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बीजेपी ने जहां-जहां रोका, वहां-वहां गूंजी राहुल की आवाज! ‘छात्रों की गूंज’ अब युवाओं की सबसे बड़ी आवाज बनती जा रही

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | इंदौर | 13 सितंबर 2026

राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर इंदौर में सियासी घमासान

राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर इंदौर में शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ एक मैदान की अनुमति और 10 लाख रुपये के किराये तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह पहला मौका नहीं है जब बीजेपी ने राहुल गांधी के छात्रों और युवाओं से जुड़े कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की हो। कांग्रेस के अनुसार, अब तक जहां-जहां ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित हुआ, वहां किसी न किसी रूप में अड़चनें खड़ी की गईं, लेकिन इसके बावजूद कोटा, इलाहाबाद और पुणे में कार्यक्रमों को युवाओं का जबरदस्त समर्थन मिला और बड़ी संख्या में छात्र राहुल गांधी को सुनने पहुंचे। कांग्रेस का दावा है कि यह सिलसिला अब इंदौर में भी रुकने वाला नहीं है।

रोकने की कोशिश या बढ़ती लोकप्रियता?

कांग्रेस का राजनीतिक संदेश साफ है—जितना रोकने की कोशिश होगी, युवाओं की आवाज उतनी ही तेज होगी। पार्टी का दावा है कि ‘छात्रों की गूंज’ अब महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के युवाओं से सीधे संवाद का अभियान बन चुका है। पेपर लीक, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितता और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर राहुल गांधी छात्रों के बीच जाकर उनकी बात सुन रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार, इसी वजह से हर कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है।

कोटा से पुणे तक युवाओं का समर्थन

कांग्रेस का दावा है कि कोटा, इलाहाबाद और पुणे में हुए पिछले कार्यक्रमों को छात्रों और युवाओं से शानदार प्रतिक्रिया मिली। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में युवा पहुंचे और राहुल गांधी से सीधे संवाद किया। पार्टी इसे इस बात का संकेत मान रही है कि राहुल गांधी अब युवाओं के उन सवालों को राजनीतिक मंच दे रहे हैं, जिन्हें छात्र लंबे समय से उठाते रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि ‘छात्रों की गूंज’ अब युवाओं के बीच राहुल गांधी की सीधी पहुंच का बड़ा माध्यम बन गई है।

इंदौर में स्टेडियम से मैदान तक का सफर

इंदौर में राहुल गांधी का कार्यक्रम पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में प्रस्तावित था। कांग्रेस ने 29 अगस्त को अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन स्टेडियम में कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिल सकी। इसके बाद कार्यक्रम की तारीख 12 सितंबर से बढ़ाकर 19 सितंबर की गई और नया स्थान तलाशना पड़ा। आखिरकार रीजनल पार्क के सामने करीब 12 हजार वर्ग मीटर जमीन तीन दिनों के लिए अस्थायी पट्टे पर ली गई और इसके लिए कांग्रेस ने 10 लाख 8 हजार 175 रुपये जमा किए।

कांग्रेस बोली—राहुल के कार्यक्रम से सरकार क्यों घबरा रही है?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसी मुद्दे को लेकर मोहन यादव सरकार पर हमला बोला है। पटवारी का कहना है कि राहुल गांधी छात्रों से संवाद करने के लिए आ रहे हैं और इसके बावजूद मैदान के लिए उनसे भारी रकम ली गई। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के कार्यक्रमों के लिए मैदान उपलब्ध कराया जाता था और कांग्रेस के लोग उनके कार्यक्रम सुनने भी जाते थे। पटवारी ने यहां तक कहा कि अगर 10 लाख की जगह 20 लाख रुपये भी मांगे जाते तो कांग्रेस वह राशि भी जमा कर देती।

सरकार का जवाब—स्टेडियम के इस्तेमाल के नियम हैं

वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के इस्तेमाल को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पुराने आदेश लागू हैं। उनके अनुसार, स्टेडियम का इस्तेमाल खेल गतिविधियों और राज्य स्तरीय सरकारी कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है, जबकि राजनीतिक कार्यक्रम के लिए अनुमति देना नियमों के खिलाफ होगा। दूसरी तरफ कांग्रेस का सवाल है कि अगर यही नियम कारण था तो आवेदन के समय ही इसे स्पष्ट क्यों नहीं किया गया?

दस लाख का मैदान, लेकिन कांग्रेस का दावा डेढ़ लाख युवाओं का

नए मैदान को कांग्रेस ने ‘भारत जोड़ो मैदान’ नाम दिया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि कार्यक्रम के लिए अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा विद्यार्थियों का पंजीकरण हो चुका है। इंदौर के साथ आसपास के शहरों और इलाकों से भी युवाओं को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। अगर कांग्रेस का यह दावा जमीन पर उतरता है तो 19 सितंबर का कार्यक्रम मध्य प्रदेश में राहुल गांधी के सबसे बड़े छात्र संवाद कार्यक्रमों में शामिल हो सकता है।

Gen-Z के लिए राहुल के मंच पर संगीत और डांस

कार्यक्रम को सिर्फ राजनीतिक भाषण तक सीमित नहीं रखा गया है। राहुल गांधी के छात्रों से संवाद से पहले गायक राघव चैतन्य, इंदौर के रैपर लश-करी और वी. अनबीटेबल ड्रीम टीम प्रस्तुति देंगे। संगीत, रैप, हिप-हॉप और एक्रोबेटिक डांस के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस की रणनीति साफ दिखाई देती है—राहुल गांधी का मंच सीधे Gen-Z तक पहुंचे और छात्र सिर्फ भाषण सुनने वाले नहीं, बल्कि अपनी बात रखने वाले सहभागी बनें।

बारिश बनी नई चुनौती, लेकिन तैयारियां जारी

अब कार्यक्रम के सामने प्रशासनिक विवाद के साथ मौसम की चुनौती भी है। रीजनल पार्क के सामने का मैदान बारिश से गीला हो चुका है। काली मिट्टी के कारण जमीन को तैयार करने में समय लग रहा है। मौसम विभाग ने भी इस सप्ताह बारिश की संभावना जताई है। मंच, साउंड सिस्टम और लेजर लाइट जैसे महंगे उपकरण लगाने की तैयारी है। यानी कांग्रेस के सामने अब समय कम है और तैयारियों का दबाव ज्यादा।

32 जोन में युवाओं तक पहुंच रही NSUI

कांग्रेस ने इंदौर को 32 जोन में बांटकर युवाओं से संपर्क की रणनीति बनाई है। एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और पुस्तकालयों तक पहुंच रहे हैं। छात्रों से सिर्फ कार्यक्रम में आने की अपील नहीं की जा रही, बल्कि उनसे यह भी पूछा जा रहा है कि वे राहुल गांधी से किन मुद्दों पर सवाल करना चाहते हैं। यह कार्यक्रम को एकतरफा भाषण के बजाय संवाद का रूप देने की कोशिश है।

‘छात्रों की गूंज’ के बाद MP कांग्रेस में भी बड़ा बदलाव

इंदौर का कार्यक्रम कांग्रेस के संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में व्यापक बदलाव की तैयारी है। प्रदेश कार्यकारिणी में फिलहाल करीब 253 पदाधिकारी हैं, जिसे घटाकर लगभग 125 करने की योजना बताई जा रही है। कमजोर प्रदर्शन वाले नेताओं को हटाकर सक्रिय और नए चेहरों को आगे लाने की तैयारी है। कई जिलाध्यक्षों को भी बदले जाने की संभावना बताई गई है।

मिशन 2028 के लिए राहुल का कार्यक्रम बना बड़ा मंच

कांग्रेस के 19 विभाग और 34 प्रकोष्ठों की प्रदेश इकाइयों के पुनर्गठन की भी तैयारी है। यानी 19 सितंबर का कार्यक्रम केवल एक जनसभा नहीं है। कांग्रेस इसे युवाओं से जुड़ने, संगठन को मजबूत करने और मिशन 2028 के लिए जमीन तैयार करने के अवसर के तौर पर देख रही है।

बीजेपी का हमला—‘स्क्रिप्टेड भाषण मत देना’

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सरकार ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को रोकने की कोशिश नहीं की और उनके मध्य प्रदेश आने का विरोध भी नहीं है। हालांकि उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि वह मध्य प्रदेश में “स्क्रिप्टेड भाषण” न दें और ऐसी भाषा से बचें जिससे समाज में विभाजन या देश को नुकसान हो। भाजपा के दूसरे नेताओं ने भी कार्यक्रम की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए हैं।

लेकिन कांग्रेस का सवाल—अगर डर नहीं है तो इतनी अड़चनें क्यों?

यहीं से राजनीतिक विवाद और तीखा हो जाता है। कांग्रेस का कहना है कि अगर सरकार राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं है, तो अनुमति और मैदान को लेकर इतनी लंबी प्रक्रिया क्यों चली? अगर स्टेडियम के इस्तेमाल पर स्पष्ट नियम हैं तो उन्हें पहले ही क्यों नहीं बताया गया? और अगर नया मैदान उपलब्ध कराया गया है तो उसके लिए इतनी बड़ी राशि क्यों ली गई?

राहुल की राजनीति अब छात्रों के सवालों पर केंद्रित

कांग्रेस के लिए इस अभियान का सबसे बड़ा संदेश यही है कि राहुल गांधी युवाओं के उन सवालों को सामने ला रहे हैं जिनका सीधा संबंध उनके भविष्य से है। रोजगार मिलेगा या नहीं? परीक्षा में पेपर लीक क्यों होते हैं? सरकारी भर्ती में देरी क्यों होती है? अच्छी शिक्षा आम छात्र के लिए महंगी क्यों होती जा रही है? और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की गारंटी क्यों नहीं है? ‘छात्रों की गूंज’ इन्हीं सवालों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है।

अब इंदौर में होगी असली परीक्षा

19 सितंबर को अब यह देखना होगा कि कांग्रेस के डेढ़ लाख से ज्यादा पंजीकरण के दावे कितनी बड़ी वास्तविक भीड़ में बदलते हैं। क्या बारिश तैयारियों को प्रभावित करेगी? क्या मैदान समय पर तैयार हो जाएगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या इंदौर में भी वही तस्वीर दिखाई देगी, जिसका दावा कांग्रेस कोटा, इलाहाबाद और पुणे के कार्यक्रमों को लेकर कर रही है?

कांग्रेस का संदेश फिलहाल साफ है—मैदान बदला जा सकता है, लेकिन छात्रों की आवाज नहीं रोकी जा सकती। अगर राहुल गांधी को सुनने के लिए युवा लगातार बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, तो असली सवाल यह है कि सरकार इस आवाज को रोकने की कोशिश करेगी या उन सवालों का जवाब देगी जिन्हें देश का युवा लगातार पूछ रहा है?

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