राष्ट्रीय/ महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | ठाणे/मुंबई | 29 अगस्त 2026
नवी मुंबई में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े फॉर्म की कथित अनधिकृत फोटोकॉपी का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पुलिस के अनुसार, एक स्थानीय BJP कार्यकर्ता को 27 अगस्त को नवी मुंबई के एक फोटो कॉपी सेंटर पर 3,400 से अधिक SIR फॉर्म, जिनमें मतदाताओं से संबंधित विवरण मौजूद थे, की फोटोकॉपी करते हुए पकड़ा गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने संबंधित प्रक्रिया में भूमिका निभाने वाले पांच बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को निलंबित कर दिया है। मामले में 28 अगस्त की सुबह खारघर पुलिस ने केस दर्ज किया। घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक तनाव भी बढ़ गया और शिवसेना (UBT) तथा BJP कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई। अब जांच का केंद्र यह पता लगाने पर है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं से जुड़े फॉर्म फोटो कॉपी कराने की अनुमति किसने दी, इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और क्या मतदाताओं की निजी जानकारी से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ।
3,400 से अधिक SIR फॉर्म की फोटोकॉपी का मामला
पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान सूरज पाटील के रूप में हुई है। उसे 27 अगस्त को नवी मुंबई के एक दुकान पर SIR फॉर्म की फोटोकॉपी करते हुए पकड़े जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि उसके पास बड़ी संख्या में ऐसे फॉर्म थे, जिनमें मतदाताओं से जुड़ी जानकारी दर्ज थी। SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और सत्यापित करना होता है, इसलिए इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म और उनमें दर्ज जानकारी का महत्व बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में 3,400 से अधिक फॉर्म की फोटोकॉपी का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लिया। पुलिस ने 28 अगस्त की सुबह मामला दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। हालांकि, फॉर्म की फोटोकॉपी क्यों कराई जा रही थी, किसके निर्देश पर यह काम हुआ और फोटोकॉपी की गई प्रतियों का आगे क्या किया जाना था, इसका अंतिम उत्तर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पांच BLOs पर भी हुई कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की कार्रवाई केवल कथित तौर पर फॉर्म की फोटोकॉपी करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रही। मामले के बाद पांच बूथ लेवल ऑफिसर्स को निलंबित कर दिया गया है। BLO चुनावी प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मतदाता सूची से संबंधित कार्यों में उनकी जिम्मेदारियां होती हैं। इसलिए उनके निलंबन से यह संकेत मिलता है कि प्रशासन दस्तावेजों के रखरखाव और उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया की भी जांच कर रहा है। अब यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित SIR फॉर्म BLOs के पास किस प्रक्रिया के तहत पहुंचे, उन्हें किसी अन्य व्यक्ति के हाथ में कैसे दिया गया और उनकी फोटोकॉपी के लिए अनुमति या निर्देश किस स्तर से प्राप्त हुए थे। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या लापरवाही की पुष्टि होती है तो आगे और कार्रवाई भी हो सकती है।
मतदाताओं की जानकारी को लेकर उठे सवाल
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा से जुड़ा है। SIR फॉर्म में मतदाताओं से संबंधित विभिन्न विवरण दर्ज होते हैं और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए ऐसे दस्तावेजों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। हजारों फॉर्म की प्रतियां बनाए जाने की घटना ने इस बात को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं कि इन दस्तावेजों तक किस-किस की पहुंच थी और उनकी प्रतियां किस उद्देश्य से तैयार की गईं। हालांकि केवल फोटोकॉपी किए जाने की घटना से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मतदाता डेटा का दुरुपयोग हुआ ही है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन को फोटोकॉपी की गई प्रतियों, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका, दस्तावेजों के स्रोत और उनके संभावित इस्तेमाल की जांच करनी होगी। जांच से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में केवल प्रशासनिक लापरवाही हुई या किसी नियम का जानबूझकर उल्लंघन किया गया।
शिवसेना (UBT) और BJP कार्यकर्ताओं में टकराव
SIR फॉर्म की फोटोकॉपी का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद भी भड़क गया। घटना ने शिवसेना (UBT) और BJP कार्यकर्ताओं के बीच टकराव को जन्म दिया। मतदाता सूची से जुड़े किसी भी विवाद का राजनीतिक असर स्वाभाविक रूप से व्यापक हो सकता है, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। विपक्षी कार्यकर्ताओं की ओर से इस मामले को गंभीर बताते हुए सवाल उठाए जाने की संभावना है, जबकि BJP से जुड़े लोगों का पक्ष भी जांच में महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल यह जरूरी है कि राजनीतिक आरोपों से अलग पूरे मामले की कानूनी और प्रशासनिक जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़े।
जांच से खुलेगा पूरा राज
नवी मुंबई का यह मामला अब पुलिस और चुनावी प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण जांच का विषय बन गया है। एक तरफ 3,400 से अधिक SIR फॉर्म की फोटोकॉपी किए जाने की घटना है, वहीं दूसरी तरफ पांच BLOs का निलंबन बताता है कि दस्तावेजों की पहुंच और प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि सूरज पाटील को ये फॉर्म कहां से मिले, फोटोकॉपी किस उद्देश्य से की जा रही थी और तैयार की गई प्रतियां कहां गईं। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि इस पूरे घटनाक्रम में किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल मामला दर्ज हो चुका है और जांच आगे बढ़ रही है। मतदाता सूची की पारदर्शिता और मतदाताओं की जानकारी की सुरक्षा से जुड़े इस विवाद में अब सबकी नजर पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।




