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पंजाबी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंजीत कौर की मौत, हमले के करीब दो महीने बाद इलाज के दौरान तोड़ा दम

राष्ट्रीय / अपराध / पंजाब | ABC NATIONAL NEWS | चंडीगढ़ | 29 अगस्त 2026

पंजाबी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंजीत कौर की मौत ने एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाले आपराधिक मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। 28 वर्षीय मंजीत कौर ने चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में इलाज के दौरान 26 अगस्त 2026 को दम तोड़ दिया। पुलिस ने शनिवार, 29 अगस्त को उनकी मौत की पुष्टि की। मंजीत करीब दो महीने तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रहीं। आरोप है कि 3 जुलाई को उनके दो परिचितों ने उन्हें बुलाया और इसके बाद कथित तौर पर उनका अपहरण कर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई तथा उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल मंजीत का लंबे समय तक इलाज चला, लेकिन चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनकी मौत के बाद अब यह मामला केवल एक महिला की दर्दनाक मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कथित हमले की पूरी परिस्थितियों, आरोपियों की भूमिका और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर मंजीत की मां ने पुलिस की भूमिका को लेकर जो आरोप लगाए हैं, उन्होंने मामले की संवेदनशीलता और बढ़ा दी है। परिवार का कहना है कि मंजीत ने 5 अगस्त को होश में आने के बाद बयान देने की स्थिति हासिल की थी और पुलिस को इसकी सूचना देकर अस्पताल में उनका बयान दर्ज करने का आग्रह किया गया था, लेकिन कथित तौर पर पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। अब मंजीत की मौत के बाद परिवार न्याय की मांग कर रहा है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो सकती है।

परिचितों पर अपहरण और बर्बर हमले का आरोप

मंजीत कौर की मां की ओर से दर्ज शिकायत के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 3 जुलाई को हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंजीत को उनके दो परिचितों—शुभी और पिंडा—ने चंडीगढ़ के सेक्टर 34 में स्थित एक शराब की दुकान के पास बुलाया था। आरोप के मुताबिक, वहां पहुंचने के बाद दोनों ने कथित तौर पर मंजीत का अपहरण कर लिया। इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। घटना के बाद मंजीत गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचीं, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें लंबे समय तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। इस दौरान परिवार लगातार उनके ठीक होने की उम्मीद करता रहा। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि 3 जुलाई को वास्तव में क्या हुआ था, मंजीत को किस परिस्थिति में आरोपियों के साथ जाते देखा गया, कथित हमले के पीछे क्या कारण था और घटना में कितने लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। जांच में मेडिकल रिकॉर्ड, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, संभावित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और आरोपियों से संबंधित जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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मां ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

मामले का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू मृतका की मां द्वारा पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोप हैं। मां के अनुसार, मंजीत ने 5 अगस्त को अस्पताल में होश हासिल किया था और उस समय वह घटना के संबंध में बयान देने की स्थिति में थीं। परिवार का दावा है कि इस संबंध में खरड़ पुलिस को सूचना दी गई थी और पुलिस से अस्पताल पहुंचकर मंजीत का बयान दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन मां का आरोप है कि पुलिस बयान दर्ज करने के लिए अस्पताल नहीं पहुंची। यह आरोप जांच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि पीड़िता वास्तव में घटना के संबंध में बयान देने की स्थिति में थीं, तो उनका बयान मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता था। हालांकि, इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और उस समय की जांच की वास्तविक स्थिति भी सामने आना जरूरी है। यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि पुलिस को सूचना कब मिली, किस अधिकारी को सूचना दी गई, पीड़िता की मेडिकल स्थिति क्या थी और बयान दर्ज करने को लेकर पुलिस ने क्या कदम उठाए थे। यदि पुलिस को सूचना मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो इस पहलू की भी जांच की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर, यदि चिकित्सकीय या कानूनी कारणों से बयान दर्ज करना संभव नहीं था, तो उसका रिकॉर्ड और आधिकारिक स्पष्टीकरण भी मामले को समझने में महत्वपूर्ण होगा।

करीब दो महीने तक जिंदगी के लिए लड़ती रहीं

3 जुलाई की कथित घटना के बाद मंजीत कौर ने करीब दो महीने तक अस्पताल में इलाज कराया। गंभीर चोटों के कारण उनका उपचार लगातार चलता रहा और परिवार उनकी हालत में सुधार की उम्मीद लगाए रहा। 5 अगस्त को उनके होश में आने की खबर ने परिवार के भीतर एक नई उम्मीद पैदा की थी। परिवार को उम्मीद थी कि मंजीत न केवल स्वस्थ होंगी बल्कि अपने साथ हुई घटना के बारे में पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी भी दे सकेंगी। लेकिन यह उम्मीद ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। 26 अगस्त को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मंजीत की मृत्यु के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब मामले की परिस्थितियों को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जोड़ने की चुनौती है। मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल में भर्ती होने से लेकर मृत्यु तक का पूरा चिकित्सकीय रिकॉर्ड, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, आरोपियों के बयान, संभावित गवाह और शिकायत में दर्ज आरोप जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जाना जरूरी होगा कि घटना से पहले मंजीत किन लोगों के संपर्क में थीं और 3 जुलाई के दिन उनके साथ घटनाओं का क्रम किस तरह आगे बढ़ा।

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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर थीं मंजीत कौर

मंजीत कौर पंजाबी सोशल मीडिया जगत से जुड़ी हुई थीं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर उनकी पहचान थी। उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया समुदाय और उनके परिचितों के बीच भी शोक और चिंता का माहौल है। हालांकि इस मामले की गंभीरता उनकी सोशल मीडिया पहचान से कहीं आगे है। यह एक ऐसी महिला की मौत का मामला है, जो कथित तौर पर हिंसक हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद लगभग दो महीने तक अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष करती रही। परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन रहा होगा, क्योंकि एक ओर बेटी की जिंदगी बचाने की उम्मीद थी तो दूसरी ओर कथित अपराध की सच्चाई सामने आने और न्याय मिलने की चिंता भी बनी रही। अब मंजीत की मौत के बाद परिवार की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी भूमिका कानून के अनुसार तय की जाए। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने से पहले जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है, लेकिन साथ ही पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच और न्याय की प्रक्रिया का पूरा भरोसा मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मौत के बाद न्याय की लड़ाई और तेज होने की उम्मीद

मंजीत कौर की मौत के बाद अब इस मामले में पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। परिवार की शिकायत में जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी भूमिका की जांच के साथ यह भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि 3 जुलाई को वास्तव में क्या हुआ और मंजीत को किस परिस्थिति में गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया। इसके अलावा मां द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों की भी तथ्यात्मक जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 5 अगस्त को मंजीत के होश में आने और बयान देने की कथित स्थिति के बारे में पुलिस को क्या जानकारी दी गई थी तथा उसके बाद क्या कदम उठाए गए। फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवाल अनुत्तरित हैं—मंजीत को किसने और क्यों बुलाया, उनके साथ कथित हिंसा क्यों हुई, आग लगाए जाने की परिस्थितियां क्या थीं और क्या उनकी हालत में सुधार के दौरान उनका बयान दर्ज किया जा सकता था। इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष और विस्तृत जांच से ही सामने आ सकता है। मंजीत कौर की मौत ने परिवार को गहरा सदमा दिया है, लेकिन अब उनकी मौत के बाद सबसे बड़ी जरूरत यही है कि मामले की हर कड़ी की जांच हो, आरोपों की सच्चाई सामने आए और यदि कोई व्यक्ति अपराध का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

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