अंतरराष्ट्रीय/ कूटनीति/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026
संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शुरू किए गए नए अंतरराष्ट्रीय मंच ‘Partners for Multilateralism’ यानी P4M की पहली बैठक में भारत भी शामिल होगा। विदेश मंत्री S. Jaishankar सोमवार को न्यूयॉर्क में होने वाली P4M बैठक में हिस्सा लेंगे। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्षों के बीच वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और बहुपक्षीय सहयोग को लेकर चर्चा तेज है।
P4M की स्थापना यूरोपीय संघ, ब्राजील, कनाडा और केन्या के नेताओं ने की है। इस मंच का उद्देश्य ऐसे देशों को साथ लाना है जो संयुक्त राष्ट्र आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था और सामूहिक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का समर्थन करते हैं। इसके संस्थापक देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
भारत का इस बैठक में शामिल होना उसकी बहुपक्षीय कूटनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र और उसके विभिन्न मंचों पर वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता की बात करता रहा है। खासतौर पर बदलती वैश्विक शक्ति-संरचना के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया को अधिक व्यापक बनाने की मांग भारत की विदेश नीति में प्रमुख मुद्दों में रही है।
P4M की बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान हो रही है। इस सप्ताह दुनिया के कई देशों के नेता और वरिष्ठ प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र महासभा में मौजूद हैं। ऐसे समय में नए मंच का सामने आना अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर चल रही बहस को नया आयाम देता है।
इस पहल की पृष्ठभूमि में दुनिया के कई हिस्सों में जारी संघर्ष भी महत्वपूर्ण हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और यूक्रेन युद्ध के कारण सुरक्षा, मानवीय सहायता, अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक संस्थाओं की भूमिका को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। ऐसे माहौल में P4M सामूहिक कार्रवाई और बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर देने की कोशिश कर रहा है।
P4M को ‘सुपरपावर’ राजनीति से अलग एक ऐसे मंच के रूप में पेश किया जा रहा है जहां विभिन्न देश संयुक्त राष्ट्र आधारित व्यवस्था के समर्थन में अपनी आवाज को मजबूत कर सकें। हालांकि यह कोई नया वैश्विक संगठन या संयुक्त राष्ट्र का वैकल्पिक संस्थान नहीं है। यह फिलहाल एक राजनीतिक और कूटनीतिक पहल के रूप में सामने आया है, जिसके जरिए इसके सदस्य देश साझा मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत के लिए इस मंच की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि नई दिल्ली लगातार एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की वकालत करती रही है जिसमें विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका अधिक मजबूत हो। भारत BRICS, G20 और अन्य बहुपक्षीय मंचों में भी वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और व्यापक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को उठाता रहा है।
P4M के संस्थापक देशों में यूरोपीय संघ, ब्राजील, कनाडा और केन्या का शामिल होना इस पहल की भौगोलिक विविधता को भी दिखाता है। इसमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका का प्रतिनिधित्व मौजूद है। भारत के शामिल होने से एशिया की एक प्रमुख शक्ति की भागीदारी भी इस मंच में जुड़ जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान होने वाली यह बैठक आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। अभी यह देखना होगा कि P4M केवल संयुक्त राष्ट्र सुधार और बहुपक्षीय व्यवस्था के समर्थन तक सीमित रहता है या आने वाले समय में संघर्षों, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी साझा पहल विकसित करता है।
भारत की P4M बैठक में भागीदारी ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति कई शक्ति-केंद्रों के बीच तेजी से बदल रही है। संयुक्त राष्ट्र आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक समस्याओं पर सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर देने वाला यह नया मंच आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका किस तरह विकसित करता है, इस पर अब दुनिया की नजर रहेगी।



