों को हटाकर नई वेट-प्रोसेसिंग और पैटर्निंग मशीनें लगाई जाएंगी। कंपनी उत्पादन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए MES, SAP और AI आधारित उपकरणों का भी इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है।
इस अपग्रेड के दौरान मौजूदा 6 GW क्रिस्टलाइन सिलिकॉन सेल और 6 GW मॉड्यूल उत्पादन क्षमता से जुड़े पुराने उपकरण हटाए जाएंगे, जबकि सेल अनुसंधान और विकास का काम जारी रहेगा। परियोजना पूरी होने के बाद संयंत्र में हर साल 2.7 GW नई संरचना वाली उच्च दक्षता वाली सोलर सेल और 4 GW मॉड्यूल बनाने की योजना है। हालांकि सार्वजनिक पर्यावरणीय दस्तावेजों में नई सेल तकनीक का नाम स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है।
सोलर सेक्टर के साथ चीन में बैटरी तकनीक पर भी तेजी से काम चल रहा है। CBAK Energy ने सोडियम-आयन बैटरी के लिए लंबे समय की योजना सामने रखी है। कंपनी ने 12 GWh सालाना उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना बताई है, हालांकि यह योजना कई शर्तों पर आधारित है। प्रस्तावित उत्पादन लाइनें सोडियम-आयन और लिथियम-आयन दोनों तरह की सेल बनाने के लिए तैयार की जा सकती हैं।
कंपनी के आंतरिक परीक्षणों के अनुसार उसकी एक सोडियम-आयन सेल 15 मिनट में 90% तक चार्ज हो गई। लगातार 15C डिस्चार्ज परीक्षण के दौरान इसकी क्षमता 95% से ऊपर बनी रही। -40 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी सेल ने 25 डिग्री सेल्सियस की तुलना में 87.68% डिस्चार्ज क्षमता बरकरार रखी। कंपनी ने अपने परीक्षणों और विश्लेषण के आधार पर कुछ निर्धारित परिस्थितियों में कम से कम 10,000 चार्ज-डिस्चार्ज चक्र का अनुमान लगाया है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि यहां उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।
सोडियम-आयन बैटरी को लेकर कंपनी ने घरेलू और पोर्टेबल ऊर्जा भंडारण के साथ इलेक्ट्रिक दोपहिया और तीनपहिया वाहनों में भी नमूनों का परीक्षण शुरू किया है। बैकअप पावर और दूसरे इस्तेमाल के लिए भी इसका मूल्यांकन किया जा रहा है। अगर बड़े पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायिक परीक्षण सफल रहते हैं तो यह तकनीक ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में लिथियम-आयन के साथ एक और विकल्प के रूप में अपनी जगह बना सकती है।
ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में EVE Energy और China Railway Beijing Engineering Group ने भी रणनीतिक साझेदारी की है। दोनों कंपनियों ने अगले 3 वर्षों में कम से कम 5 GWh के ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट पर साथ काम करने की योजना बनाई है। इसमें नई ऊर्जा परियोजनाएं, ऊर्जा भंडारण और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम शामिल होंगे। EVE Energy बैटरी सेल और ऊर्जा भंडारण प्रणाली उपलब्ध कराएगी, जबकि रेलवे इंजीनियरिंग समूह अपनी परियोजना और बुनियादी ढांचा विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगा।
दूसरी तरफ Energy China ने 2026 के लिए 15 GWp सोलर मॉड्यूल की केंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह खरीद 6 पैकेज में होगी और इसमें TOPCon, HJT और BC तकनीक वाले मॉड्यूल शामिल हैं। 2025 में Energy China ने 17 GW की खरीद की थी, यानी इस साल प्रस्तावित मात्रा पिछले साल से 2 GW कम है। बोली जमा करने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर 2026 रखी गई है।
इन सभी घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो चीन की ऊर्जा इंडस्ट्री में केवल सोलर पैनलों की संख्या बढ़ाने पर जोर नहीं है, बल्कि तकनीक बदलने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक आधुनिक बनाने पर भी जोर दिखाई देता है। पेरोव्स्काइट मॉड्यूल, नई संरचना वाली सोलर सेल, सोडियम-आयन बैटरी और बड़े ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट एक ही तस्वीर के अलग-अलग हिस्से हैं। यानी चीन का अगला ऊर्जा दांव सिर्फ ज्यादा सोलर पैनल बनाने पर नहीं, बल्कि ज्यादा दक्ष सोलर तकनीक, नई पीढ़ी की बैटरी और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण को साथ आगे बढ़ाने पर है।



