Home » National » 57 लाख सक्रिय ग्रामीण कामगारों का e-KYC अभी बाकी, नई रोजगार योजना में अटकी बड़ी संख्या

57 लाख सक्रिय ग्रामीण कामगारों का e-KYC अभी बाकी, नई रोजगार योजना में अटकी बड़ी संख्या

राष्ट्रीय/ रोजगार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 अगस्त 2026

केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G के लागू होने के करीब दो महीने बाद भी लाखों ग्रामीण कामगारों का e-KYC पूरा नहीं हो पाया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पंजीकृत कामगारों में e-KYC सत्यापन की दर लगभग 71 प्रतिशत तक पहुंची है, यानी बड़ी संख्या में ऐसे सक्रिय कामगार अभी भी सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 57 लाख सक्रिय कामगार ऐसे हैं जिनका e-KYC अभी लंबित है। यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में काम पाने के लिए श्रमिकों की पहचान और पात्रता से जुड़ी प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है। केंद्र सरकार की ओर से पहले यह स्पष्ट किया गया था कि जिन कामगारों के जॉब कार्ड MGNREGS के तहत e-KYC से सत्यापित हो चुके हैं, वे नई योजना के तहत रोजगार हासिल करने के पात्र होंगे। साथ ही सरकार ने यह भी आश्वासन दिया था कि पहले से e-KYC सत्यापित जॉब कार्ड तब तक वैध बने रहेंगे, जब तक नए Gramin Rozgar Guarantee Cards जारी नहीं हो जाते। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सक्रिय श्रमिकों का e-KYC लंबित रहना ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौती बन गया है।

71 प्रतिशत कामगारों का हुआ e-KYC सत्यापन

VB-G RAM G के तहत पंजीकृत ग्रामीण कामगारों में अब तक करीब 71 प्रतिशत का e-KYC सत्यापन पूरा होने की जानकारी सामने आई है। इसका अर्थ है कि लगभग तीन-चौथाई कामगार इस प्रक्रिया से गुजर चुके हैं, लेकिन शेष आबादी अभी भी सत्यापन की प्रतीक्षा में है। करीब 57 लाख सक्रिय कामगारों का e-KYC लंबित होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये वे लोग हैं जो ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और रोजगार की जरूरत रखते हैं। यदि किसी कामगार का सत्यापन समय पर पूरा नहीं होता है तो उसके लिए नई व्यवस्था के तहत रोजगार हासिल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि केंद्र ने पहले ही यह स्पष्ट किया था कि MGNREGS के तहत e-KYC सत्यापित जॉब कार्ड नए रोजगार कार्यक्रम में भी मान्य रहेंगे। इससे ऐसे श्रमिकों को तत्काल किसी नए सत्यापन के कारण रोजगार से बाहर होने की आशंका कम होती है, लेकिन जिन लोगों का सत्यापन अभी तक नहीं हुआ है, उनके लिए प्रक्रिया पूरी कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बनी हुई है।

ALSO READ  जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट आज लोकसभा में होगी पेश, कैश बरामदगी विवाद पर बढ़ेगा दबाव

राज्यों की देरी से बढ़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार राज्यों को e-KYC सत्यापन पूरा करने के लिए कई समय-सीमाएं दी गई थीं, लेकिन इन समय-सीमाओं को बार-बार पूरा नहीं किया जा सका। ग्रामीण रोजगार योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन बड़े पैमाने पर राज्य और स्थानीय प्रशासन की मशीनरी पर निर्भर करता है। ऐसे में लाखों कामगारों का सत्यापन लंबित रहने के पीछे प्रशासनिक क्षमता, दस्तावेजों की उपलब्धता, तकनीकी समस्याएं या स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी करने में आई दिक्कतें जैसे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि इन कारणों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सबसे बड़ी बाधा कहां रही। केंद्र की ओर से समय-सीमा तय किए जाने के बावजूद राज्यों द्वारा लक्ष्य पूरा नहीं कर पाने से अब यह सवाल उठ रहा है कि शेष कामगारों का e-KYC कितनी जल्दी पूरा कराया जाएगा और उन्हें नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था का लाभ निर्बाध रूप से कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

MGNREGS और VB-G RAM G के रोजगार आंकड़े भी महत्वपूर्ण

57 लाख सक्रिय कामगारों का e-KYC लंबित होना तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब इसकी तुलना MGNREGS और VB-G RAM G के तहत जुलाई में रोजगार सृजन से की जाती है। नई योजना के शुरुआती महीनों में रोजगार की वास्तविक मांग और उपलब्धता को लेकर आंकड़े यह समझने में मदद कर सकते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में योजना का प्रभाव किस स्तर तक पहुंच रहा है। ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार केवल आय का साधन नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए नई योजना में शामिल होने वाले कामगारों की पहचान और सत्यापन प्रक्रिया जितनी तेज और पारदर्शी होगी, रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था उतनी ही प्रभावी ढंग से काम कर सकेगी। सरकार के सामने अब चुनौती केवल नई योजना को लागू करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि पात्र और सक्रिय कामगार तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से रोजगार के अवसर से वंचित न रह जाएं।

ALSO READ  गांधी की हत्या, पटेल की पीड़ा और राष्ट्र की आत्मा: जब सरदार ने निजी दुःख से ऊपर रखी देश की एकता

पुराने सत्यापित जॉब कार्डों को लेकर सरकार का आश्वासन

केंद्र सरकार ने पहले यह आश्वासन दिया था कि MGNREGS के तहत पहले से e-KYC सत्यापित जॉब कार्ड नए Gramin Rozgar Guarantee Cards जारी होने तक वैध रहेंगे। यह प्रावधान उन श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने पहले ही आवश्यक सत्यापन पूरा कर लिया है। इसका उद्देश्य पुरानी और नई व्यवस्था के बीच संक्रमण के दौरान कामगारों को अनावश्यक प्रशासनिक परेशानी से बचाना है। हालांकि 57 लाख सक्रिय कामगारों का e-KYC लंबित रहना बताता है कि संक्रमण की प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि लंबित सत्यापन जल्द से जल्द पूरा हो और कामगारों को अपनी पात्रता या रोजगार के अधिकार को लेकर अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

57 लाख कामगारों के सत्यापन पर टिकी नजर

VB-G RAM G के तहत e-KYC की 71 प्रतिशत सत्यापन दर के बावजूद करीब 57 लाख सक्रिय कामगारों का लंबित रहना सरकार और राज्यों के लिए एक बड़ा प्रशासनिक लक्ष्य सामने रखता है। आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि शेष कामगारों का सत्यापन कब तक पूरा किया जाता है और क्या उन्हें नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के तहत बिना किसी बाधा के काम मिल पाता है। राज्यों द्वारा पहले कई समय-सीमाएं चूकने के बाद अब प्रक्रिया को तेजी देने की जरूरत और बढ़ गई है। ग्रामीण रोजगार योजना की सफलता केवल नए प्रावधानों और योजनाओं पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि पात्र कामगारों तक रोजगार का लाभ समय पर और बिना अनावश्यक प्रशासनिक अड़चन के पहुंचता है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted