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अमेरिका के आपत्तिजनक ‘मिस्टर सिंह’ विज्ञापन पर बवाल, कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/ वॉशिंग्टन | 13 सितंबर 2026

अमेरिका के विज्ञापन पर भारत में सियासी तूफान

अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग की ओर से जारी एक विज्ञापन को लेकर भारत में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इस विज्ञापन को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि विज्ञापन में पगड़ी पहने एक भारतीय व्यक्ति की एआई से बनाई गई तस्वीर का इस्तेमाल किया गया और उसके साथ “गेट ऑफ आवर रोड्स” तथा “सेल्फ-डिपोर्ट ऑर फाइंड आउट” जैसे संदेश दिए गए। कांग्रेस ने इसे भारतीयों के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए सवाल उठाया है कि भारत सरकार ने इस पर अब तक मजबूती से आपत्ति क्यों नहीं जताई।

‘मिस्टर सिंह’ को लेकर कांग्रेस का सवाल

विज्ञापन में “मिस्टर सिंह” को संबोधित करते हुए अमेरिका छोड़कर खुद लौटने का संदेश दिया गया था। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर किसी दूसरे देश की सरकारी संस्था इस तरह भारतीय पहचान और एक आम भारतीय नाम का इस्तेमाल करते हुए संदेश जारी करती है, तो भारत सरकार की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए? पार्टी ने इसे भारतीयों के प्रति अपमानजनक रवैये के तौर पर पेश किया है और मोदी सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब मांगा है।

कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के सामने भारत के हितों और भारतीय नागरिकों की गरिमा की मजबूती से रक्षा करने में असफल रही है। पार्टी का कहना है कि विदेश नीति में अच्छे संबंध रखना जरूरी है, लेकिन अच्छे संबंधों का मतलब यह नहीं हो सकता कि भारतीयों के सम्मान से जुड़े सवालों पर सरकार चुप रहे।

AI तस्वीर ने बढ़ाई चिंता

इस पूरे विवाद में एआई से तैयार तस्वीर का इस्तेमाल भी चर्चा का विषय बन गया है। एक पगड़ीधारी भारतीय की तस्वीर के साथ कठोर भाषा वाला संदेश देना कांग्रेस को खास तौर पर आपत्तिजनक लगा। एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि सरकारी विज्ञापनों में किसी समुदाय या राष्ट्रीय पहचान को दिखाने के लिए ऐसी तस्वीरों और संदेशों का इस्तेमाल किस संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए।

अमेरिका की आव्रजन नीति और भारतीय

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई और स्वैच्छिक वापसी पर ट्रंप प्रशासन का जोर लगातार चर्चा में है। लेकिन कांग्रेस का सवाल इससे आगे है। पार्टी पूछ रही है कि अमेरिका की घरेलू आव्रजन नीति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन क्या उसके प्रचार में भारतीय पहचान को इस तरह निशाना बनाना उचित है?

क्या भारत को कड़ा विरोध दर्ज कराना चाहिए?

कांग्रेस का मुख्य राजनीतिक सवाल यही है कि अगर भारत-अमेरिका के संबंध इतने महत्वपूर्ण हैं, तो क्या दोनों देशों के बीच दोस्ती का मतलब संवेदनशील मुद्दों पर चुप रहना है? पार्टी चाहती है कि सरकार बताए कि इस विज्ञापन को लेकर अमेरिका के सामने कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई या नहीं और भारतीय नागरिकों की गरिमा की रक्षा के लिए भारत ने क्या कदम उठाया।

विदेश नीति में दोस्ती के साथ सम्मान भी जरूरी

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग के गहरे संबंध हैं। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों में किसी भी विवाद को सावधानी से संभालना जरूरी है। लेकिन कांग्रेस का तर्क है कि मजबूत साझेदारी का आधार सिर्फ समझौते और रणनीतिक जरूरतें नहीं, बल्कि एक-दूसरे के नागरिकों और राष्ट्रीय सम्मान के प्रति सम्मान भी होना चाहिए।

अब मोदी सरकार से सीधा सवाल

क्या अमेरिका के इस विज्ञापन पर भारत सरकार ने कोई आपत्ति दर्ज कराई है? अगर कराई है तो उसका जवाब क्या मिला? और अगर अब तक कोई कड़ा विरोध नहीं हुआ, तो भारतीयों को संबोधित करने वाले इस तरह के संदेश पर मोदी सरकार चुप क्यों है?

कांग्रेस ने इस पूरे मामले को भारत के सम्मान और मोदी सरकार की विदेश नीति की मजबूती से जोड़ दिया है। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है—उसे यह बताना होगा कि अमेरिका के साथ दोस्ती अपनी जगह, लेकिन क्या भारतीयों के सम्मान के सवाल पर भी कोई समझौता हो सकता है?

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