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UN में AI पर बड़ी बैठक, DeepSeek और Moonshot को Security Council में मिला न्योता

अंतरराष्ट्रीय/ तकनीक | ABC NATIONAL NEWS | न्यूयॉर्क | 23 सितंबर 2026

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI अब सिर्फ तकनीक और कारोबार का विषय नहीं रह गया है। इसके बढ़ते प्रभाव और संभावित खतरों पर चर्चा अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंच चुकी है। बुधवार को न्यूयॉर्क में AI और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर होने वाली बैठक में चीन की प्रमुख AI कंपनियों DeepSeek और Moonshot के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। Reuters के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। बैठक में दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों के प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।

इस बैठक में OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन, Anthropic के प्रमुख डारियो अमोदेई और Hugging Face के प्रमुख क्लेमेंट डेलांग भी शामिल होने वाले हैं। बैठक की अध्यक्षता फ्रांस कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट पर इसे AI और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा के रूप में दर्ज किया गया है और इसे “अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने” के एजेंडे के तहत रखा गया है।

AI को Security Council के एजेंडे में औपचारिक रूप से शामिल किए जाने का यह दूसरा मौका है। इससे पहले 2023 में परिषद ने पहली बार AI पर चर्चा की थी। उस समय चीन ने AI के तेजी से आगे बढ़ने को लेकर चेतावनी देते हुए कहा था कि इस तकनीक को “बेकाबू घोड़ा” नहीं बनने देना चाहिए। अब 3 साल बाद AI की क्षमता और उससे जुड़े जोखिम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़े हो चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी AI के तेजी से विकास को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने पिछले सप्ताह दुनिया के नेताओं को चेतावनी दी थी कि AI जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे पैदा होने वाले जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। AI के इस्तेमाल से जुड़ी गलत जानकारी, साइबर सुरक्षा, निजता, डीपफेक और अन्य सुरक्षा चुनौतियां अब किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं हैं।

चीन ने भी हाल के दिनों में AI सुरक्षा को लेकर अपनी नीतियों में बदलाव किया है। 14 सितंबर को चीनी अधिकारियों ने AI Safety Governance Framework 3.0 जारी किया। इसमें AI से जुड़े सुरक्षा जोखिमों की श्रेणियों की समीक्षा और नए सिरे से वर्गीकरण किया गया है। साथ ही तकनीकी सुरक्षा उपायों और व्यापक शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझाव दिए गए हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय ने 15 सितंबर को कहा था कि चीन वैश्विक AI शासन में संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख भूमिका का समर्थन करता है और AI के बहुपक्षीय शासन में जिम्मेदारी के साथ हिस्सा ले रहा है। चीन का कहना है कि AI के विकास के साथ उसकी सुरक्षा को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए और तकनीक से जुड़े संभावित तथा अप्रत्यक्ष जोखिमों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

चीन के अनुसार AI को सुरक्षित, भरोसेमंद और नियंत्रित बनाए रखने के लिए कानून, नियम, नीतियां, तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े मानक और नैतिक दिशा-निर्देश विकसित किए जा रहे हैं। उसका कहना है कि AI के दुरुपयोग और गलत इस्तेमाल को रोकना वैश्विक AI व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

चीनी विशेषज्ञों के मुताबिक, DeepSeek और Moonshot जैसी कंपनियों को संयुक्त राष्ट्र की इस चर्चा में शामिल किया जाना इस बात का संकेत है कि AI पर वैश्विक बहस अब केवल अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रह सकती। AI के प्रभाव और जोखिम दुनिया के लगभग हर हिस्से तक पहुंच रहे हैं, इसलिए इसके लिए ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें अमेरिका, चीन, यूरोप के साथ विकासशील देशों की भी आवाज शामिल हो।

AI का एक बड़ा सवाल यह भी है कि विकासशील देशों को इस तकनीक का लाभ कैसे मिले। कई देशों के लिए AI केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का अवसर भी है। इसलिए वैश्विक नियम बनाते समय केवल जोखिमों पर रोक लगाने के बजाय तकनीकी विकास तक सभी देशों की पहुंच का सवाल भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों ने संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर ऐसी सार्वजनिक व्यवस्था विकसित करने का सुझाव भी दिया है, जिसमें AI से जुड़ी कमजोरियों की जानकारी साझा करने और डीपफेक की पहचान जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जा सके। इसके लिए चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे तकनीकी रूप से आगे देशों से विकासशील देशों को तकनीकी सहायता मिलने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।

इस पूरी बहस के बीच AI को लेकर एक बड़ा बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। कुछ साल पहले तक चर्चा मुख्य रूप से इस बात पर होती थी कि कौन सा देश AI की दौड़ में आगे है, लेकिन अब सवाल यह भी है कि इतनी शक्तिशाली तकनीक को सुरक्षित और जिम्मेदारी से कैसे इस्तेमाल किया जाए। DeepSeek और Moonshot की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भागीदारी इसी बदलती बहस का संकेत है—AI की दौड़ अब सिर्फ तकनीकी बढ़त की नहीं, बल्कि वैश्विक नियम, सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन की भी दौड़ बनती जा रही है।

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