राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 अगस्त 2026
‘Cockroach Janta Party’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। डिपके ने कहा कि सत्ता में 12 साल रहने के बाद BJP को ऐसा लगने लगा है कि वह RSS से बड़ी हो गई है, जबकि वास्तविकता यह है कि BJP सत्ता में RSS के कारण है। उन्होंने BJP से RSS प्रमुख मोहन भागवत की बात सुनने की अपील की।
डिपके ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह शुरुआत से यह कहते रहे हैं कि BJP को मोहन भागवत की बात सुननी चाहिए। उनके मुताबिक, भागवत समावेशिता और सामाजिक सद्भाव की बात करते हैं, लेकिन सरकार की ओर से विरोध करने वाले युवाओं के लिए अलग तरह की भाषा इस्तेमाल की जा रही है।
‘BJP को लगता है वह RSS से बड़ी हो गई’
डिपके ने कहा कि BJP के पास पिछले 12 वर्षों से सत्ता है और उसके पास कई सरकारी एजेंसियां भी हैं। इसके बावजूद पार्टी को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसकी राजनीतिक यात्रा में RSS की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उनके अनुसार, “BJP को कम से कम मोहन भागवत की बात सुननी चाहिए, जो उनके मार्गदर्शक हैं। वे सत्ता में RSS की वजह से हैं।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। भागवत ने न्यूयॉर्क में हिंदू समाज और मुसलमानों को लेकर कथित तौर पर कहा था कि यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।
Gen Z प्रदर्शन पर भी उठाया सवाल
अभिजीत डिपके ने Gen Z के विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी BJP और सरकार के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत पहले यह कह चुके हैं कि प्रदर्शन कर रहे Gen Z युवाओं को ‘राष्ट्र-विरोधी’ नहीं कहा जाना चाहिए।
डिपके के मुताबिक, इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे भागवत की सोच से अलग बताते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री RSS प्रमुख की बात नहीं सुन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जहां RSS प्रमुख कथित तौर पर समावेशिता और बच्चों के प्रति सम्मान की बात करते हैं, वहीं प्रधानमंत्री द्वारा ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाना “अच्छा नहीं लगता।”
सोनम वांगचुक के बयान पर भी सफाई
CJP नेता से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के उस बयान के बारे में भी सवाल किया गया जिसमें उन्होंने CJP के नेताओं के राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने की बात कही थी और कहा था कि वे “संत नहीं हैं।”
डिपके ने वांगचुक के बयान को अलग संदर्भ में पेश किए जाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक से पूछा गया था कि CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा है या नहीं।
डिपके के अनुसार, वांगचुक ने दोनों को प्रतिभाशाली और अच्छे नेता बताया तथा कहा कि अब तक उन पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है और उन्होंने आंदोलन ईमानदारी से चलाया है।
हालांकि, जब वांगचुक से पूछा गया कि भविष्य में इन नेताओं की क्या भूमिका हो सकती है, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि भविष्य में कोई व्यक्ति क्या करेगा, इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
‘किसी पर आंख बंद करके भरोसा न करें’
डिपके ने इसी संदर्भ में कहा कि वह खुद भी लोगों से बार-बार कहते हैं कि किसी पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि कोई व्यक्ति भविष्य में क्या करेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा होना अपने आप में गलत नहीं है। वांगचुक ने भी अपने इंटरव्यू में कथित तौर पर यही बात कही थी।
अभिजीत डिपके के बयान से एक तरफ CJP की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चा तेज हुई है, वहीं दूसरी तरफ BJP और RSS के संबंधों तथा मोहन भागवत के हालिया बयानों की राजनीतिक व्याख्या को लेकर बहस और बढ़ सकती है। फिलहाल डिपके की टिप्पणियां उनका राजनीतिक आकलन और आरोप हैं; BJP या RSS की ओर से इन आरोपों पर इस रिपोर्ट में कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया सामने नहीं दी गई है।




