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असम से तमिलनाडु भेजे जा रहे हाथियों पर बड़ा सवाल: सुप्रीम कोर्ट की समिति से ट्रांसफर रोकने की अपील

पर्यावरण/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | गुवाहाटी | 12 सितंबर 2026

चार हाथियों को भेजने की तैयारी, एक पांच साल की दुर्गा पहले ही मदुरै पहुंची

असम से तमिलनाडु हाथियों के ट्रांसफर को लेकर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पूर्वी असम के एक संरक्षण कार्यकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई-पावर्ड कमेटी से अपील की है कि असम से तमिलनाडु भेजे जा रहे चार बंदी हाथियों के स्थानांतरण को तुरंत रोका जाए। जानकारी के अनुसार, इन चार हाथियों को असम से तमिलनाडु ले जाने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं पांच साल की दुर्गा नाम की एक हथिनी को पहले ही तमिलनाडु के मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर पहुंचाया जा चुका है। ऐसे में अब सवाल केवल हाथियों को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने का नहीं, बल्कि उनके रहने, देखभाल और सुरक्षा को लेकर भी उठ रहा है।

संरक्षण कार्यकर्ता ने क्यों उठाई आपत्ति?

पूर्वी असम के संरक्षण कार्यकर्ता की मांग है कि जब तक इस पूरे स्थानांतरण की प्रक्रिया और उसके पीछे की परिस्थितियों की पूरी तरह समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक चारों हाथियों को असम से बाहर न भेजा जाए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समिति ने इस अपील पर क्या फैसला लिया है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ट्रांसफर रुक गया है। इतना जरूर है कि इस मामले ने बंदी हाथियों को एक राज्य से दूसरे राज्य भेजने की प्रक्रिया पर ध्यान खींच दिया है।

दुर्गा पहले ही पहुंच चुकी है मंदिर

इस मामले में सबसे खास बात पांच साल की दुर्गा है, जिसे पहले ही तमिलनाडु के मदुरै स्थित मीनाक्षी अम्मन मंदिर में स्थानांतरित किया जा चुका है। अब चार और हाथियों के ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही है। इससे यह सवाल उठता है कि इन हाथियों के लिए नया स्थान किस आधार पर तय किया गया, उनके स्वास्थ्य और व्यवहार की जांच कैसे हुई और क्या उनके लिए वहां ऐसी व्यवस्था मौजूद है जो उनकी जरूरतों के मुताबिक हो?

हाथी सिर्फ एक जानवर नहीं, बेहद संवेदनशील जीव है

हाथियों को लंबे समय तक देखभाल, पर्याप्त भोजन, पानी, जगह और उचित वातावरण की जरूरत होती है। बंदी हाथियों के मामले में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे जंगल में अपनी प्राकृतिक जिंदगी नहीं जी रहे होते। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में यात्रा, मौसम, भोजन, तनाव और नए वातावरण में ढलने जैसी कई बातें महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए किसी भी ट्रांसफर का सवाल केवल प्रशासनिक अनुमति का नहीं, बल्कि पशु कल्याण और संरक्षण का भी है।

असम और तमिलनाडु—दोनों जगह हाथियों का अलग माहौल

असम हाथियों की प्राकृतिक आबादी और वन क्षेत्र के लिए जाना जाता है, जबकि तमिलनाडु में मंदिरों और अन्य संस्थानों में बंदी हाथियों की मौजूदगी लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। ऐसे में एक संरक्षण कार्यकर्ता की आपत्ति यह सवाल उठाती है कि क्या हाथियों को उनके मौजूदा वातावरण से हटाकर दूसरे राज्य में भेजना हर मामले में उनके हित में है? या फिर कुछ परिस्थितियों में स्थानांतरण जरूरी भी हो सकता है? इसका जवाब हर हाथी की स्थिति, उसके स्वास्थ्य, उम्र, व्यवहार और भविष्य की देखभाल को देखकर ही दिया जा सकता है।

अब नजर सुप्रीम कोर्ट की हाई-पावर्ड कमेटी पर

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई-पावर्ड कमेटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। संरक्षण कार्यकर्ता ने इसी समिति से ट्रांसफर रोकने की अपील की है। अब देखना होगा कि समिति इस मामले में क्या जानकारी मांगती है और क्या वह हाथियों की स्थिति, स्थानांतरण की वजह तथा उनके नए ठिकाने पर उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा करती है। उपलब्ध रिपोर्ट में समिति के फैसले की जानकारी नहीं दी गई है।

सबसे बड़ा सवाल—हाथियों के हित में है यह फैसला?

असम से तमिलनाडु भेजे जा रहे इन हाथियों की कहानी एक बड़ा सवाल छोड़ती है—क्या ऐसे स्थानांतरण में सबसे पहले हाथियों के हित को रखा जा रहा है? अगर हां, तो उनके स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति, रहने की जगह और लंबे समय की देखभाल की पूरी व्यवस्था क्या है? और अगर किसी हाथी को एक राज्य से दूसरे राज्य भेजा जा रहा है, तो क्या उसके लिए वैज्ञानिक और पशु-कल्याण आधारित प्रक्रिया पूरी की गई है?

चार हाथियों का ट्रांसफर अभी प्रक्रिया में है और दुर्गा पहले ही मदुरै पहुंच चुकी है। अब असली निगाह सुप्रीम कोर्ट की हाई-पावर्ड कमेटी पर है—क्या वह इस अपील पर हस्तक्षेप करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि फैसला किसी प्रशासनिक जरूरत से नहीं, बल्कि हाथियों के वास्तविक हित को ध्यान में रखकर हो?

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