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चीन में नागरिकों की आजादी पर नया शिकंजा! अब विदेश जाना भी सरकार की मंजूरी पर निर्भर, 3 साल तक लग सकता है यात्रा प्रतिबंध

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 15 सितंबर 2026

विदेश यात्रा पर चीन का नया नियंत्रण

चीन ने अपने नागरिकों के देश से बाहर जाने और विदेश यात्रा को लेकर नए और सख्त नियम लागू किए हैं। नए नियमों ने नागरिकों की विदेश यात्रा पर सरकारी नियंत्रण को और बढ़ा दिया है। नियमों के तहत अगर किसी चीनी नागरिक को राष्ट्रीय सुरक्षा या राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता है, तो उसे चीन से बाहर जाने से रोका जा सकता है। कुछ मामलों में यह रोक तीन साल तक रह सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका दायरा केवल सामान्य सुरक्षा मामलों तक सीमित नहीं है। नियमों में औद्योगिक और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है।

एआई और सेमीकंडक्टर से जुड़े लोगों पर भी नजर

चीन और अमेरिका के बीच एआई, सेमीकंडक्टर और दूसरी अत्याधुनिक तकनीकों में मुकाबला लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों पर विदेश यात्रा को लेकर नियंत्रण की खबरें खास महत्व रखती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले भी कुछ तकनीकी कंपनियों के अधिकारियों को चीन छोड़ने से रोका गया है। मार्च में मेटा द्वारा अधिग्रहित एआई कंपनी मैनस के सह-संस्थापकों को भी चीन से बाहर जाने से रोके जाने की खबर सामने आई थी।

अब नए नियमों के बाद सवाल यह है कि क्या चीन राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अपने तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को और ज्यादा नियंत्रित करेगा?

‘खतरनाक देशों’ की यात्रा से पहले सरकारी चेतावनी

नए नियमों में सीमा अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है। अधिकारियों को चीनी नागरिकों को उन देशों और क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह देने को कहा गया है जिन्हें चीन ‘उच्च जोखिम’ वाला मानता है।

यानी विदेश जाने का फैसला अब केवल पासपोर्ट और टिकट तक सीमित नहीं रह सकता। अगर सरकार किसी देश या क्षेत्र को जोखिम वाला मानती है, तो नागरिक को यात्रा से पहले ही चेतावनी दी जा सकती है।

सरकारी कर्मचारियों से शुरू हुआ था पासपोर्ट जमा कराने का दौर

रिपोर्ट के मुताबिक विदेश यात्रा पर नियंत्रण चीन में बिल्कुल नया नहीं है। पहले सरकारी कर्मचारियों पर ऐसे प्रतिबंध लगाए गए। बाद में सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों और फिर कुछ सामान्य नागरिकों तक इसका दायरा बढ़ा।

चीन के आन्हुई प्रांत के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी ने बीबीसी चीनी को बताया कि करीब 2018 में उनके कार्यालय ने कर्मचारियों के पासपोर्ट जमा करा लिए थे। उनके अनुसार, नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका पासपोर्ट पूर्व कार्यालय के पास है।

विदेश यात्रा के लिए कर्मचारियों को आवेदन करना और यात्रा का कारण बताना पड़ता था। उनके अनुसार रिश्तेदारों से मिलने जैसी यात्राओं को पर्यटन की तुलना में मंजूरी मिलने की संभावना ज्यादा रहती थी।

सरकार का तर्क—भ्रष्टाचार और विदेश भागने से रोकना

इन प्रतिबंधों के पीछे चीन में सरकारी अधिकारियों की ओर से भ्रष्टाचार, संपत्ति विदेश ले जाने और विदेश में अवैध गतिविधियों को रोकने का तर्क दिया जाता रहा है। एक पूर्व सरकारी कर्मचारी ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के मामले में इसका उद्देश्य सरकारी गोपनीय जानकारी के बाहर जाने को रोकना भी हो सकता है।

चीन के सरकारी ‘अफवाह खंडन’ मंच ने भी नए नियमों का बचाव करते हुए कहा है कि इनका उद्देश्य सामान्य नागरिकों की यात्रा रोकना नहीं है, बल्कि उच्च जोखिम वाले स्थानों और असामान्य यात्रा गतिविधियों से जुड़े मामलों में रोकथाम करना है। सरकार ने विदेश में ठगी, अवैध जुआ और दूसरे अपराधों में लोगों के फंसने को भी नियमों का कारण बताया है।

लेकिन असली परेशानी है—किसे रोका गया है, यह पता कैसे चले?

यहीं इस पूरी व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल उठता है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार चीनी नागरिक खुद आसानी से यह जांच नहीं कर सकते कि उन पर विदेश यात्रा प्रतिबंध लगा है या नहीं।

कई मामलों में अगर उन्हें पहले से लिखित या स्पष्ट मौखिक सूचना नहीं दी गई हो, तो उन्हें प्रतिबंध का पता तब चलता है जब वे पासपोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश करते हैं या हवाई अड्डे पर देश से बाहर जाने की कोशिश करते हैं।

यानी किसी नागरिक के लिए यह पहले से जानना मुश्किल हो सकता है कि सरकारी रिकॉर्ड में उसका नाम यात्रा प्रतिबंध वाली सूची में है या नहीं।

आंकड़े बता रहे हैं कि प्रतिबंध तेजी से बढ़े हैं

मानवाधिकार संगठन सेफगार्ड डिफेंडर्स द्वारा बीबीसी को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार चीन में विदेश यात्रा प्रतिबंधों में पिछले वर्षों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

चीन के सुप्रीम कोर्ट के डेटाबेस में 2016 में विदेश यात्रा प्रतिबंधों का उल्लेख करने वाले केवल 89 रिकॉर्ड मिले थे। यह संख्या 2025 में बढ़कर 1,88,760 रिकॉर्ड तक पहुंच गई।

2019 से 2025 के बीच उन दीवानी अदालत के फैसलों में भी भारी वृद्धि हुई जिनमें विदेश यात्रा पर रोक का उल्लेख था। इन मामलों का प्रतिशत करीब 0.23% से बढ़कर 7.3% हो गया। रिपोर्ट का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि सभी फैसले सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होते।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आलोचकों पर भी असर का डर

विशेषज्ञों को चिंता है कि नए नियमों का असर केवल भ्रष्टाचार या अपराध से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं रह सकता। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विदेशों में चीन की सरकार की आलोचना करने वाले लोगों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के एशियाई कानून विशेषज्ञ प्रोफेसर टॉम केलॉग ने बीबीसी चीनी से कहा कि बढ़ते यात्रा प्रतिबंध बेहद चिंताजनक हैं और इन्हें चीन में बढ़ते वैचारिक नियंत्रण से जोड़कर देखा जा सकता है।

उनके अनुसार विदेश में सरकार की आलोचना करने या मानवाधिकार गतिविधियों में शामिल होने वाले लोगों को भी यात्रा दस्तावेज या पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

हांगकांग प्रदर्शन में शामिल युवक का दावा

रिपोर्ट में ‘पिपी’ नाम से पहचान बताए गए 26 वर्षीय चीनी नागरिक का मामला भी सामने आया है। उसने दावा किया कि 2023 में उसका पासपोर्ट आवेदन खारिज कर दिया गया और उसे लगता है कि इसका संबंध 2019 के हांगकांग लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों में उसकी भागीदारी से था।

उसके अनुसार उसने उस समय हांगकांग के मीडिया संस्थानों से बातचीत की थी। मुख्यभूमि चीन लौटने के बाद सुरक्षा पुलिस ने उससे पूछताछ की। उसका दावा है कि एक आव्रजन अधिकारी ने उससे कहा था कि “हांगकांग मुद्दे” की वजह से उसे पासपोर्ट नहीं मिल सकता। हालांकि उसे इस बारे में कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया।

उसका सवाल बेहद गंभीर है—“मुझे नहीं पता कि मैं कभी चीन से बाहर जा पाऊंगा या नहीं।”

क्या चीन फिर पुराने दौर की ओर लौट रहा है?

चीन में आज विदेश यात्रा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सामान्य है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते प्रतिबंध पुराने दौर की याद दिलाते हैं। माओ के शासन के दौरान चीन लंबे समय तक दुनिया से काफी हद तक अलग रहा था। आर्थिक सुधारों और खुलापन बढ़ने के बाद 1990 के दशक में अंतरराष्ट्रीय यात्रा आम चीनी नागरिकों के जीवन का हिस्सा बनने लगी।

अब सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक नियंत्रण के नाम पर चीन फिर से नागरिकों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही पर ज्यादा नियंत्रण की ओर बढ़ रहा है?

राष्ट्रीय सुरक्षा या नागरिक स्वतंत्रता—सीमा कहां तय होगी?

राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण विषय है। भ्रष्ट अधिकारियों को विदेश भागने से रोकना, मानव तस्करी और ठगी से बचाना या संवेदनशील तकनीक की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी हो सकती है। लेकिन जब यात्रा प्रतिबंधों का दायरा बढ़ता है और नागरिकों को यह तक स्पष्ट रूप से पता नहीं होता कि उन पर रोक लगी है या नहीं, तब पारदर्शिता, कानूनी प्रक्रिया और नागरिक स्वतंत्रता के सवाल भी सामने आते हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय और आव्रजन अधिकारियों ने बीबीसी चीनी के सवालों पर इस रिपोर्ट के लिए प्रतिक्रिया नहीं दी।

अब दुनिया की नजर चीन की नई व्यवस्था पर

चीन पहले ही एआई, सेमीकंडक्टर और दूसरी रणनीतिक तकनीकों में अमेरिका से मुकाबले को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मान रहा है। ऐसे में विदेश यात्रा पर नए प्रतिबंधों का तकनीकी क्षेत्र तक पहुंचना आने वाले समय में बड़ा विषय बन सकता है।

क्या चीन राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अपने नागरिकों की विदेश यात्रा को जरूरत के मुताबिक नियंत्रित कर रहा है, या धीरे-धीरे ऐसी व्यवस्था बन रही है जिसमें सरकार यह तय करेगी कि कौन नागरिक कहां जा सकता है और किसे देश छोड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी?

और सबसे बड़ा सवाल—अगर किसी नागरिक पर विदेश यात्रा की रोक लगी है, तो क्या उसे पहले से स्पष्ट कारण, कानूनी आधार और उसे चुनौती देने का प्रभावी अधिकार नहीं मिलना चाहिए?

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