न्याय/ दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश के मामले में जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। हाईकोर्ट ने दोनों मामलों की सुनवाई अब 30 सितंबर 2026 के लिए तय कर दी है। दोनों ने 4 जुलाई 2026 के उस ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत अर्जियां खारिज कर दी गई थीं।
मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ के सामने होनी थी। लेकिन सोमवार को अभियोजन पक्ष की ओर से सुनवाई टालने का अनुरोध किया गया। अदालत को बताया गया कि राज्य की ओर से पेश होने वाले Additional Solicitor General एस.वी. राजू अस्वस्थ हैं। इसके बाद पीठ ने सुनवाई 30 सितंबर तक टाल दी।
उमर खालिद और शरजील इमाम दोनों ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिकाएं उस मामले से जुड़ी हैं जिसमें 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे बड़ी साजिश के आरोपों की जांच की जा रही है। दोनों की ओर से ट्रायल कोर्ट में जमानत मांगी गई थी, लेकिन 4 जुलाई 2026 को अदालत ने उनकी अर्जियां खारिज कर दी थीं।
अब हाईकोर्ट में चुनौती का अगला चरण 30 सितंबर से शुरू होगा। उस दिन अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकती है और जमानत याचिकाओं पर आगे की कार्यवाही तय कर सकती है। सोमवार की सुनवाई केवल अभियोजन पक्ष की ओर से मांगे गए स्थगन के कारण आगे नहीं बढ़ सकी।
यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिनमें फरवरी 2020 में हिंसा के दौरान कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियों ने दंगों के पीछे बड़ी साजिश का आरोप लगाया है और इसी मामले में कई लोगों के खिलाफ UAPA सहित विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। उमर खालिद और शरजील इमाम इस मामले में लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं।
इस मामले की सबसे अहम बात यह है कि फिलहाल हाईकोर्ट ने जमानत पर कोई फैसला नहीं दिया है। सोमवार की कार्यवाही में केवल सुनवाई को आगे बढ़ाया गया है। इसलिए 30 सितंबर की तारीख अब महत्वपूर्ण हो गई है। उस दिन अदालत अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट में पहुंची इन याचिकाओं पर अब यह देखा जाना है कि बचाव पक्ष किन आधारों पर जमानत की मांग करता है और अभियोजन पक्ष उसके विरोध में क्या दलील रखता है। हाईकोर्ट के सामने मामला केवल आरोपों की राजनीतिक व्याख्या का नहीं, बल्कि जमानत के कानूनी मानकों और मामले में उपलब्ध सामग्री का भी होगा।
उमर खालिद की गिरफ्तारी सितंबर 2020 में हुई थी, जबकि शरजील इमाम भी इसी मामले में लंबे समय से हिरासत में हैं। दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम न्यायिक फैसला अभी नहीं हुआ है। किसी आरोपी के खिलाफ आरोप लगाए जाना और अदालत द्वारा उसे दोषी ठहराया जाना दो अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।
अब 30 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि दोनों आरोपी ट्रायल कोर्ट के जमानत खारिज करने वाले आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से पिछली सुनवाई में दलीलें रखी जानी थीं, लेकिन सोमवार को राज्य की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ कानून अधिकारी की तबीयत खराब होने के कारण कार्यवाही स्थगित हो गई।
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत का मामला अब 30 सितंबर को फिर हाईकोर्ट के सामने होगा। सोमवार को कोई जमानत फैसला नहीं हुआ, सिर्फ सुनवाई टली है। अब आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों, मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और जमानत के कानूनी मानकों के आधार पर आगे बढ़ेगी।



