अंतरराष्ट्रीय/ टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 15 सितंबर 2026
एआई को लेकर दुनिया डरी, अमेरिका की राजनीति में फंसा समाधान
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो रही है। एक तरफ एआई कंपनियों के अंदर से ही ऐसी आवाजें उठ रही हैं कि बेहद शक्तिशाली एआई मॉडल को विकसित करने की रफ्तार पर नियंत्रण जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एआई से जुड़े गंभीर खतरों की चेतावनियों को ही खारिज कर दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि एआई के दुनिया पर कब्जा करने, इंसानियत को खत्म करने और दूसरी बुरी आशंकाओं की बातें “हौआ” हैं। उनका कहना है कि एआई को सिर्फ एक मजबूत और समझदार राष्ट्रपति के नियंत्रण की जरूरत है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर एआई की ताकत लगातार बढ़ रही है, तो उसके नियंत्रण की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
एंथ्रोपिक की चेतावनी ने छेड़ी बड़ी बहस
यह विवाद अचानक शुरू नहीं हुआ। एआई कंपनी एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक जैक क्लार्क ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि भविष्य में फ्रंटियर एआई विकसित करने वाली कंपनियों के लिए एक अनिवार्य ‘किल स्विच’ यानी जरूरत पड़ने पर एआई सिस्टम को पूरी तरह बंद करने की व्यवस्था जरूरी हो सकती है। इससे पहले एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई ने भी एआई विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत बताई थी। एआई की दुनिया के दूसरे बड़े नाम भी सुरक्षा को लेकर अलग-अलग स्तर पर चिंता जता चुके हैं। अब यही सवाल अमेरिकी राजनीति के सामने है कि अगर कोई बेहद शक्तिशाली एआई सिस्टम नियंत्रण से बाहर जाने लगे, तो उसे बंद करने का अधिकार किसके पास होगा?
ट्रंप के रुख से कानून बनने की राह और मुश्किल
अमेरिका में कोई नया संघीय एआई कानून तभी लागू हो सकता है जब वह प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों से पारित हो और राष्ट्रपति की मंजूरी मिले। इस समय रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत में है और ट्रंप नए सरकारी नियंत्रण यानी कड़े एआई सुरक्षा नियमों के पक्ष में दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में रिपब्लिकन सांसदों के लिए ट्रंप के खिलाफ जाकर किसी सख्त कानून का समर्थन करना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि अमेरिका में एआई सुरक्षा पर कानून बनाने की कोशिश राजनीतिक गतिरोध में फंसती दिखाई दे रही है।
संसद का समय भी खत्म होने वाला है
समस्या केवल राजनीतिक मतभेद की नहीं है, बल्कि समय भी तेजी से निकल रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा इस सप्ताह के अंत में अवकाश पर जाने वाली है और फिर नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ही उसका काम सामान्य रूप से आगे बढ़ेगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने मांग की है कि कांग्रेस को तब तक वॉशिंगटन नहीं छोड़ना चाहिए, जब तक अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के लिए एआई पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने रिपब्लिकन स्पीकर माइक जॉनसन को पत्र लिखकर अवकाश टालने की मांग भी की है। उनका कहना है कि एआई को कैसे नियंत्रित किया जाए, इस पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस तेजी से बदलती तकनीक पर कांग्रेस का कार्रवाई करना जरूरी है।
दिलचस्प बात—रिपब्लिकन खेमे में भी चिंता
हालांकि ट्रंप एआई सुरक्षा नियमों की जरूरत को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी कुछ नेता इस खतरे को पूरी तरह नजरअंदाज करने के पक्ष में नहीं हैं। रिपब्लिकन सांसद अन्ना पॉलिना लूना ने कांग्रेस का विशेष सत्र बुलाने की बात कही है।
सीनेट में रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून और डेमोक्रेट एमी क्लोबुशर मिलकर ऐसा विधेयक तैयार कर रहे हैं, जिसके तहत कुछ एआई कंपनियों को संघीय निगरानी के दायरे में लाया जा सकता है। थ्यून का तर्क है कि एआई की नई तकनीक और नवाचार को रोकना नहीं चाहिए, लेकिन ज्यादा खतरनाक क्षमताओं से पैदा होने वाले जोखिमों को कम करना भी जरूरी है।
एक बिल ऐसा भी, जिसमें सरकार एआई मॉडल रोक सकेगी
डेमोक्रेट सांसद लॉरी ट्राहन एक अलग द्विदलीय प्रस्ताव पर काम कर रही हैं। उनके प्रस्तावित फ्रंटियर एक्ट में सरकार को यह अधिकार देने की बात है कि अगर किसी एआई मॉडल से “तत्काल और विनाशकारी खतरा” पैदा होने की आशंका हो, तो उसके इस्तेमाल को रोका जा सके।
इस प्रस्ताव में एआई कंपनियों की स्वतंत्र सुरक्षा जांच यानी इंडिपेंडेंट ऑडिट की व्यवस्था भी शामिल है। ट्राहन का कहना है कि एआई धीरे-धीरे समाज के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करेगा, इसलिए अब इंतजार करने का समय नहीं है।
बर्नी सैंडर्स चाहते हैं और भी सख्त कदम
एआई नियंत्रण को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में सिर्फ एक तरह का प्रस्ताव नहीं है। कुछ नेता स्वतंत्र सुरक्षा जांच की बात कर रहे हैं, कुछ संघीय किल स्विच चाहते हैं, जबकि सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इससे भी ज्यादा कठोर विचार सामने रखा है। उनके प्रस्ताव में एआई डेटा सेंटरों पर अस्थायी रोक जैसी बात शामिल है।
इन अलग-अलग प्रस्तावों से एक बात साफ होती है—अमेरिका में एआई को लेकर चिंता मौजूद है, लेकिन एआई को नियंत्रित कैसे किया जाए, इस पर सहमति नहीं है।
ट्रंप के सलाहकार बोले—एआई को लेकर ‘पैनिक’ फैल रहा है
ट्रंप के प्रमुख एआई सलाहकारों में शामिल डेविड सैक्स ने एआई के अस्तित्व संबंधी खतरों की चेतावनियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह स्थिति एक तरह की घबराहट में बदल रही है। उनका तर्क है कि सबसे पहले एआई कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने उत्पादों को सुरक्षित बनाएं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर एआई कंपनियां खुद कह रही हैं कि किसी सिस्टम को नियंत्रित करना मुश्किल है, तो फिर उसे विकसित ही क्यों किया जाए?
लेकिन विशेषज्ञ पूछ रहे हैं—कंपनियां खुद को कैसे नियंत्रित करेंगी?
यहीं इस पूरी बहस का सबसे बड़ा विरोधाभास सामने आता है। एआई कंपनियां खुद सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने की बात करती हैं, लेकिन वही कंपनियां एआई को ज्यादा शक्तिशाली बनाने की दौड़ में भी शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कंपनियों को अपनी ही तकनीक की सुरक्षा का अंतिम निर्णायक बना देना पर्याप्त होगा?
वैंडरबिल्ट विश्वविद्यालय के एआई और टेक्नोलॉजी नीति विशेषज्ञ असद रमजानअली का कहना है कि कांग्रेस से कानून बनना बेहतर होगा, जिसमें सुरक्षा जांच और पक्षपात की जांच जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हों। लेकिन जब तक ऐसा कानून नहीं बनता, कंपनियों के पास खुद जिम्मेदारी निभाने की काफी स्वतंत्रता है।
क्या एआई कंपनियों की चेतावनियां भी रणनीति का हिस्सा हैं?
हर विशेषज्ञ एआई कंपनियों की चेतावनियों को पूरी तरह गंभीर नहीं मानता। तकनीकी क्षेत्र के अधिकारी ट्रेवर ट्रेना ने सवाल उठाया कि आम नागरिक ने अभी तक एआई में ऐसा क्या देखा है जो इतना डरावना हो। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि एआई कंपनियों के अधिकारी अपनी-अपनी तकनीक को सबसे शक्तिशाली साबित करने की होड़ में सुरक्षा को लेकर चेतावनियां दे रहे हों।
यानी एक तरफ असली खतरे की चिंता है, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी है कि क्या एआई कंपनियां सुरक्षा की बहस के जरिए अपनी तकनीक, बाजार और राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल—किल स्विच किसके हाथ में होगा?
अगर किसी दिन कोई बेहद शक्तिशाली एआई मॉडल ऐसा व्यवहार करने लगे जिसे इंसान नियंत्रित न कर पाए, तो उसे बंद करने का अधिकार किसके पास होगा? कंपनी के मालिक के पास? सरकार के पास? किसी स्वतंत्र नियामक के पास? या किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के पास?
यही वजह है कि ‘एआई किल स्विच’ की बहस सिर्फ तकनीक की बहस नहीं रह गई है। यह अब सत्ता, लोकतंत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा और इंसानी नियंत्रण की बहस बन चुकी है।
अमेरिका के सामने असली चुनौती—नवाचार भी, सुरक्षा भी
एआई को पूरी तरह रोकना शायद व्यावहारिक रास्ता नहीं है। इससे चिकित्सा, विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और अर्थव्यवस्था में बड़े फायदे हो सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ साइबर हमले, गलत सूचना, आर्थिक अस्थिरता और बेहद शक्तिशाली एआई सिस्टम के नियंत्रण से बाहर जाने जैसे जोखिमों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
इसीलिए बहस शायद “एआई चाहिए या नहीं” की नहीं होनी चाहिए। असली सवाल होना चाहिए—एआई कितना शक्तिशाली बनाया जाए, किसकी निगरानी में बनाया जाए और खतरा पैदा होने पर उसे रोकने का अधिकार किसके पास हो।
कांग्रेस में कानून अटका तो अगला कदम क्या होगा?
अमेरिका में फिलहाल कोई व्यापक और अनिवार्य संघीय एआई सुरक्षा कानून जल्द पास होता दिखाई नहीं दे रहा। ट्रंप प्रशासन स्वैच्छिक व्यवस्था और कंपनियों की खुद की जिम्मेदारी पर जोर दे रहा है, जबकि कई डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन सांसद संघीय निगरानी की जरूरत बता रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकार के पास एआई कंपनियों के आकलन की एक स्वैच्छिक व्यवस्था तो है, लेकिन उसकी पूरी रूपरेखा सार्वजनिक नहीं है। विशेषज्ञों ने इसी पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
अब फैसला सिर्फ तकनीक का नहीं, इंसानियत के नियंत्रण का है
एआई की रफ्तार लगातार बढ़ रही है, लेकिन कानून और राजनीतिक व्यवस्था उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रही। यही अंतर आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। तकनीक अगर कानून से तेज दौड़ेगी, तो एक समय ऐसा भी आ सकता है जब सरकारें खतरे के पैदा होने के बाद उसके नियम लिख रही हों।
अब सवाल डोनाल्ड ट्रंप से भी है और अमेरिकी कांग्रेस से भी—अगर एआई सचमुच सुरक्षित है तो सुरक्षा नियमों से डर क्यों? और अगर भविष्य में कोई एआई सिस्टम इंसानी नियंत्रण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, तो आज ही यह तय क्यों नहीं होना चाहिए कि उसका ‘किल स्विच’ किसके हाथ में होगा?



